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संपूर्ण विकास स्पर्श में छिपा है

राजलक्ष्मी त्रिपाठी

17th August 2019

बच्चे के सही विकास के लिए मां का स्पर्श बेहद जरूरी है। दुधमुंहा बच्चा भी स्पर्श की भाषा समझता है। जब आप उसे अपनी गोद में उठाती हैं तो वह खुद को सुरक्षित समझता है। छूने से बच्चे के प्रति आपके मन में भी ह्रश्वयार बढ़ता है और बच्चा भी आपके ह्रश्वयार को महसूस करता है।

 

महसूस कराएं बच्चे को स्पर्श का सुख-

  • उसे अपने हाथ से नहलाएं।नहलाते समय हाथों से उसके शरीर पर साबुन लगाते हुए या उसके सिर पर शैंपू लगाते हुए आपको अद्भुत सुख का अनुभव होगा और उसे भी आपके ह्रश्वयार और स्पर्श का यह एहसास जिंदगी भर याद रहेगा।
  • वच्चे की मालिश करें। मालिश करते हुए उसके हाथों को, उसके पैर को और उसके माथे को चूमें।
  •  बच्चे को सुलाते समय उसका माथा सहलाएं और हल्के-हल्के थपकी दें।
  •  सुबह बच्चे को जगाते वक्त उसे अपनी गोद में उठाएं और खूब प्यार करें।


