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जानिए चोकर से होते हैं किस-किस तरह के फायदे

गृहलक्ष्मी टीम

6th February 2017

जानिए चोकर से होते हैं किस-किस तरह के फायदे
 
चोकर गेहूं के अंदरूनी छिलके को कहते हैं। अक्सर लोग गेहूं का चोकर छानकर बाहर फेंक देते हैं। जबकि चोकर में बहुत सारे लवण और विटामिन होते हैं। इसे आदर्श रेशा भी कहा जाता है। चोकर वाले आटे का प्रयोग करने के क्या हैं स्वास्थ्य लाभ? आइए जानते हैं। 
 
 
● गेहूं का चोकर कब्ज दूर करने में अद्वितीय प्राकृतिक औषधि है। चोकर युक्त आटे में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो कि पेट में कब्ज नहीं होने देता।
● चोकर आंतों में जाकर उत्तेजना पैदा नहीं करता, अपितु गुदगुदी पैदा करता है जो कि प्राकृतिक नियम है। आप पशुओं का मल निकलते देखिये तब मालूम पड़ेगा कि वे मल निकालते समय कैसा व्यवहार करते हैं। आंतों में गुदगुदाहट पैदा होने से शरीर की स्थिति ऐसी ही होती है।
● इससे मल पतला नहीं अपितु मुलायम तथा बंधा हुआ आता है। आंतों में मरोड़ पैदा नहीं होती। मल बिना जोर लगाये आसानी से निकल जाता है। जोर लगाकर मल निकालने से नाड़ी कमजोर हो जाती है तथा शक्ति न रहना, वायु भरना, बवासीर, कांच निकलना इत्यादि रोग होने का डर रहता है।
● यह देखने में खुरदरा है, परंतु चबाते समय मुहं की लार से मुलायम हो जाता है। चूंकि यह मुंह की लार को काफी मात्रा में समेट लेता है, अत: भोजन के पचने में सहायता करता है।
● चोकर हर दृष्टि से अच्छा है। भोजन में से गुणकारी चोकर को निकालकर हम शरीर के साथ अन्याय करते हैं। चोकर निकाले हुए आटे की रोटियां स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं, वे सुपाच्य नहीं हैं।
● चोकर से शरीर पवित्र रहता है। यह पेट के अंदर का मल झाड़-बुहार कर पेट को साफ कर देता है। पेट साफ रहने से कोई बीमारी नहीं होती।
● भोजन में चोकर को प्रधानता दें। इसको आटे में मिलाइये। सब्जी, दूध, दही, सलाद, शहद में मिलाकर खाइये। गुड़ में मिलाकर लड्ïडू बनाइये। इस प्रकार भोजन का आनन्द लें।
● यह कैंसर से दूर रखता है तथा आंतों की सुरक्षा करता है, आमाश्य के घाव को ठीक करता है। क्षयरोग भी दूर करता है, हृदयरोग से बचाता है, कोलेस्ट्रॉल से रक्षा करता है। चोकर से स्नान करने पर चरम-रोग अच्छा होता है।
● चोकर खाने वालों को एपेंडीसाइटिस नहीं होती, आंतों की बीमारी नहीं होती। अर्श, भगंदर, बृहदान्त्र एवं मलाशय का कैंसर नहीं होता।
● मोटापा घटाने के लिये चोकर निरापद औषधि है, क्योंकि भोजन में कमी करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, रोगी आसानी से पतला हो जाता है।
● चोकर मधुमेह निवारण में मदद करता है।
● चोकर का बिस्किट, चोकर-आलू की रोटी, हलवा बनाकर आनन्द के साथ खाया जा सकता है।
● चोकर को गाजर के हलवे में भी स्थान दें। यह मिस्सी रोटी को और भी स्वादिष्ट बनाता है। चोकरदार बूंदी का रायता स्वाद के साथ खाया जा सकता है।
● इडली, डोसा, कचौड़ी बनाते समय चोकर को न भूलें। सरसों का शाक चोकर के साथ बनाइये।
● चोकर साफ-सुथरा, मोटा, स्वादिष्ट ताजे आटा से निकाला हुआ एवं जर्म्स से मुक्त
होना चाहिये।
● छोटी मिल का सफाई से बना चोकर मोटा एवं अच्छा होता है।
● चोकर खाने वालों का दिल-दिमाग स्वस्थ रहता है, क्योंकि चोकर से पेट साफ हो जाता है।
● चोकर क्षारधर्मी होने के कारण रक्त में रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाता है।
● सभी प्रकार के अन्न के रेशों में गेहूं के चोकर को आदर्श स्थान मिला है अर्थात् गेहूं का चोकर आदर्श रेशा है।
● चोकर में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, केलोरीज, रेशा, कैलशियम, सोडियम, आक्जेलिक एसिड, पोटैशियम, तांबा, सल्फर, क्लोरीन, जिंक, थियामिन, विटामिन ए, रिवोफ्लोविन, निकोटिनिक एसिड, पायरिडोक्सिन, फोलिक एसिड, प्रेटाथेनिक एसिड एवं विटामिन 'के' पाया जाता है।
 
 
 

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