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पर्यावरण की सुरक्षा के लिये, ये सब कर सकतें हैं हम

नीती वर्मा

5th June 2018

आज पर्यावरण दिवस है। हर साल 5 जून को पूरे विश्व मे पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस की शुरूआत, पर्यावरण की सुरक्षा और उसके संरक्षण के लिए की गयी है। विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के पीछे यह उद्देश्य है कि लोगों को पर्यावरण के बारे में जागरूक किया जा सके कि आखिर क्यों पर्यावरण की सुरक्षा जरूरी है।

पर्यावरण असल में है क्या?
यह पर्यावरण असल में है क्या? हमारी धरती और इसके आसपास के कुछ हिस्सों को पर्यावरण में शामिल किया जाता है। इसमें सिर्फ मानव ही नहीं, बल्कि जीव-जंतु और पेड़-पौधे भी शामिल किए गए हैं। यहां तक कि निर्जीव वस्तुओं को भी पर्यावरण का हिस्सा माना गया है। कह सकते हैं, धरती पर आप जिस किसी चीज को देखते और महसूस करते हैं, वह पर्यावरण का हिस्सा है। इसमें मानव, जीव-जंतु, पहाड़, चट्टान जैसी चीजों के अलावा हवा, पानी, ऊर्जा आदि को भी शामिल किया जाता है।
 

 

लेकिन सवाल उठता है कि  हमारे आसपास की हवा, पानी और वातावरण के नाम पर एक दिन, तो क्या सालभर में हम पर्यावरण में जितनी गड़बड़ियाँ फैलाते हैं वह इस एक दिन में ठीक की जा सकती हैं? नही, सालभर में फैलने वाली गड़बड़ियाँ दूर करने के लिए सालभर की अपनी आदतों में थोड़ा-थोड़ा सुधार जरूरी है। हमारे छोटे-छोटे काम सालभर चलते रहेंगे तो पर्यावरण ठीक रहेगा।
 
पर्यावरण की सुरक्षा के लिए 3 आवश्यक बातें
तीन आवश्यक बातें हैं जो हमे पर्यावरण की सुरक्षा और उसके संरक्षण के लिए हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। ये बातें हैं-1- कम उपयोग करना 2- पुनरावृत्ति करना, 3- पुन: उपयोग करना।
 
1- सबसे पहले हम जीवन जीने के लिये जो भी आवश्यक वस्तुयें हैं उनका कम से कम उपयोग करें। भोजन, पानी, बिजली, वाहन आदि का कम से कम उपयोग पर्यावरण की सुरक्षा और उसके संरक्षण के लिए सबसे जरूरी कदम है।
 

 

2- दूसरी बात, दुनिया मे ज्यादातर चीजों की पुनरावृत्ति की जा सकती हैं। ऐसे उत्पादों को खरीदने की कोशिश करें जिनको दोबारा पैदा किया जा सके या बनाया जा सके। कांच, कागज , प्लास्टिक या धातु , इन सभी चीजों को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता हैं। इसके अलावा पुराने अखबारों , खराब कागज ,गत्ता आदि जिनकी कोई जरूरत नहीं सभी की पुनरावृत्ति की जानी चाहिए।

3- तीसरी सबसे अहम बात है कि किसी भी पुरानी चीज को फेंकने के बजाय उसका दूसरा इस्तेमाल जरूर सोचें। किसी भी पुरानी वस्तु को री-साइकिल करके नई वस्तु बनाने में भी ऊर्जा की खपत होती है तो री-यूज ज्यादा बेहतर है। चीजों के दोबारा उपयोग की तकनीक जानें और उनका दोबारा उपयोग करें।
जैसे- स्वच्छ और ताजा पानी समय के साथ अधिक से अधिक कीमती होता जा रहा है। बाथरूम और किचेन के पानी को हम बाग-बगीचे के साथ-साथ, टायलेट मे फ्लश मे प्रयोग कर सकतें हैं। प्लास्टिक की थैलियाँ शहरों में ज्यादा प्रदूषण फैलाती हैं, तो पुरानी कपड़े की थैली सामान लेने जाते समय उपयोग में लें। कपड़े की थैली बार-बार उपयोग में आती है। विश्व पर्यावरण दिवस 2018 की थीम भी इस बार 'बीट प्लास्टिक पोल्यूशन' रखी गई है। यानि प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कैसे खत्म किया जा सकता है।
 
पर्यावरण और जीवन का अनोखा
 
पर्यावरण और जीवन का अनोखा संबंध हैं। दुर्भाग्य से कुछ लोगों का ये मानना है कि केवल सरकार और सामान्य तौर पर बड़ी कंपनियों ही पर्यावरण के संरक्षण के लिए काम कर सकतीं हैं। ये सत्य नहीं हैं, वास्तव में हरेक व्यक्ति पर्यावरण को प्रदूषण, अवशेषों, सभी प्रकार के कचरे से होने वाली गंदगी और बढ़ती आबादी से इसकी रक्षा करने में सक्षम हैं। कोई भी व्यक्ति जरा सी इच्छा रख और थोड़े से प्रयास से पर्यावरण को सुरक्षा और संरक्षण मे अपना अमूल्य योगदान दे सकता हैं।
 
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