कैंसर मरीजों को मिली पर्मानेंट सुंदरता

अर्पणारितेश यादव

9th December 2016

खूबसूरती हर महिला का अधिकार है फिर भला ये हक कोई बीमारी कैसे छीन सकती है। कैंसर, ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों के दौरान ली जाने वाली दवाएं व थैरेपी के कारण शरीर व सिर के सारे बाल जल जाते हैं। इस कारण चेहरे को खूबसूरती के साथ फ्रेम देने वाली आईब्रोज के बाल भी खत्म हो जाते हैं जिससे सुंदरता फीकी पड़ जाती है। इस फीकेपन पर खूबसूरती की स्याही व रंग भरने का कार्य कर रही हैं...पर्मानेंट मेकअप एक्सपर्ट व एल्पस कॉस्मेटिक क्लीनिक की एक्ज़ीक्यूटिव डॉयरेक्टर गुंजन गौड़। आइए जाने गुंजन से उनकी इस सफ़र की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी.....

कैंसर...एक ऐसी बीमारी जिसका नाम ही काफी है, किसी के भी रौंगटे खड़े करने के लिए। इस बीमारी का दर्द किस कदर दर्दनाक है, ये तो वो ही समझ सकता है, जो इसके दर्द से गुज़र रहा हो या गुज़र चुका हो। लेकिन क्या आपका और हमारा फर्ज नहीं बनता कि कम से कम किसी के शारीरिक दर्द को भले ही न कम कर सकें लेकिन उसे कुछ पल की खुशी देकर मानसिक सुकून तो दे दें। ऐसे ही सोच को रखने वाली ब्यूटी एक्सपर्ट गुंजन ने हमेशा कैंसर पेशेंट के लिए कुछ करने का सोचा और शुरू कर दिया अपना ये सुहाना सफ़र।

नई दिल्ली के पॉश इलाके सॉउथ एक्सटेंशन में स्थापित भारती तनेजा एल्पस ब्यूटी लॉउंज में गुंजन ने ब्लिस फाउंडेशन के साथ मिलकर अपने इस कार्यक्रम की शुरूआत की....इस खास कार्यक्रम के विषय में गुंजन से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि, "मेरा हमेशा से एक ही सपना था कि मैं अपने प्रोफैशन से लोगों की दुआएं हासिल करूं और जब मैंने पर्मानेंट मेकअप सीखा और उसे लोगों पर निभाया, उसी वक्त मुझे ये एहसास हो गया कि आज मैं कुछ बन गई हूं। ये बीमारी जिसे हम सब कैंसर के नाम से जानते हैं, ये शारीरिक के साथ-साथ मानसिक पीड़ा भी देती है।

ये पीड़ा तब डबल हो जाती है, जब चेहरे को सुंदरता प्रदान करती आईब्रोज़, इसके इलाज के दौरान खो जाती है। ऐसे में मैं अपनी कला के बल पर व निशुल्क इस दर्द को भर सकूं, बस यही सोचकर मैंने इस कार्यक्रम का आगाज़ किया"। आइए जानें अब गुंजन से उनके इस ईवेंट से जुड़ी अन्य और बातें।

पर्मानेंट आईब्रोज़ को बनाया सल्यूशन :- कैंसर के मरीज जो कीमोथैरेपी के दौरान अपनी आईब्रोज़ के बाल खो चुके होते हैं, उन्हें अपनी खूबसूरती को बनाएं रखने के लिए आईब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करना पड़ता है। लेकिन पर्मानेंट आईब्रोज बनवाकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके जरिए मशीन द्धारा एक बार आईब्रो को खूबसूरत शेप व मनचाहे रंग से बना दिया जाता है जो पसीने या नहाने से खराब नहीं होती है। इसका असर लगभग 12 से 15 साल बना रहता है।

जरूरी था डर निकालना :- दर्द से गुज़र चुके या उससे जूझ रहे लोगों के दिल से पर्मानेंट मेकअप का डर निकालना भी एक काम था। ऐसे में गुंजन कहती हैं कि, "मैंने खुद सभी लोगों से बात की और उन्हें ये आश्वासन दिया कि जितना दर्द किसी महिला को थ्रेडिंग बनवाने के दौरान होता है, बस उतना ही दर्द आपको पर्मानेंट आईब्रोज़ बनवाते वक्त होगा। ऐसी कॉन्सलिंग के बाद ही वो आईब्रोज़ बनवाने को तैयार हुईं"।

                     

 

 

 

 

 

 

 

 

कैसे दिया जाता है आगाज़ :-  ऐसा कोई विशेष ब्रांड नहीं जिस पर इस प्रॉसैस के लिए भरोसा किया जा सके और न ही इस प्रक्रिया को करने में किसी ऑपरेशन की आवश्यकता है। जर्मन कलर्स और नीडल्स के द्वारा पर्मानेंट मेकअप किया जाता है। पर्मानेंट मेकअप का कोई साइड इफैक्ट नहीं है, बस इस प्रॉसैस को करने के बाद हल्की सी रेडनेस नजर आती है जो 15 से 20 मिनट में चली जाती है। पर्मानेंट आईब्रो ज्यादातर वही कस्टमर करवाते हैं जिनकी आईब्रो का कलर लाइट है, शेप किसी कारण खराब है, बाल कम है या फिर नहीं हैं।

शुक्रिया के लिए लफ्ज़ नहीं :अपने आप को फिर से वैसे ही पाकर जैसी वो कभी बीमारी से पहले हुआ करती थी, ऐसे स्वरूप को पाकर वो सभी बेहद खुश थीं। इस मौके पर कैंसर की लड़ाई से जीत हासिल कर चुकी निधि ने कहा कि, "कीमोथैरेपी के दौरान ही उनके बाल पूरे तरह से जल चुके थे और रोजाना कहीं बाहर निकलने से पहले उन्हें आईब्रो पेंसिल का इस्तेमाल करना पड़ता था। ये पेंसिल से बनाई हुई आईब्रो या तो हाथ लगने से कभी मिट जाती थी या फिर पसीने या भीगने से भी खराब हो जाती थी। लेकिन आज पर्मानेंट आईब्रोज़ बनवाकर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि गुंजन जी ने मुझे दूसरा जन्म दे दिया हो"। वहीं रितिका ने कहा कि "मुझे इस ट्रीटमेंट को लेने से पहले बहुत घबराहट हो रही थी लेकिन सच पूछो तो पता भी नहीं चला कि कब मेरे चेहरे को ये सुंदर सा फ्रेम मिल गया...थैंक्यू गुंजन जी, गॉड ब्लैस यू"।

अंतहीन सफ़र- गुंजन का ये नेक दिल कार्य कोई पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी वो कई बार इस तरह के कार्यक्रम कर चुकी हैं। उन्होंने "पिंक राहगिरी" कैम्पेन के साथ मिलकर भी ऐसे कार्य को अंजाम दिया था और आगे भी वो अपने इस मकसद को प्रगतिशील बनाएं रखने के लिए, ऐसे कार्य करती रहेंगी। 

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