तीन बच्चों की मां मैरी कॉम ने जड़ा गोल्डन पंच: मन में अगर लगन हो तो राहें मुश्किल नहीं

शिखा पटेल

14th April 2018

मैरीकॉम ने एक बार फिर महिलाओं के कमज़ोर होने की धारणा को बिल्कुल गलत साबित कर दिया है।

भारत के अलग-अलग राज्यों में जब बैसाखी का उत्सव मनाया जा रहा है, तो वहीं ऑस्ट्रेलिया में देश की स्टार महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम ने अपने करियर के पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्डन पंच से स्वर्ण पदक को भारत की झोली में डालकर जश्न को डबल कर दिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में महिलाओं की 48 किलोग्राम कैटगिरी बॉक्सिंग में भारत को गोल्ड दिलाने वाली बॉक्सर मैरी कॉम पांच बार वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक ब्रोंज मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं। 35 वर्षीय मैरीकॉम ने पूरी दुनिया को ये प्रूफ कर दिया है कि शादी और बच्चे हो जाने के बाद भी एक औरत चैम्पियन बन सकती है।

सुपरमॉम का फिटनेस मंत्रा

मैरीकॉम को 'सुपरमॉम' के नाम से भी जाना जाता है। तीन बच्चे होने के बावजूद भी मैरी कॉम की फिटनेस बॉक्सिंग रिंग में देखते ही बनती है। विरोधी पर मैरी कॉम पंच की धुआंधार बारिश करती हैं। एशियन गेम्स में पहला गोल्ड जीतने वाली मैरीकॉम अपनी फिटनेस के लिए काफी डेडिकेट रहती हैं। वे डेली 8 घंटे वर्कआउट करती हैं। दिन की शुरूआत रनिंग के साथ स्ट्रेचिंग, स्कीपिंग और फ्लोर एक्सरसाइज से करती हैं। दोपहर के टाइम जिम में सिटअप्स और पुशअप्स करने के बाद मॉर्निंग से की गई सारी एक्सरसाइज को वे दुबारा दोहराती हैं।

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