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इतिहास से छंटेगी धुंध : अकबर पर शाज़ी ज़माँ का नया उपन्यास

ऋचा कुलश्रेष्ठ

29th October 2016

बीस साल की खोज और एक उपन्यास : अकबर के जीवन पर पड़ेगी नई रौशनी। इतिहास की अनजानी वास्तविकताओं को सामने लाने वाला उपन्यास ‘अकबर’

इतिहास से छंटेगी धुंध : अकबर पर शाज़ी ज़माँ का नया उपन्यास

इतिहास में अक्टूबर का महीना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिन का ही नहीं, बल्कि एक और विरले बादशाह के जन्म का भी महीना है जिसका नाम इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखा है। मुग़ल बादशाह ‘अकबर' का जन्म इसी महीने में 15 तारीख को 1542 ई. में हुआ था और उनकी मृत्यु भी अक्टूबर में ही 25 तारीख को 1605 ई. में हुई थी। वर्ष 2016 इसलिए भी ख़ास है क्योंकि यह वर्ष उनके गद्दीनशीं होने का 460वां वर्ष भी है।

 बादशाह अकबर के जीवन की और बहुत सारी रोचक और अनजानी जानकारियों से भरपूर उपन्यास ‘अकबर' राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। उपन्यासकार शाज़ी ज़माँ का नया उपन्यास महज़ कोरी कल्पनाओं के सहारे बुनी गई कोई फंतासी नहीं है, बल्कि यह इतिहास की वास्तविकता का आख्यान है ।

शाज़ी ज़माँ दिल्ली के सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक हैं। थामसन फाउंडेशन, सीएनएन और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस जैसे संस्थानों से शुरूआती ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वो इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता में बरसों से कार्यरत हैं।

‘अकबर' बाजार से लेकर दरबार तक के ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर रचा गया उपन्यास है। इस उपन्यास को लिखने के लिए लेखक ने 20 सालों तक ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों, चित्रों आदि की खोजबीन की है। सचाई की तह तक पहुँचने की इस यात्रा के दौरान 8 सालों की मेहनत के बाद उपन्यास की पाण्डुलिपि को आख़िरी शक्ल दिया जा सका है।

शाज़ी ज़माँ ने कोलकाता के इंडियन म्यूज़ियम से लेकर लंदन के विक्टोरिया एल्बर्ट तक के बेशुमार संग्रहालयों में मौजूद अकबर की या अकबर द्वारा बनाई गई तस्वीरों को जाना-समझा है। बादशाह और उनके क़रीबी लोगों की इमारतों का मुआयना किया है और 'अकबरनामा' से लेकर ‘मुन्तख़बुत्तवारीख़', 'बाबरनामा', ‘हुमायूंनामा' और 'तज़्किरातुल वाक़यात' जैसी किताबों का और जैन और वैष्णव संतों और ईसाई पादरियों की लेखनी का भी अध्ययन किया है।

दरअसल यह उपन्यास न केवल इतिहास से जुड़े कई तरह के मिथ को तोड़ता है, बल्कि नई जानकारियों को प्रमाण के साथ सामने ला रहा है। उपन्यास के कई आकर्षणों में से एक अकबर के जीवन की वो दुर्लभ रंगीन तस्वीरें हैं जिन्हें किताब में शामिल किया गया है।

अकबर के समय के भारत और अकबर के साम्राज्य का नक्शा जानेमाने नक्शानवीस ‘फैज़ हबीब' ने खास तौर पर इसी उपन्यास के लिए तैयार किया है। मुग़ल वंश वृक्ष के साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां है भी किताब के अंत में पाठकों के साथ साझा की गईं हैं।

‘अकबर' अपने कवर डिज़ाइन को लेकर पहले ही सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका कारण कवर पर इस्तेमाल किया गया  ‘अकबर कीढाल का असल चित्र'  है जो ‘छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय, मुंबई' में मौजूद है। इस ढाल से बादशाह अकबर की शख़्सियत के कई पहलू ज़ाहिर होते हैं । दरअसल, ढाल के बीचों-बीच सूर्य की छवि है। बादशाह अकबर सूर्य के उपासक थे और हर रोज़ सुबह उठ कर सूर्य के एक हज़ार नाम (सूर्यसहस्रनाम) का जाप किया करते थे । इसके साथ ही ढाल में चारों तरफ़ राशियाँ अंकित हैं। इतिहासकारों का मानना है कि बादशाह अकबर का ज्योतिष में गहरा यक़ीन था। ढाल पर फ़ारसी में लिखा है- 'बुलंद इक़बाल शहंशाह अकबर'  यानी वो बादशाह जिनकी तक़दीर बुलंद है।