जब आप अस्पताल से अपने नन्हे-मुन्ने को लेकर घर आती हैं, तो मन में उसकी परवरिश को लेकर ढेरों सवाल होते हैं। 'कैसे मैं इसे बड़ा करूंगी? का सवाल सबसे ज्यादा चिंताजनक होता है। नई मां को अपने बच्चे को छूने से भी डर लगता है। वह उसे फीड कराने से भी बचती है। छोटे से बच्चे को किस तरह से गोद में लिया जाए, यह सवाल उसे परेशान करता है। बच्चे के सही विकास के लिए मां का स्पर्श बेहद जरूरी है। दुधमुंहा बच्चा भी स्पर्श की भाषा समझता है। जब आप उसे अपनी गोद में उठाती हैं तो वह खुद को सुरक्षित समझता है। सच कहें तो आपके स्पर्श से बच्चे के प्रति आपके मन में भी ह्रश्वयार बढ़ता है और बच्चा भी आपके ह्रश्वयार को महसूस करता है। अकसर बच्चा सोते-सोते रोने लगता है ऐसे में कई बार तो धीरे से उसके सिर पर हाथ रख देने मात्र से ही वो चुप हो जाता है। वो समझ जाता है कि वो सुरक्षा के दायरे में है उसके आस-पास उसकी मां है। महसूस करता है हर बात जब आप अपने नन्हे मुन्ने को अपनी गोद में उठाती हैं, तो वह आपके सामीह्रश्वय के साथ-साथ आपके ह्रश्वयारदुलार को महसूस करता है। जब भी आप उसे छूती हैं, आपके स्पर्श के हर भाव को वह महसूस करता है। महसूस करने के साथ-साथ अपनी गतिविधियों से वह इसे जताता भी है। जब आप उसे दूध पिलाती हैं, तो अपनी नन्हीं उंगलियों से आपके हाथों को छूकर अपने ह्रश्वयार को जताता है। इसलिए अपने लाडले से ह्रश्वयार जताने के लिए जितना हो सके उसे छुएं, उसके गालों को सहलाएं और उसके माथे को सहलाएं। बिना बात के उसे चूमें। क्या आपको पता है कि आपके ह्रश्वयार भरे स्पर्श से ही उसका मानसिक विकास होता है। एक साल से छोटे बच्चे को जब आप दूध पिलाती हैं, तो उस समय उसे पोषण मिलने के साथ-साथ मां के स्पर्श का सुख भी मिलता है, जो उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
अकसर छोटा बच्चा चौंक सा जाता है, पर जब आप उसे छूती हैं, तो उसका तनाव और दर्द कम होता है। नौ महीने पेट में रहने के बाद उसके लिए बाहर की दुनिया अनजान और अजूबा सी होती है, जिसमें उसका प्रथम साक्षात्कार अपनी मां से ही होता है। मां उसे अपने सबसे करीब लगती है। मां का ह्रश्वयार-दुलार उसे बाहरी दुनिया से तालमेल बैठाने में मदद करता है।
बातें करें अपने नन्हे-मुन्ने से आप अपने लाडले से जितनी ज्यादा बातें करेंगी, वह आपके उतने ही करीब आएगा। जब भी आप उससे बातचीत करें, तो उसकी आंखों में देखें और उससे कहें कि आप उससे बहुत ह्रश्वयार करती हैं। आमतौर पर लोगों की धारणा होती है कि छोटा सा बच्चा क्या बात करेगा और क्या सुनेगा, लेकिन यह बिल्कुल गलत सोच है। नन्हा-मुन्ना भी अपने आस-पास के वातावरण का निरीक्षण करता है। वो अपने आस-पास होने वाली
बातों को ध्यान से सुनता है और उन पर प्रतिक्रिया भी देता है, इसलिए जब भी अपने बच्चे के पास रहें, तो उससे बातचीत करें। भले ही वो आपकी बात का जवाब ना दे पाता हो, लेकिन अपनी भाव-भंगिमा से वह जाहिर कर देगा कि वो आपकी सारी बातें समझ रहा है। इसका जवाब वह अपनी मुस्कराहट से या फिर अपने हाथ-पैर हिलाकर देगा। जब आप अपने बच्चे से बात कर रही हों, तो धीरे से उसके पैरों को हाथों में लेकर चूम लें, उसके माथे को सहला दें या ऐसे काम करें जिससे उसे आपके स्पर्श और सामीह्रश्वय का अनुभव हो। अकसर बच्चे खेलते हुए अपना पैर मां के मुंह की तरफ बढ़ा देते हैं, इसका अर्थ यही होता है कि मां, मुझे ह्रश्वयार करो।
सुगंध करती है प्रभावित
जिस तरह से हर अच्छी-बुरी गंध हम पर असर करती है, ठीक उसी तरह से बच्चा भी गंध को महसूस करता है। चाहे वह किसी भी तरह की गंध क्यों ना हो। चाहे बच्चा कितनी ही गहरी नींद में क्यों ना सो रहा हो। जैसे ही आप उसके पास से गुजरेंगी वो आपको आपकी गंध से पहचान लेगा। बच्चे के नहाने के लिए ज्यादा तेज सुगंध वाले शैंपू और साबुन का इस्तेमाल ना करें। ना ही उसकी मालिश के लिए तेज सुगंध वाले तेल का इस्तेमाल करें। बड़ों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साबुन, पाउडर, तेल, शैंपू बच्चों की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हल्की और आरामदेह सुगंध उसके मूड को ठीक करती है और वह रिलैक्स फील करता है। नहाने से पहले अच्छी क्वालिटी के हल्की सुगंध वाले बेबी ऑयल से मालिश करके उसे सुलाएं तो वह गहरी नींद सोता है।

मैं तुमको देख रहा हूं
बच्चा अपनी खूबसूरत आंखों से अपने आस-पास की सारी चीजें देखता रहता है, जब आप उसके पास जाती हैं और उसे देखती हैं, तो वह आंखों ही आंखों में ढेर सारी बातें कर लेता है। आपका उसे एकटक देखना और मुस्कुराना, उसका माथा सहला देना उसे मानसिक तौर पर मजबूत बनाता है। एक-दूसरे को देखना संप्रेषण का बहुत सहज और संवेदनशील माध्यम है। आपकी आंखों में अपने बच्चे के लिए ढेर सारा ह्रश्वयार और दुलार होता है, जिसे वह महसूस करता है और अपनी ह्रश्वयारी मुस्कान से उसका जवाब देता है। सच तो यह है कि माता-पिता का अपने बच्चे के साथ संबंध बेहद संवेदनशील होता है। आप जिस तरह से अपने बच्चे की परवरिश करते हैं चाहे वह छोटा ही क्यों ना हो उसकी अमिट छाप उसके मन पर हमेशा रहती है।

प्यार से करें लाडले की परवरिश
बच्चा पति-पत्नी के ह्रश्वयार का प्रतीक होता है। जब वह आपके जीवन में आता है, तो जिम्मेदारी के भाव के साथ-साथ चारों ओर खुशियों का अद्भुत संसार रच जाता है। उसको बड़ा करने में हर दिन अपना बचपन याद आता है। उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रखने की कोशिश के साथ-साथ मन में इस बात की उत्सुकता भी रहती है कि कब यह बोलना सीखेगा, कब चलेगा, कब मेरी बातों को समझेगा। बच्चे को बड़ा करना अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी का काम होता है। उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए ह्रश्वयार दुलार बेहद जरूरी होता है। जब भी आप अपने बच्चे का कोई काम करें तो उसे पूरे लाड-ह्रश्वयार से करें। उसके रोजाना के कामों को चाहे वह नहलाना हो या फिर सुलाना हो। बच्चे का कोई भी काम ड्यूटी समझकर ना करें बल्कि इसलिए करें क्योंकि आप उसे ह्रश्वयार करती हैं। आपका ह्रश्वयार-दुलार और ममताभरे सुखद स्पर्श के एहसास के साथ जब वह बड़ा होगा तो हेल्दी होने के साथ-साथ मानसिक रूप से परिपक्व और जिम्मेदार भी बनेगा।

पांच साल में 80 प्रतिशत सीख
ऑफिस से घर आने के बाद मैं अपनी तीन साल की बच्ची और पांच साल के बेटे में हर दिन कुछ न कुछ नई बातें नोटिस करती हूं। यह मैंने तबसे नोटिस करना शुरू किया जब वे एक साल से कम उम्र के थे। उनका ह्रश्वयार जताने का तरीका, बात करने का तरीका हर दिन बदला हुआ होता है। इस संबंध में बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. विनीता झा का कहना है कि बच्चा हर दिन क्या हर घंटे कुछ नया सीखता है। इसका कारण यह है कि इस समय उनकी ग्रहण करने की क्षमता सबसे ज्यादा होती है। चार साल की उम्र में बच्चा अपने जीवन का 80 प्रतिशत तक सीख चुका होता है। बाकी का बीस प्रतिशत वो पूरे जीवन में सीखता है। उदाहरण के लिए उसे एक दिन ब्रश करना सिखाना पड़ता है बाद में वह खुद ही ब्रश करना सीख जाता है। इसी तरह से और भी बहुत सारे काम होते हैं, जिन्हें आप उसके रोजमर्रा के कामों के साथ सिखाती हैं वह उन्हें झट से सीख लेता है।
अगर यह कहा जाए कि बच्चे नन्हे साइंटिस्ट की तरह होते हैं, तो गलत न होगा। उनकी आंखों में देखें तो उनमें मासूमियत के साथ-साथ कुछ नया सीखने और जानने की जिज्ञासा भरी होती है।
एक साल से कम उम्र का बच्चा हर चीज को अपने मुंह में डाल कर देखना चाहता है कि उसका स्वाद कैसा है? उस समय उसके दांत निकल रहे होते हैं साथ ही उसकी स्वाद ग्रंथियां विकसित हो रही होती हैं। उसके अंदर स्वाद की आदत विकसित करने के लिए उसे दूध के अलावा खाने की नई-नई चीजें दी जाती हैं। इसकी वजह से उसे अपने आसपास दिखने वाली सभी चीजें खाने की ही लगती है और उसे जो भी दिखता है चाहे वह जूता-चह्रश्वपल ही क्यों ना हो, अपने मुंह में डालता है।

रोजमर्रा के कामों में मजा लें
बच्चे को अपने सामने बड़े होते देखने का एहसास बेहद रूमानी होता है। पहली बार जब उसे गोद में लेते हैं, तो उस समय लगता है, जैसे जीवन की सारी खुशियां आपकी गोद में सिमट आई हैं। जन्म के बाद हर दिन बच्चे के व्यवहार में बदलाव आता है। वह तेजी से सब कुछ सीखता है। बच्चे के सही विकास के लिए जरूरी है कि आप उसकी परवरिश को जिम्मेदारी की तरह नहीं, सुखद अनुभूति की तरह लें। बच्चा बेहद संवेदनशील होता है, इसलिए कभी भी उससे डांटकर बात ना करें। स्पर्श बच्चे के विकास में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब भी आप कहीं से आएं तो बच्चे को गले लगाएं, उसे ह्रश्वयार करें। उसे इस बात का एहसास दिलाएं कि वो आपके लिए बहुत मायने रखता है। उसे बताएं कि आप उसे बहुत ह्रश्वयार करती हैं। भले की वो आपसे बात ना कर पाए, लेकिन आपकी बातों को समझता है। जब आप अपने बच्चे को गले लगाती हैं, उसे जताती हैं कि आप उसे ह्रश्वयार करती हैं, तो बदले में वो भी आपके गले में अपनी छोटी-छोटी बांहे डाल देता है। आपके गाल को सहलाता है और हंस कर ही सही, बहुत कुछ कहने की कोशिश करता है, जिसका मतलब होता है मां-पापा मैं भी आपसे बहुत ह्रश्वयार करता हूं। अपने बच्चे से खूब बात करें जितना ज्यादा आप उससे बात करेंगी उतनी ही जल्दी वो बोलना सीखेगा। जब आप काम कर रही हैं, तो उसे छोटी-मोटी चीजें लाने के लिए कहें, इससे उसमें जिम्मेदारी का भाव जागेगा वो आपके और करीब आएगा क्योंकि उसे लगेगा कि अब वो बड़ा हो रहा है और अपनी मां के काम में हाथ बंटा सकता है।

हर दिन बढ़ता है बच्चा
जन्म से लेकर पांच साल तक बच्चे का विकास बहुत तेजी से होता है। यह उसके सीखने की उम्र होती है, जिसमें वह खाने-पीले से लेकर चलना-फिरना, उठना-बैठना, बातचीत करना और दूसरों सेे दोस्ती करना सीखता है। इस समय बच्चे में हर दिन बदलाव होता है। माता-पिता का यह दायित्व है कि इस समय वे बच्चे के मन में उठने वाली हर जिज्ञासा का, उसके मन में उठने वाले सभी सवालों का समाधान करें। बच्चों की सही परवरिश के लिए जरूरी है कि आप जिस तरह के व्यवहार की अपेक्षा उससे करती हैं, वैसा ही व्यवहार खुद भी करें। ऐसा करने से आपको बच्चे को अलग से कुछ सिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वो खुद-बखुद सारी बातें सीखता चला जायेगा। मसलन अगर आप यह चाहती हैं कि बच्चा सबसे अच्छा व्यवहार करे तो आपको भी सबके साथ अच्छा व्यवहार करना होगा। बच्चे के सामने कभी चिल्लाकर बात न करें और न ही अपशब्दों का प्रयोग करें। सच तो यह है कि बच्चा कच्ची मिट्टी के समान होता है उसकी सोच को और उसके विचारों को सही आकार देने की जिम्मेदारी आपकी है। इसमें उसके खाने-पीने की आदतों से लेकर आस-पास के लोगों के साथ उसका व्यवहार भी शामिल है। इस समय आप अपने बच्चे को जिस तरह की परवरिश देंगे पूरी जिंदगी वो उसी के अनुसार चलेगा। यही वो समय है जब बच्चे को ह्रश्वयार और अनुशासन का भेद समझाना बेहद जरूरी है।

हंसते-हंसते कराएं खाने से दोस्ती
अपने लाडले में धीरे-धीरे करके स्वास्थ्यकर खाने की आदत डालें। कोई नया फल खिलाना है तो उससे कहें कि इसे खाकर तुम मजबूत बनोगे या उसे उससे रिलेटेड कोई राइम सुनाएं। इससे उसमें उस चीज को खाने की उत्सुकता जगेगी, साथ ही आप दोनों का जुड़ाव भी बढ़ेगा। सच तो यह है कि जन्म से चार-पांच साल तक की उम्र बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसी उम्र से अपने लाडले में दूध के अलावा अन्य पौष्टिक चीजें खाने की आदत डालना जरूरी है। उसे थोड़ा-थोड़ा करके अपने घर में बनने वाली सभी चीजें खिलाएं। हरी सब्जियां और मौसमी फल बच्चों के दिमागी विकास के साथसाथ उसे मानसिक और शारीरिक तौर पर स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। उसके भोजन में दाल, चावल, रोटी, सब्जी, दही सलाद आदि चीजें शामिल करें। इससे न केवल वो खाने की अच्छी आदतें सीखेगा वरन् शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ भी रहेगा। कुछ तो खा ले, के चक्कर में उसे बाजार की चटपटी चीजें खाने की आदत ना डालें। छोटे बच्चों को फास्टफूड और मसालेदार खानों से दूर ही रखें। एक बार उसे इन चीजों को खाने की आदत पड़ गई तो फिर आप चाहकर भी उसे हेल्दी खाना खाने के लिए प्रेरित नहीं कर पायेंगी। नूडल्स और बिस्किट आदि कभी-कभार के लिए तो ठीक हैं, लेकिन रोज की आदत ना बनाएं।

तैयार करें सुरक्षित वातावरण
बच्चे के समुचित विकास के लिए घर का वातावरण सुरक्षित होना बेहद जरूरी है। जब तक आपका बच्चा छोटा है, तब तक अपने घर के लिए ऐसे फर्नीचर का चयन करें, जो ना तो बहुत ऊंचा हो और ना ही उसके किनारे नुकीले हों। अकसर बच्चे बेड से गिर जाते हैं, जिनसे उनको सिर में चोट लग जाती है। अगर बच्चा गिर गया हो और उसके सिर पर चोट लगी है, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। बच्चे को बिना बात के भी कभी-कभी अपने से चिपका लें, जिससे उसे सुरक्षा का एहसास हो। बच्चे को घर में कभी भी अकेले छोड़कर ना जाएं। बिजली के ह्रश्वलग आदि पर टेप लगा दें, जिससे कि बच्चा उसमें उंगली ना डाल पाएं। बच्चे बेहद जिज्ञासु होते हैं उनकी आदत होती है
नई-नई खोज करने की अकसर बच्चे बिजली के ह्रश्वलग से खेलते हैं और स्विच बोर्ड में उंगली डालते हैं। मोबाइल चार्जर आदि को ह्रश्वलगमें लगा हुआ ना छोड़ें क्योंकि अकसर बच्चे बिजली के तार को मुंह में डाल लेते हैं। रसोई घर में चाकू आदि नुकीली चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और गैस का इस्तेमाल करने के बाद रेगुलेटर तुरंत ही ऑफ कर दें।

खेल-खिलौने और दोस्त 

बच्चों के लिए खेल-खिलौनों का चयन करते समय भी ध्यान रखें। अगर बच्चा एक साल से कम काहै, तो वो सभी चीजों को मुंह में डालेगा। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि उसके लिए जो भी खिलौने लें वो अच्छी कंपनी के हों। कभी भी छोटे बच्चे के लिए रोडसाइड से सेकेंड हैंड ह्रश्वलास्टिक के खिलौने
ना लें। इसके अलावा छोटे बच्चों के लिए नुकीले खिलौने ना लें। जब भी आपके पास समय हो, बच्चे को पार्क ले जाएं वहां उसे अपनी निगरानी में अपनी मर्जी से खेलने दें। खुले में खेलने से उसका शारीरिक और मानसिक विकास होता है। बच्चे को अपने हमउम्र के बच्चों के साथ खेलने का अवसर
दें। अपनी उम्र के बच्चों के साथ बच्चे कोई भी काम करना ज्यादा तेजी से सीखते हैं। अगर बच्चा खाने-पीने में टालमटोल करता है, तो फिर उसे
उसकी उम्र के बच्चों के साथ खिलाएं, वह खाने में नखरे नहीं दिखायेगा।


टीवी से रखें दूर
आमतौर पर जब बच्चे को किसी काम में उलझाना होता है, तो कई लोग उसे टीवी चलाकर उसके सामने बिठा देते हैं। यह बिल्कुल गलत है। छोटे बच्चे को टीवी से जितना ज्यादा दूर रखें उतना बेहतर है क्योंकि यह उसकी आंखों के लिए और दिमागी विकास के लिए ठीक नहीं है। टीवी की तेज कम होती आवाज से बच्चे के दिमाग पर गलत असर पड़ता है। थोड़ा बड़े होने पर भी बच्चे को मारधाड़ वाले प्रोग्राम देखने से दूर ही रखें।