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सिर्फ नवजात शिशु को ही नहीं माँ को भी रखता है कई बीमारियों से दूर ब्रेस्ट फीडिंग का फार्मूला

सुचि बंसल, योगा एक्सपर्ट एवं डाइटीशियन

27th August 2018

सिर्फ नवजात शिशु को ही नहीं माँ को भी रखता है कई बीमारियों से दूर ब्रेस्ट फीडिंग का फार्मूला

हर साल अगस्त महीने के पहले सप्ताह में पूरे विश्व में स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य नई माओं को ब्रेस्ट फीडिंग के प्रति जागरूक करना होता है। माँ का दूध नवजात बच्चे के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। माँ का दूध बच्चे को वह सभी पोषक तत्व प्रदान करता है जो उसे पहले छः महीने में विकास के लिए जरूरी होते हैं। जिसका असर बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर व्यापक रूप से पड़ता है, साथ ही माँ का दूध बच्चे के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है जो कई तरह के रोगों और इन्फ़ैकशन से बचने में मदद करता है।

वर्ल्ड हैल्थ ओर्गेनाइजेशन के अनुसार माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम पौष्टिक आहार होता है। इसलिए डॉक्टर शिशु को शुरुआत के छः महीने सिर्फ स्तनपान की सलाह देते हैं। लेकिन ब्रेस्ट फीडिंग कराना सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि माओं के लिए भी उतना ही लाभदायक है। आइये जानते हैं स्तनपान कराने से माओं को क्या लाभ होते हैं -

कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाए

ब्रेस्ट फीडिंग कराने से माओं को बहुत सारी बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। लंबे समय तक स्तनपान करने से महिलाओं में कैंसर का खतरा कम हो जाता है। कई शोधों से पता चला है कि जो महिलाएं लंबे समय तक ब्रेस्ट फीडिंग करती हैं उनमें गर्भाशय के और स्तन के कैंसर का खतरा कम हो जाता है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को डाइबिटीज और ह्रदय रोगों का खतरा भी कम होता है।

बढ़ा हुआ वजन कम करे 

ब्रेस्ट फीडिंग कराने से प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा हुआ वजन कम होता है। जैसे ही माँ स्तनपान कराना शुरू करती है, वैसे ही धीरे- धीरे वजन कम होना शुरू हो जाता है। बच्चे को स्तनपान कराने में रोजाना कम से कम 400 से 500 कैलोरी खर्च होती है। अमेरीकन जर्नल के एक अध्ययन के अनुसार जिन महिलाओं का प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बहुत अधिक बढ़ जाता है वे डिलिवरी के छह महीने तक ब्रेस्ट फ्रीडिंग कराकर अपना अतिरिक्त वजन कम कर सकती हैं। साथ ही ब्रेस्ट और बॉडी भी शेप में आने लगती है।

ब्लड लॉस होता है कम

ब्रेस्ट फीडिंग कराने से प्रेग्नेंसी के बाद होने वाली तमाम तकलीफ़ों से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही डिलिवरी के बाद होने वाला भारी रक्त स्राव भी नियंत्रित होता है। यदि डिलिवरी के तुरंत बाद माँ स्तनपान कराती है तो ओक्सिटोसिन हॉरमोन का स्राव होता है जिससे यूट्रस सिकुड़ जाता है और अत्यधिक रक्त स्राव की आशंका कम हो जाती है। स्तनपान गर्भाशय को उसके पूर्व आकार में आने में मदद करता है। प्रेग्नेंसी के बाद होने वाले तनाव, डिप्रेशन जैसी समस्याओं से भी राहत मिलती है।

प्राकृतिक गर्भनिरोधक का करे काम

यदि माँ नियमित ब्रेस्ट फीड कराती है तो छह माह तक गर्भधारण नहीं कर सकते। स्तनपान कराने के दौरान पीरियड्स देरी से आते हैं जिससे दोबारा प्रेग्नेंट होने के चांसेज कम हो जाते हैं।

 

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