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रिश्तों की उलझन

अर्चना पाटिल

20th September 2017

रिश्तों की उलझन

मेजर प्रभास अपने बडे भाई वीर के शादी के लिए घर पर छुट्टियां लेकर आये थे। घर में बहुत ही खुशी का माहौल था। वीर बैंगलोर में किसी कंपनी में इंजीनियर था। अच्छा खासा कमा लेता था। इसी वजह से दुल्हन बनी दीया को सभी लोग खुशनसीब समझ रहे थे। अग्निहोत्री फैमिली में दीया तीनों बेटियों मे सबसे बडी बेटी। दीया के पापा केदारनाथ जल्द से जल्द ये शादी हो जाए और एक बेटी का बोझ कम हो जाए, इस प्रयास में थे। दीया भी पूना मे छह महीनों से जॉब कर रही थी, लेकिन शादी के बाद अब सब पीछे छूट जाने वाला था। वो दोस्त, वो पार्टियां, वो होस्टल की यादें सब कुछ।

शादी के भीड़ में भी प्रभास का चाय पानी और खाने पीने का सब लोग ख्याल रख रहे थे। प्रभास एक फौजी होने के कारण हर कोई उस पर गर्व महसूस करता था। शादी के एक दिन पहले सब लोग नाच रहे थे, खाने का लुत्फ उठा रहे थे, घर में हर तरफ हंसी के ठहाके लग रहे थे।

प्रभास को सुबह चार बजे उठने की आदत थी। दुसरे दिन सुबह चार बजे जब प्रभास की आंखें खुली तो उसने बाजू में हाथ रखा तो वीर का पता नहीं था। तकिये के उपर चादर ओढ़ कर रखी थी। बेड का ये हाल देखकर प्रभास का मन बेचैन होने लगा। अगर वीर घर में ही होता तो यू तकिये पर चादर डाल कर क्यूं जाता? और अगर वो बाहर गया है तो कहां? वो भी मुझे बिना बताए है भगवान! तभी वीर को सामने के टेबल पर एक चिठ्ठी दिखी। चिठ्ठी में लिखा था, "प्रभास मैं जब इजीनियरिंग पढ़ रहा था, तभी से एक लड़की से प्यार करता था। वो लड़की अब मेरे ही साथ बैंगलोर मे जॉब करती है। मैं उससे पहले से ही रजिस्टर्ड मैरिज कर चुका हूं। वो लड़की पंजाबी है इसी वजह से मुझे पता था कि मम्मी पापा इस शादी के लिए कभी तैयार नहीं होंगे। मैं अपने दिल की बात उन्हें कब से बताना चाहता था, लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी। पर अब मैं अपने डर के कारण दीया की जिंदगी बरबाद नहीं कर सकता। मम्मी पापा को इस हालत में छोडकर भाग जाना गलत है, लेकिन मेरे पास और कोई चारा नहीं है। पापा मेरे प्यार को कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे। प्रभास हो सके तो मुझे माफ करो। घरवालों का ध्यान रखना।"

चिठ्ठी पढ़ने के बाद प्रभास तुरंत रेलवे स्टेशन के लिए दौड़ा। प्रभास को उम्मीद थी की शायद वीर उसे वहां मिल जाए और वो उसे समझदारी से बात करके घर ले आएगा। लेकिन रेलवे स्टेशन पर पूरी तरह सन्नाटा था। पता करने पर पता चला बैंगलोर जाने वाली ट्रेन रात को दो बजे ही निकल चुकी थी। अब तो प्रभास के पास खाली हाथ घर लौटने के सिवा और कोई भी चारा नहीं था।

घर लौटते ही प्रभास पहले अपने पापा के पास गया और वीर की चिठ्ठी उनके हाथों में थमा दी। चिठ्ठी पढ़ते ही प्रभास के पापा बीपी बढ़ने की वजह से नीचे गिर पड़े। वीर की इस हरकत की वजह से घर में सभी लोग परेशान हो गए। लडकी वालों को क्या जवाब देंगे, गांव में अब हमारी क्या इज्जत रह जाएगी? इस तरह के हजारों सवाल हर किसी को सता रहे थे। थोड़ी ही देर में घर के बुजुर्गों ने फैसला ले लिया की वीर की जगह प्रभास की शादी होगी दीया से। ये बात सुनकर प्रभास का भी मुंह उतर गया लेकिन घरवालों के  हालात देख कर वो भी शादी के लिए राजी हो गया।

लड़की वालों को सारी बातें समझाकर प्रभास और दीया की शादी तो हो गयी लेकिन शादी के पहली ही रात प्रभास ने दीया से मुंह फेर लिया। वो ना ही उसकी तरफ देख रहा था और ना ही उससे बात कर रहा था। प्रभास किसी घरेलू लड़की से कभी भी शादी नहीं करना चाहता था, वो किसी आर्मीँ फैमिली की लड़की से शादी करना  चाहता था। प्रभास के कैम्प के कर्नल बोस की बेटी रचना प्रभास को बहुत पसंद थी। वो बहूत ही बहादुर थी, कराटे चैम्पियन थी, शूटिंग भी अच्छी कर लेती थी।

