GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

आखिर क्यूं चढ़ाया गया था प्रभु यीशू को क्रॉस पर?

गृहलक्ष्मी टीम

14th April 2017

कहते हैं जब-जब पाप का घड़ा भरता है औट धरती पर दुष्टों द्वारा अत्याचार होता है तब-तब कोई महापुरुष उस अत्याचार को खत्म करने धरती पट अवतरित होता है प्रभु यीशु भी उन्हीं में से एक हैं जो धरती पर भाईचारा, अपनापन एंव समता फैलाने आए थे परन्तु दुष्टों ने उन्हें भी ने छोड़ा और वह सबके पापों को अपने सिर लेकर धरती को पवित्र कर गए।

 

ईसाई धर्म में गुड-फ्राइडे को एक त्योहार के तौर पर मनाया जाता है, इस त्योहार को एक पवित्र, पाक एवं शुद्ध सप्ताह के दौरान मनाया जाता है। कहते हैं जिस दिन ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था यह वही दिन था। यह शुक्रवार ईस्टर रविवार से पहले आने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है। इस पर्व का पालन पाश्कल ट्रीडम के अंश के तौर पर किया जाता है और यह अक्सर यहूदियों के ‘पासोवर' के साथ पड़ता है। 
 
 
यह कयास लगाया जाता है कि ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन ही सलीब (क्रॉस) पर लटकाया गया एवं उनके हाथों, पैरों में कीलों के साथ उन्हें कांटों का मुकुट भी पहनाया गया था। इस बात की पुष्टि "सन्हेद्रिन ट्रायल ऑफ जीसस' के आध्यात्मिक विवरणों से भी हो जाती है। 
 
 
क्यों चढ़ाया गया यीशू को सलीब पर?
 
एक कहानी प्रचलित है कि यीशू के जन्म से पूर्व ही माता मरियम के स्वप्न में एक भविष्यवाणी हुई की वह ईश्वर के पुत्र को जन्म देगी, उस समय माता मरियम कुंवारी थीं तभी (यूसूफ जिन्होंने मरियम को अपनाया) के स्वप्न में भविष्यवाणी हुई एवं पवित्र आत्मा ने गर्भ में कहा कि मैं अपना स्थान ले लिया। कुछ समय बाद माता मरियम के गर्भ में पीड़ा बढ़ने के कारण एवं पर कोई उचित स्थान न होने के कारण एक तबेले में यीशू का जन्म हुआ। लगभग 30 वर्ष की आयु के आसपास प्रभु यीशू का सामना शैतान से हुआ वह शैतान यीशू की परीक्षा ले रहा था और यीशू शांत स्वभाव से कह रहे थे ईश्वर की परीक्षा न ले एवं वह सभी परीक्षाओं में विजयी रहे व शैतान ने अपने मुंह की खाई। इस घटना के कुछ समय पश्चात् यीशू ने अपने बारह शिष्यों का चुनाव किया और मनुष्य मात्र को ईश्वर भक्ति का संदेश देने लगे, यीशू के ये उपदेश 'सरमन ऑफ़ द माउंट" के नाम से पहचाने जाने लगे। 
यीशू अपने स्पर्श मात्र से ही दीन-दुखियों के दुखों को हर लेते थे। अनेकों दृष्टात्माओं ने भी उनके कल्याणकारी स्पर्श से लाभ उठाया। यीशू ने मोह-माया, सांसारिक दुखों एंव प्रलोभनों में फंसे दुखी जनों को ईश्वर की सच्ची राह पर चलने को प्रेरित किया।
 
 
गुड-फ्राइडे मानने के रीति-रिवाज
 
1 . जिन-जिन देशों में ईसाई परंपरा का कठोरता से पालन किया जाता है उन सभी देशों जैसे ग्रेट ब्रिटेन, बारमुडा, ब्राजील, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी एवं न्यूजीलैंड आदि में इस दिन को सार्वजनिक या संघीय छुट्टी के रूप में मनाया जाता है। 
 
2. हांगकांग में, सभी व्यवसाय प्रतिष्ठान और सरकारी कार्यालय सार्वजनिक त्यौहार के लिए बंद रहते हैं। 
 
3. जर्मनी में, थिएटर के नाटक प्रदर्शनों और सरकारी कार्यालय सार्वजनिक त्योहार के लिए बंद रहते हैं।  
 
4. दक्षिण अफ्रीका में, इस दिन सरकार व्यवसायों को खोलती और मनोरंजन केंद्रों की संचालित करती है। सभी सरकारी कार्यालय, विघालय और कुछ विशेष कारोबार कानूनानुसार इस दिन बंद रहते हैं। शराब को बेचना एवं खरीदना प्रतिबंधित है। 
 
5. भारत में, गुड-फ्राइडे के दिन केंद्रीय छुट्टी के साथ-साथ राज्य सरकार भी छुट्टी देती हैं। कुछ राज्य जैसे असम, गोवा और केरल जहां बहुमत में न होने के बावजूद ईसाईयों की प्रतिशत जनसंख्या अधिक है। इस दिन शेयर बाजार भी बंद रहते हैं, लेकिन देश के बाकी हिस्सों में ज्यादातर व्यवसाय इस दिन खुले रहते हैं। ज्यादातर विद्यालय इस दिन बंद रहते हैं।

 

ये भी पढ़े-

 

निर्जला एकादशी: इसी व्रत से मिला था भीम को स्वर्ग

घर में सुख-शांति चाहिए तो भूल कर भी न करें ये काम

शक्तिदायक है गायत्री मंत्र का जाप, अनोखी है महिमा

 

आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं। 

पोल

सबसे अछि दाल कौन सी है

गृहलक्ष्मी गपशप

जानिए बॉलीवु...

जानिए बॉलीवुड की...

चलिए जानते हैं कुछ एक्ट्रेसेस के बारे में जिन्होंने...

चाणक्य के अन...

चाणक्य के अनुसार...

सदियों से ये सोच चली आ रही है महिलाएं शारीरिक और मानसिक...

संपादक की पसंद

रामायण: घर-घ...

रामायण: घर-घर में...

रामानंद सागर की 'रामायण' लॉकडाउन में जब दोबारा प्रसारित...

खाद्य पदार्थ...

खाद्य पदार्थ जो...

आजकल आप थके-थके रहते हैं। रोमांस करने की आपकी इच्छा...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription