GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

कमलादेवी चट्टोपाध्याय: महिलाओं के अधिकारों से लेकर कलाकारों के भविष्य तक, हर क्षेत्र में दिया योगदान

गरिमा अनुराग

3rd April 2018

कमलादेवी के 115वें जन्मदिन पर गूगल ने उनके व्यक्तित्व को दर्शाता हुआ डूडल बनाकर उन्हें सम्मानित किया।

कमलादेवी चट्टोपाध्याय: महिलाओं के अधिकारों से लेकर कलाकारों के भविष्य तक, हर क्षेत्र में दिया योगदान
कमलादेवी का जन्म 3 अप्रैल 1903 में हुआ था। कमलादेवी स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ समाज सुधारक और कलाकार भी थी। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता व पर्यायवरण के लिए बहुत काम किया था। 
कमलादेवी का नाम उस पहली महिला के तौर पर भी दर्ज है जिसे सबसे पहले ब्रिटिश पुलिस ने आंदोलन करने के लिए जेल भेजा था और जिन्होंने महात्मा गांधी को स्वतंत्रता आंदोलनों में महिलाओं को भी जोड़ने के लिए मनाया था। बहुत कम लोग जानते हैं कि कर्नाटक के मैंगलोर में जन्मी कमलादेवी के ही प्रयासों और दूरदर्शिता की वजह से आजादी के बाद राष्ट्रीय नाट्य विश्वविद्यालय, संगीत नाटक अकादमी जैसे संस्थानों को दिल्ली में बनाया गया। इसी तरह उन्होंने भारतीय हथकरघा इंडस्ट्री को भी नई दिशा दी। देश के विभाजन के बाद कमलादेवी ने अपने प्रयोसों से लगभग 50 हज़ार शर्णार्थियों को फरीदाबाद में बसाया, वो भी तब जब गांधी जी ने उन्हें ये साफ-साफ बता दिया था कि उन्हें सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिलेगी। 
दिल से थी कलाकार
कमलादेवी ने फिल्मों में भी काम किया था। उन्होंने पहली मूक कन्नड़ फिल्म में काम किया था। इसके बाद तानसेन व अन्य कुछ एक हिन्दी फिल्मों में भी काम किया था। 
 
हुई थी दो शादियां
कमलादेवी जब मात्र 7 साल की थी तो उनके पिता की म़त्यु हो गई थी। उनकी पहली शादी 14 साल की उम्र में हुई थी और उनके पति का निधन 2 साल बाद ही हो गया था। फिर उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई के बाद सरोजिनी नायडू के भाई हरेंद्र नाथ चट्टोपाध्याय से शादी की। हालांकि बाद में इन दोनों का भी डिवोर्स हो गया। 
 
मिले थे कई सम्मान
कमला देवी को पद्म भूषण (1955)और पद्म विभूषण (1987) दोनों से सम्मानित किया गया था। समाज के उद्धार के लिए किए गए उनके प्रयासों की वजह से उन्हें रेमन मैगसेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।