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निवेश करने से पहले ध्यान रखें ये 9 जरूरी बातें

अश्विनी गुप्ता

3rd March 2017

पहली गलती जो लोग करते हैं वह यह कि वे जल्दी से जल्दी बहुत लाभ का वादा देने वाले विज्ञापनों या कंपनियों की बातों पर बिना जांच पड़ताल किए विश्वास कर लेते हैं।

 

सभी जानते हैं कि आम जनता से जमा राशियां प्राप्त करने का अधिकार आमतौर पर केवल विधिवत रूप से स्थापित बैंकों को है। फिर भी समय-समय पर ऐसी घटनाएं होती रहती है, जिनमें निवेश की किसी स्कीम में बहुत अधिक लाभ का लालच देकर लोगों को गुमराह करके हजारों-लाखों लोगों से भारी-भरकम राशि इकट्ठी कर ली जाती है और इसे बाद स्कीम चलाने वाले लोग या तो गायब हो जाते हैं या फिर लाभ नहीं दे पाते या निवेशकों का मूलधन भी वापस नहीं कर पाते। देश में लाखों ऐसे व्यक्ति हैं जो अपने निवेश के धन को वापस प्राप्त करने के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। परंतु वर्षो की कानूनी लड़ाई के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। ऐसे में यदि आप अपना पैसा किसी भी तरह के निवेश में लगाने से पहले कुछ सावधानियां बरत लें तो न केवल अपने पैसे को सुरक्षित रख सकते हैं परंतु अच्छा लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

1. विज्ञापनों पर भरोसा न करें 

निवेश करते समय सबसे पहली गलती जो कई लोग करते हैं वह यह है कि वे जल्दी से जल्दी बहुत लाभ का वादा देने वाले विज्ञापनों या कंपनियों की बातों पर बिना जांच पड़ताल किए विश्वास कर लेते हैं। आए दिन दैनिक समाचारपत्र ऐसे लुभावने विज्ञापन छापते रहते हैं। लोगों को ईमेल या एसएमएस द्वारा भी ऐसी स्कीमों के चंगुल में फंसाने की कोशिश की जाती है। सामान्यत: यह कहा जा सकता है कि यदि कोई विज्ञापनकर्ता 10/12% वार्षिक से अधिक ब्याज या लाभ की बात करता है या थोड़े ही समय में लाखों की कमाई का आश्वासन देता है तो ऐसी स्कीमों से दूर रहना चाहिए। कहा जा सकता है कि ऐसी किसी स्कीम के बारे में कुछ क्षण के लिए सोचने या पढऩे की भी जरूरत नहीं है।

2. किसी भी व्यक्ति की बातों में न आएं

ऐसे ही विज्ञापनों की श्रेणी में वे विज्ञापन भी आते हैं, जिनमें कोई व्यक्ति खुद को किसी प्रतिष्ठित संस्था या बैंक का प्रतिनिधि बता कर राशि जमा करने की बात करता है। सभी बैंक या प्रतिष्ठित संस्थाओं के अधिकृत कार्यालय या शाखाएं होती  हैं, जिनमें जाकर निवेश की किसी योजना का पता लगाया जा सकता है। बाजार में घूम रहे सेल्समैन या एसएमएस भेजने वाले किसी व्यक्ति की बात पर विश्वास करके निवेश करना एक बड़ी भूल है। 

3. बचत की जानकारी गोपनीय रखें

सभी तरीके के निवेश में से मान्यता प्राप्त बैंकों में पैसे जमा करवाना सबसे सुरक्षित तरीका है। परंतु इसमें ऐसा नहीं कि कुछ भी जोखिम नहीं या सावधानी बरतने की जरूरत नहीं। कई बार बैंकों के कर्मचारी भी किसी ग्राहक के खाते से धोखाधड़ी से पैसा निकाल लेते हैं यानी निवेशक का निकट व्यक्ति संबंधित चेक पर जाली हस्ताक्षर करके या एटीएम कार्ड का पिन डालकर धोखाधड़ी से पैसा निकाल सकता हैं। निवेशकों को चाहिए कि वे बैंक में अपनी बचत की जानकारी गोपनीय रखें, अपनी चेक बुक सुरक्षित रखें, अपने एटीएम के पिन की गोपनीयता बनाए रखें एवं अपने सहकर्मियों या मित्रों पर अंधविश्वास न रखें।

4. किसी एक जगह ज्यादा पैसा न लगाएं

धोखाधड़ी के डर के अतिरिक्त निवेश का एक मूलभूत सिद्धांत यह है कि किसी एक ही जगह बहुत ज्यादा पैसा न लगाया जाए। अगर कोई निवेशक कई तरह की अलग-अलग परिसंपत्तियों में पैसा लगाता है तो चाहे वह अपना पैसा शेयर बाजार में ही क्यों न लगाए, एक मोटे नुकसान की आशंका से बच सकता है। ऐसी उम्मीद कम ही है कि लंबे समय तक अलग-अलग कंपनियों के शेयरों के दाम में भी भारी गिरावट हो।

