जानें प्रीमैच्योर डिलीवरी से बचने के तरीके

गृहलक्ष्मी टीम

24th July 2017

कोई मां नहीं चाहती कि उसका प्रीमैच्‍योर बेबी हो क्योंकि प्रीमैच्‍योर बेबी ठीक प्रकार से बने नहीं हुए होते हैं इसलिए हर मां इस अवस्‍था से दूर रहना चाहती है। अगर आप भी असमय प्रसव से बचना चाहती हैं तो प्रेगनेंसी के समय इन टिप्स को आजमाएं।

वैसे आपके लिए खुशखबरी यह है कि केवल 12 प्रतिशत प्रसव पीड़ा के मामले ऐसे होते हैं जिन्हें प्रीमेच्योर या प्रीटर्म कहा जा सकता है, यानी जो कि प्रेगनेंसी के 11वें सप्ताह से पहले होते हैं। इनमें से आधे उन महिलाओं के साथ होते हैं, जो जानती हैं कि उनकी असामयिक (प्रीमेच्योर डिलीवरी)हो सकती है। यदि आप भी इस खतरे का सामना कर रही हैं तो क्या इस असामयिक प्रसव से निबटने के लिए कोई तरीका अपना सकती हैं। कुछ मामले तो ऐसे हैं, जिनमें खतरा पहचानने के बाद भी उन पर काबू नहीं पाया जा सकता लेकिन कुछ मामलों में खतरे की दर घटाई जा सकती है। इनमें से जो भी लक्षण आपके साथ हों, उसे घटाने की कोशिश करें, उन पर काबू पाएं ताकि नन्हा शिशु सही समय पर इस धरती पर आ सके।

वजन कम या ज्यादा होना :- वजन जरूरत से ज्यादा कम या अधिक होने पर भी प्रसव जल्दी हो सकता है। आपको बिल्कुल सही तरीके से, डॉक्टर की राय के हिसाब से अपना वजन बढ़ाना होगा। उसके लिए एक सेहतमंद माहौल तैयार करना होगा ताकि वह आसानी से गर्भकाल पूरा होने पर ही दुनिया में कदम रखे।

पोषण में कमी :- केवल सही तरीके से वजन बढ़ाना ही काफी नहीं है। आपको शिशु के जीवन की सेहतमंद शुरूआत देनी होगी। ऐसा आहार लेना होगा, जिससे समय से पहले प्रसव का डर न रहे। उसके पोषण से ये खतरे काफी हद तक घट जाएं। वैसे कई प्रमाण भी मिले हैं कि दिन में पांच बार नियमित रूप से भोजन करने पर समय से पहले प्रसव का खतरा टाला जा सकता है। 

काफी समय तक खड़े रहना व भारी शारीरिक परिश्रम करना :- गर्भ के आखिरी दिनों में, डॉक्टर की राय से, कम से कम समय तक पैरों पर खड़ी हों। काफी लंबे समय तक खड़े रहने व शारीरिक श्रम करने से प्रीटर्म लेबर के मामले सामने आए हैं।

भावनात्मक तनाव :- कई अध्ययनों से पता चला है कि भावनात्मक तनाव का भी असामयिक प्रसव-पीड़ा (प्रीमेच्योर लेबर) से गहरा संबंध है। कई बार तो तनाव के कारण ऐसे होते हैं,जिन्हें आप किसी भी तरह कम नहीं कर सकतीं जैसे नौकरी खोना या परिवार में किसी की मृत्यु होना। अच्छे पोषण, रिलैक्सेशन तकनीकी व्यायाम व आराम के सही संतुलन व मित्रों तथा साथी से बातचीत द्वारा इस तनाव को घटाया जा सकता है। आप अपने डॉक्टर की मदद भी ले सकती हैं।

मदिरा व मादक द्रव्यों का सेवन :- मदिरा व मादक द्रव्यों का सेवन करने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए असामयिक प्रसव-पीड़ा का खतरा काफी बढ़ जाता है।

धूम्रपान :- धूम्रपान की वजह से भी, समय से पहले प्रसव हो सकता है। गर्भधारण से पहले या गर्भकाल के दौरान इसे छोड़ दें।यदि अब भी नहीं छोड़ा तो इससे बेहतर समय और कौन सा होगा।

मल्टीप्लाई :- एक से अधिक शिशु होने पर गर्भवती महिला, औसत से तीन सप्ताह पहले शिशुओं को जन्म देती है। (हालांकि जुड़वां बच्चों का पूरा प्रसव काल 27 सप्ताह का होता है, जिसका अर्थ है कि तीन सप्ताह की जल्दी कोई जल्दी नहीं है) प्रसव पूर्व बढ़िया देखभाल, पर्याप्त पोषण व बाकी खतरों को घटाने,आखिरी तिमाही में पूरा आराम लेने से कुछ खतरों को घटाया जा सकता है।

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