उपन्यास का आवरण पूजा आहूजा ने तैयार किया है और टाइटल की कैलिग्राफी राजीव प्रकाश खरे ने की है। अमेजन पर उपन्यास की प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है और यह बेस्टसेलर लिस्ट में तेजी से उपर चढ़ रहा है.

राजकमल प्रकाशन समूह के सम्पादकीय निदेशक सत्यानन्द निरुपम ने उपन्यास के बारे में कहा कि "पिछले 6 महीनों में लेखक-संपादक कई बार साथ बैठे. उपन्यास से जुड़ी छोटी से छोटी बात पर हमारे बीच गंभीर चर्चा हुई. हम दोनों एकराय होते गए और आगे बढ़ते रहे। मैं शाज़ी ज़माँ की तैयारी से बहुत संतुष्ट हूं। इस किताब से पहले अकबर पर हिंदी में राहुल सांकृत्यायन की ही किताब का ध्यान है. एक लम्बे अरसे बाद हिंदी में इतिहास से जुड़े किसी विषय पर ऐसी तैयारी से लिखा गया कोई उपन्यास आ रहा है। "

 राजकमल प्रकाशन समूह के प्रबंध निदेशक अशोक महेश्वरी ने कहा कि "शाज़ी ज़मां हमारे पुराने लेखक हैं. इनके पिता बदीउज़्ज़माँ साहेब की भी किताबें राजकमल से ही प्रकाशित हुई हैं. ‘अकबर' उपन्यास हिंदी प्रकाशन में शायद एक नया मोड़ साबित हो. हमारे लिए यह खुशी की बात है कि अंग्रेजी के प्रतिष्ठित प्रकाशन ‘स्पीकिंग टाइगर' ने इसका अंग्रेजी अनुवाद छापने का निर्णय लिया है."

स्पीकिंग टाइगर के प्रकाशक और सह-संस्थापक रवि सिंह ने ‘अकबर' के अंग्रेजी संस्करण के प्रकाशन के निर्णय के बारे में बताते हुए कहा कि "स्पीकिंग टाइगर ने ‘अकबर' के अंग्रेजी संस्करण के प्रकाशन का निर्णय लिया है। यह हमारे लिए बहुत ख़ुशी की बात है। शाज़ी ज़माँ ने इतिहास के एक महान विषय पर महत्वपूर्ण उपन्यास लिखा है। यह एक संग्रहणीय काम है जिसमें ऐतिहासिकता के साथ-साथ साहित्यिक उत्कृष्टता शामिल है । "

 लेखक शाज़ी ज़माँ ने कहा कि- " मुझे विश्वास है कि प्रकाशन जगत के दो बड़े स्तंभ--राजकमल और स्पीकिंग टाइगर--बादशाह अकबर की इस दास्तान का  दूर दूर तक प्रसार करेंगे। बादशाह अकबर की पेचीदा शख़्सियत हर पेचीदा दौर और समाज के लिए प्रासंगिक है। पिछले बीस वर्षों के शोध के दौरान मैंने  ये जानने की कोशिश की कि जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर ने दीन और दुनिया की शक्तियों को किस तरह से समझने और समझाने का प्रयास किया और कैसे उनसे लोहा लिया । मेरे पिता ख़्वाजा बदीउज़्ज़माँ के उपन्यास और मेरे भी पिछले दोनों उपन्यास राजकमल से छपे । इस तरह से अकबर' ने मेरे और राजकमल के दो पीढ़ी के संबंध को और मज़बूत किया है । "

राजकमल प्रकाशन से शाज़ी ज़माँ के दो उपन्यास ‘प्रेमगली अति सांकरी' और ‘जिस्म जिस्म के लोग' पहले से प्रकाशित हैं।