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वास्तु के अनुसार ऐसा होना चाहिए आपके सोने का तरीका

गृहलक्ष्मी टीम

2nd February 2017

हर व्यक्ति रात में आराम से सोना चाहता है। प्रकृति के अनुसार रात्रि सोने के लिए ही बनाई गई है, फिर भी कोई गहरी नींद सोता है तो कोई पूरी रात मुलायम गद्दे तकिये होते हुए भी करवटें बदलते हुए निकाल देता है। इस स्थिति में वास्तु के अनुसार मनुष्य को मधुर निद्रा एवं स्वास्थ्य लाभ के लिए वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर शयन कक्ष की व्यवस्था दी गई है।

वास्तु के अनुसार ऐसा होना चाहिए आपके सोने का तरीका
 
 
जिस प्रकार वास्तु रसोई, स्नानघर, स्टोर, आंगन, द्वार का निर्धारण करता है, उसी कड़ी में उसने सबसे अधिक महत्त्व गृहस्वामी के शयनकक्ष को अर्थात् मास्टरबेडरूम को दिया है। घर के मालिक को घर की धूरी माना गया है, हर मालिक चाहता है कि पत्नी, संतान एवं परिवार उसके आदर्शों का पालन करें, इसलिए गृहस्वामी का निश्चित कक्ष होना अनिवार्य है।
 
शयन कक्ष व सोने का तरीका कैसा हो?
 
 
- सोने की सबसे उत्तम स्थिति है- उत्तर की ओर पैर और दक्षिण की ओर सिरहाना। इसके पीछे कारण यह है कि यदि कोई व्यक्ति उत्तर की ओर पैर करके सोता है तो उसे ऐसा प्रतीत होता है कि वह उत्तर के स्वामी कुबेर की शरण में आ रहा है, जहां उसे आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे।
- मास्टर बडरूम नऋत्य कोण अथात दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए। यह शक्ति का संचय एवं स्थिरता देने वाला है।
- पलंग का सिरहाना सदैव दक्षिण दिशा में होना चाहिये परिस्थिति विशेष हो तो पश्चिम में भी किया जा सकता है। मान्यता है कि प्रात: जागते ही प्राणी के लिए शुभ प्रभात कहा जाता है, जब मनुष्य पूर्व दिशा में सिर कर सोयेगा तो जागते समय उसका मुंह पश्चिम दिशा में होगा और पश्चिम में शुभ प्रभात का वर्णन नहीं मिलता। शास्त्रों में कहा गया है, उत्तर की ओर मुंह करके जो भी मांगा जाय या योजना बनाये वो सुनिश्चित सफल होती है, जबकि पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके मांगने से आसुरी शक्तियां प्रसन्न होती है।
- बेडरूम के दक्षिण और पश्चिम के कोने में तिजोरी या अलमारी रखी जानी चाहिए जिसमें कि आभूषण, रुपया-पैसा रखा जाता हो और अलमारी का  मुंह उत्तर दिशा में खुलता हो।
- पत्नी को स्वयं के बांयी ओर होना चाहिए जिससे विचारों मेें समानता रहे। जहां पत्नी- पति के दांयी ओर सोती हो वहां पति-पत्नी में वैचारिक मतभेद होते हैं और पत्नी पति की योजना एवं विचारों में व्यर्थ तर्क-कुतर्क, दखल अंदाजी करती है।
- दक्षिण और पूर्व में टी.वी., हीटर या लाल बल्ब लगाना शुभ है जिससे आलस्य का संचार नहीं होगा।
- इस कक्ष में कभी भी जूता स्टैंड आदि नहीं रखें। ड्रेसिंग टेबल पूर्व-उत्तर के कोने में हो।
- बेडरूम का एक ही द्वार होना चाहिये जो पूर्व या उत्तर दिशा में खुलता हो। एक और द्वार की आवश्यकता हो तो उत्तर या पूर्व के कोने में भी रखा जा सकता है।
- पूर्व या उत्तर के कोने में ईश्वर का स्थान निश्चित करें और उस स्थान पर एक भरा हुआ जल पात्र रखें।
- बेडरूम की दीवारें यथासंभव नीले रंग की हो चाहे मालिक की राशि, लग्न कोई भी हो।
- गोपनीय सूत्र के अनुसार मास्टर बेडरूम में बाहर के आगंतुकों का प्रवेश वर्जित है।
- समुद्र में पायी जाने वाली सीपियों का भी शयन कक्ष में महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। बाजार में सीप में बने सजावटी आइटम मिलते हैं जो दरवाजे पर सजाये जा सकते हैं या फिर शयन कक्ष में लगाये जा सकते हैं। यह सीपों से बनी वस्तुएं पति-पत्नी के बीच फैले मनमुटाव व मतभेदों को दूर कर दोनों में स्नेह उत्पन्न करते हैं और नयी उत्तेजना का संचार करते हैं।
- बेडरूम किचन के पास भी नहीं होने चाहिए और मकान के मध्य वाले हिस्से में भी नहीं होने चाहिए। किसी भी कक्ष के लिए मकान का मध्य भाग वर्जित है।
- अपने शयन कक्ष के दक्षिणी पश्चिमी भाग को सक्रिय बनाने के लिए हवा से हिलकर बजने वाले शीशे के उपकरण लगायें। यह उपकरण दक्षिणी-पश्चिमी भाग पर ही लगना चाहिए। इससे वैवाहिक जीवन में मिठास आती है और वैचारिक तालमेल भी बना रहता है।
- मकान के दक्षिणी भाग में आपका बेडरूम है तो यह आपके लिए बेहतर है क्योंकि यह स्थान जोश और खुशी का स्थान है। यहां रहने वालों के शारीरिक संबंध काफी फलते-फूलते हैं। यहां नव-विवाहितों का बेडरूम होना चाहिए, क्योंकि उन्हें ऐसी ही जगह की तलाश होती है। 
- बेडरूम से बाथरूम जुड़ा होने पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह प्रदान करता है। इसमें बाहर की ताजी हवा का प्रवेश बहुत ही जरूरी है और अंदर की खतरनाक गैस का बाहर निकलना भी उतना ही जरूरी है। नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोकने के लिए बाथरूम में एक्जास्ट फैन लगायें।
-  गलत स्थान और बीम के नीचे सोने पर विभिन्न रोगों की उत्पत्ति होती है, जिनमें एक सिरदर्द भी है।
 
यह उपाय दिखने में छोटे लगते हैं परंतु इनका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। चैन की नींद सोने के बाद ही व्यक्ति सफलता के लिए आगे बढ़ सकता है,  नयी स्फूर्ति और जोश के साथ कुछ सोच समझ सकता है। अत: आपको चाहिये कि इन नियमो को अपनायें और चैन की नींद सोयें।
 
(साभार - साधनापथ)