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पहने या ना पहने

कुनिका शर्मा

21st September 2017

पहने या ना पहने
जब मेरी शादी हुई तो मुझे ठीक से साड़ी बांधनी आती नहीं थी। ससुराल आई तो वहां साड़ी शादी के बाद साड़ी ही पहनने का रिवाज़ था। ऐसे में मैं परेशान हो गई। एक रोज मेरी परेशानी मेरी ननद ने भांप ली। उसने कहा, 'भाभी हैरान ना हो, मैं त्वानू साड़ी बांधनी सिखा दूंगी। और उसने उस दिन सचमुच उसने मुझे साड़ी पहना दी, जिसमें मेरी सुंदरता को चार-चांद लगा दिए। साड़ी पहनाकर उसने मेरे पति से कहा, 'देखो भैया, भाभी कितनी सुंदर दिख रही है। तभी मेरे पतिदेव बिना सोचे-समझे बोल उठे, 'यह कुछ पहने या ना पहने, तो भी चंगी (सुंदर) दिखेगी। उनकी बात सुनकर ननद मुस्कराने लगी। उनकी मुस्कुराहट के बीच मैंने पतिदेव की बात पर गौर किया तो मुझे बहुत शर्म आई और भागकर भीतर चली गई।
 
 
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