5. निवेश योजना से पहले आकलन करें

कोई भी निवेश योजना बनाने से पहले निवेशक को आकलन करना चाहिए कि उसे किस पैसे की कब जरूरत होगी। कुछ पैसा बैंक सावधि जमा खाते (एफडी) में रखने का लाभ यह है कि किसी भी समय जरूरत पडऩे पर सावधि जमा राशि का भुगतान लिया जा सकता है जबकि कुछ अन्य तरह की परिसंपत्तियों में परिसंपत्ति को कैश कराने में कठिनाई आ सकती है। अगर हम पिछले 40-50 साल के निवेश के माध्यमों का अध्ययन करें तो शेयर बाजार में लगाई गई पूंजी से निवेशकों को सबसे अधिक लाभ मिला है। अगर दस वर्ष या अधिक अवधि के लिए निवेश करना है तो आप निसंकोच शेयर बाजार में निवेश कर सकते हैं।

6. एसआईपी है सबसे बेहतर

निवेश का एक आधुनिक तरीका है जो एसआईपी के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब है- सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान। इसमें निवेशक एक या दो म्युचुअल फंड चुन सकता है और अपने बैंक को निर्देश दे सकता है कि हर  महीने एक निश्चित राशि किसी म्युचुअल फंड में लगा दी जाए। क्योंकि म्युचुअल फंड मैनेजर सैकड़ों कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं, इसलिए निवेश का जोखिम उन सैकड़ों कंपनियों में विभाजित हो जाता है। इसके साथ ही क्योंकि एसआईपी में निवेशक का निवेश हर महीने कई साल तक चलता है इसलिए किसी विशेष समय पर शेयर बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी निवेश पर नहीं पड़ता। यही वजह है कि एसआईपी यानी सिप में निवेश सुरक्षित माना जाता है।

7. जमीन में निवेश कर बचें बाजार के संकट से

शेयर बाजार के बाद जमीन-जायदाद एक ऐसा निवेश है, जिसमें बाजार की मूल्यवृद्धि से भी बचाव है। जैसे सब चीजों की कीमतें बढ़ती हैं संपत्ति का मूल्य भी बढ़ जाता है। परंतु इस निवेश में दो खतरे हैं- एक यह कि जरूरत पडऩे पर संपत्ति को जल्दी से बेचा नहीं जा सकता है और दूसरा यह कि किसी-किसी संपत्ति पर कई बार विवाद हो जाते हैं। किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले उसके कागजात की जांच पड़ताल अनुभवी वकील से करवा लेनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उस संपत्ति पर कोई विवाद किसी अदालत में लंबित तो नहीं है।

8. रखें सुरक्षित भविष्य का लक्ष्य

पिछले कई दशकों में वृद्धावस्था के लिए एक सुरक्षित भविष्य बनाने का लक्ष्य हर व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। इसी जरूरत को देखते हुए वृद्धावस्था में पेंशन के लिए एक सार्वजनिक स्कीम एनपीएस के नाम से शुरू की गई है। इससे वे लोग भी आजीवन पेंशन पाने की आशा रख सकते हैं जो अब तक पेंशन के लाभ से वंचित रहे हैं। सब लोग जानते हैं कि जीवन बीमा, पीपीएफ में 1,50,000 रु. तक निवेश करके आयकर में छूट मिलती है, पर एनपीएस की खासियत यह है कि इसमें लगाई गई 50,000/- रु. तक की राशि पर 1,50,000/- रु. की उपरोक्त छूट के अलावा आयकर छूट है। 

9. हमेशा अधिकृत कार्यालय या अधिकृत व्यक्ति से जानकारी लें

कोई भी निवेशक अगर बैंकों इत्यादि के अधिकृत कार्यालयों में जा कर या किसी भी स्कीम के बारे में चार-पांच जगह से छानबीन करके और अपने निवेश को अलग-अलग तरीके से बांट कर निवेश करता है तो न केवल नुकसान से बच सकता है परंतु अपनी जरूरतों के मुताबिक कुछ पैसा कभी भी निकाल सकता है, कर छूट का लाभ प्राप्त कर सकता है और लंबे समय तक किए गए निवेश पर उच्च लाभ प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा वह अपनी वृद्धावस्था में एक न्यूनतम आय का जरिया बनाए रखने के साथ अपनी मृत्यु के बाद अपने परिवार के लोगों के जीवनयापन के लिए उचित संसाधन छोडऩे के बारे में भी आश्वस्त हो सकता है। 

(लेखक एक प्रमुख राष्ट्रीय बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।)