रचना के बात करने के रवैये से प्रभास को ऐसा लगता था जैसे रचना भी उसे पसंद करती थी। अगर सब कुछ ठीक होता तो शायद प्रभास अपने जीवन साथी के रूप में रचना को ही चुनता। अब इसी बात का गुस्सा वो शायद दीया पर निकाल रहा था। प्रभास और दीया के बीच की दुरियां घरवालों के नजरों से भी छुपी नहीं थी। प्रभास की मां दीया को प्रभास के साथ कैंम्प में भेजने का निर्णय लेती हैं। दोनों कुछ दिन अकेले साथ में रहेंगे तो अपने आप सब कुछ ठीक हो जाएगा। प्रभास के बर्ताव से दीया भी उससे डरती थी और अपने आपको उसकी नजरों से दूर ही रखती थी। प्रभास के साथ श्रीनगर जाने की बात सुन कर तो वो और भी परेशान हो गयी। प्रभास घरवालों से इतना परेशान हो गया था कि वो छुट्टियां खत्म होने से पहले ही श्रीनगर लौट गया।

ट्रेन के सफर में प्रभास ने पूरा वक्त  ट्रेन के दरवाजे में खड़े रह कर गुजारा। वो एक बार भी दीया का हालचाल पूछने के लिए अंदर नहीं आया। आखिरकार दीया की आंखें भी पूरी तरह नम हो गयी। ऐसी शादी से वो भी खुश नहीं थी। लेकिन मायके जाने से कोई फायदा नहीं था। अभी और दो छोटी बहनों की शादी बाकी थी। दीया भी अब इस रिश्ते के बारे में सोच-सोचकर परेशान हो गयी। देखते-देखते श्रीनगर आ गया।

"आओ, हमारा स्टेशन आ गया।"

"जी"

स्टेशन पर उतरते ही दोनो ने टैक्सी कर ली। रात के बारह बजे थे। रास्ते में ही एक आदमी गन लेके टैक्सी के सामने खडा हो गया।

"चलो नीचे उतरो, जल्दी नीचे उतरो, वरना ठोक दूंगा"

"उतरो उतरो नीचे उतरो भाई"

"इधर आओ, सब एक साइड में" तभी आर्मीवाले भी उसका पीछा करते-करते वहां पहुंच गये। दीया और प्रभास के बीच की दूरी की वजह से वो दोनों एक दूसरे से दूर ही खड़े थे। तभी उस आतंकवादी ने दीया को अपनी तरफ खींच लिया।

"खबरदार अगर किसी ने गोली चलाई तो इस लडकी की जान ले लूंगा।"

"स्टॉप फायरिंग, बादल को जाने दो, " मेजर बोस ने कहा।

बादल दीया को अपने साथ गाड़ी में बिठाकर ले गया। दीया को इस तरह से ले जाने से पहली बार प्रभास को दीया की फिक्र हुई। प्रभास को अब खुद पर गुस्सा आने लगा। मैं कितनी बुरी तरह से उसके साथ पेश आया। इस शादी मे दीया का कोई दोष नहीं था। गलती तो मेरे खुद के भाई की थी। अगर दीया को कुछ हो गया तो मै अपने आपको कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।

बादल दीया को लेकर जंगल में पहुंच गया।

"देखो मुझे जाने दो। मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है?"

"छोड दूंगा, बस थोड़ी देर चुपचाप बैठो। मैं भाग-भाग के थक चुका हूं"

दीया डरी-डरी सी सहमी सी चुपचाप बैठी रही। वो प्रभास के पास वापस जाकर क्या करने वाली थी। इससे तो अच्छा है कि ये आतंकवादी मुझे यहीं मार दे। सारा किस्सा ही खत्म हो जाएगा। बादल एक घंटे तक बैठा रहा। वो बार-बार दीया को देखे जा रहा था। दीया अपने ही ख्यालों में इतनी खो चुकी थी कि उसका ध्यान बादल की नजरों के तरफ गया ही नहीं। बादल अचानक से उसके पास आया और दीया के दोनों हाथ बांध दिये। उसके मुंह पर भी एक पट्टी बांध दी। बादल उसे मेन हाइवे तक लेके गया । अपने दोनों हाथों से उसने दीया को कसके पकड़ा और उसकी आंखों में आंखें डालकर चेतावनी दी, "ये मुलाकात याद रहेगी। "ऐसा कहते ही पीछे से आने वाले एक फोरव्हीलर के आगे उसने दीया को फेंक दीया। अगले ही क्षण बादल जंगल में गुम हो गया।  

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