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बोझिल पलकें, भाग-9

रानू

1st May 2019

अंशु जितनी सुंदर थी, उतनी ही स्वाभिमानी और गरिमामयी भी। रंधीर के आने की खुशी में हुई पार्टी में भी अंशु ने अपने मान की रक्षा के लिए कुछ ऐसा किया कि रंधीर और चन्दानी तिलमिला कर रह गए अपमान की आग से। क्या हुआ था ऐसा, जानिए आगे की कहानी पढ़कर।

वह ऑर्केस्ट्रा के स्टेज की ओर बढ़ा। उसके पग लड़खड़ा गए। उसने अपने होंठों को भींचा, संभला। फिर तेजी के साथ ऑर्केस्ट्रा की ओर बढ़ गया। कुछ इस प्रकार, मानो उसे वहां तक किसी ने पीछे से एक झटका देकर धकेलते हुए पहुंचा दिया हो। उसने एनाउन्सर के कान में कुछ कहा। एनाउन्सर ने तुरन्त गहरा नीला प्रकाश कर दिया और इसके साथ ही आवाज लगाकर इस नृत्य को ट्रैप डांस बना दिया।

नवयुवक दूसरे नवयुवकों के कन्धे पर हाथ रखकर ट्रैप करते हुए उनके पार्टनर्स को छीनने लगे। रंधीर फर्श पर आया। उसने विशाल के कन्धे पर हाथ रखकर ट्रैप किया। विशाल को अंशु का साथ छोड़ना पड़ा। अंशु को रंधीर की बांहों में आना पड़ा। यह बात अंशु को बहुत अखरी। रंधीर इस समय इतना अधिक नशे में था कि वह नृत्य करने योग्य भी नहीं था। उसके पग लड़खड़ा जाते थे। अंशु पर वह गिरा जाता था। उसकी यह बात नृत्य करते सभी जोड़े देख रहे थे। नशे ने उसके अन्दर छिपे वासना के भेड़िए को भड़का दिया था। मन काबू में नहीं था। उसने अंशु को अपनी छाती पर खींच लिया- पूरी तरह।

अंशु इतना बड़ा अपमान सहन नहीं कर सकी। उसने एक झटके से अपने-आपको स्वतन्त्र किया और फिर तुरन्त ही भरे समाज में रंधीर के गाल पर एक भरपूर थप्पड़ रसीद किया...तड़ाक!

क्रोध के कारण उसका शरीर कांप उठा था।

पल भर के लिए देखते जोड़े स्तब्ध रह गए। इस बात की आशा रंधीर को जरा भी नहीं थी। उसका सारा नशा ठंडा पड़ गया। क्रोध सिर पर सवार हो गया। उसके घर में उसी का अपमान! मन हुआ वह भी अंशु के गाल पर एक थप्पड़ रसीद करे, परन्तु तब तक विशाल लपककर वहां आ चुका था। रंधीर ने घूरकर विशाल को देखा। राय साहब की प्रतिष्ठा का उसे पूरा विचार था। बात बढ़कर कहीं से कहीं पहुंच सकती थी। दांत पीसते तथा मुट्ठी भींचते हुए वह क्रोध से झुंझलाया और काउंटर पर जाकर शराब पीने लगा।

अंशु वहां और अधिक नहीं रुकी। क्रोध में उसने पैर पटका और फिर बंगले से बाहर निकल आई। विशाल भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। अंशु की कार आ चुकी थी। दोनों उसमें बैठकर अपने बंगले की ओर चल पड़े। कमबख्त रंधीर ने आज अच्छा-भला मूड खराब कर दिया था। शराबी...आवारा!

दूसरी सुबह चन्दानी को सारी बातें मालूम हुईं तो उसने अपने बेटे को उसकी मूर्खता तथा जल्दबाजी पर खूब फटकारा। अच्छी तरह समझा दिया था कि कल जरा भी शराब मत पीना। फिर भी शराब पीकर सारा बना-बनाया खेल चौपट कर दिया। यदि एक शाम शराब नहीं पी होती तो कुछ बिगड़ जाता?

रंधीर अपने पिता की बात चुपचाप सुनता रहा। उसे स्वयं भी अपनी गलती का अफसोस था! अंशु ने उसका दिल जीत लिया था- दीवानगी की सीमा तक। अंशु को अपनाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार था।

चन्दानी भी इतनी बड़ी सम्पत्ति इतनी आसानी से हाथ से नहीं जाने देना चाहता था। उसने तुरन्त राय साहब को फोन किया। पिछली रात की घटना पर खेद प्रकट किया। रंधीर की बजाय स्वयं क्षमा मांगी और फिर कहा, ‘दरअसल राय साहब उसके दोस्तों ने उसे जबर्दस्ती पिला दी थी। आपने तो देखा ही था कि जब तक आप लोग वहां उपस्थित थे, उसने किसी भी प्रकार का नशा नहीं किया। वह कभी भी कोई नशा नहीं करता है। बस इसीलिए वह अपना होश खो बैठा था।'

‘ठीक है। जो हो गया, सो हो गया।' राय साहब को सुबह ही अंशु से सारी बातें ज्ञात हो गई थीं, जिन्हें सुनकर वह भड़क उठे थे। चन्दानी को वे स्वयं फोन करने वाले थे कि तभी चन्दानी का फोन उन्हें मिल गया था। जब चन्दानी ने उस घटना पर क्षमा मांग ही ली तो उन्होंने अब बात बढ़ाना उचित नहीं समझा। उन्होंने बात समाप्त कर देनी चाही, ‘अब उस घटना पर मैं अधिक बात नहीं करना चाहता।'

‘मैं रंधीर को आपके बंगले पर भेज रहा हूं।' चन्दानी ने कहा, ‘वह बहुत लज्जित है। आपसे और अंशु बेटी से क्षमा मांगना चाहता है।'

‘उसे यहां मत भेजिए और बात को अब समाप्त कर दीजिए। गुड बाई।' राय साहब ने रुष्ट स्वर में कहा और फिर फोन काट दिया।

इसे चन्दानी ने अपना अपमान समझा। वह एक भयानक व्यक्ति था। जहां सीधी अंगुली से घी नहीं निकलता था, वहां अपनी रक्षा करते हुए टेढ़ी अंगुली से भी घी निकालना जानता था, परन्तु यह घटना राय साहब की थी। राय साहब शहर के साधारण व्यक्ति नहीं थे। उनके खर्च पर अनेक अनाथालय से लेकर विद्यालय तक चलते थे। संसद सदस्यों का उनके यहां आना-जाना लगा ही रहता था। उसने सब्र करके रंधीर को देखा। फिर बोला, ‘सोने की चिड़िया हाथ से निकल चुकी है।'

परन्तु रंधीर इतनी आसानी से हार मानने वाला व्यक्ति नहीं था। वह जवान था। उसकी रगों में चन्दानी का ही गन्दा रक्त दौड़ रहा था। यदि चन्दानी को पैसा प्यारा था तो उसे अपनी जवानी को देखते हुए रंगरलियां। उसने तय कर लिया कि अंशु को अपनाने का वह ऐसा रास्ता निकालेगा, जिससे अंशु उसकी बनने के लिए विवश हो जाएगी। यदि तब भी अंशु ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया तो वह समझ लेगा कि उसने अंशु से अपने अपमान का बदला ले लिया है।

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