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नवरात्र तो कर लिए हैं लेकिन क्या सीखीं हैं मां दुर्गा से ये 5 बातें

शिखा पटेल

13th April 2019

ज्यादातर महिलाएं नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिन उपवास करके माँ दुर्गा के तमाम रूपों की पूजा-अर्चना करती हैं। जैसे मां दुर्गा दुष्टों का नाश करने के लिए जानी जाती हैं, वैसे ही अगर महिलाएं चाहती हैं कि वे अपने जीवन की हर कठिनाई से आसानी से लड़ सके, तो महिलाओं को मां दुर्गा से जुड़ी कुछ बातों को अपने जीवन में ज़रूर उतारना चाहिए। मां दुर्गा से जुड़ी सीखें ये 5 अहम बातें-

सीखने की ललक
 
जैसाकि हिन्दू धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि संसार को बचाने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपनी शक्तियों से मां दुर्गा का निर्माण किया। उनके अंदर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्तियां पाई जाती हैं, लेकिन कभी-भी वो अपनी शक्ति का दुरूपयोग नहीं करती हैं। इतना ही नहीं, अपनी शक्तियों का सही इस्तेमाल करने के लिए मां दुर्गा हमेशा ही सीखती रहती हैं। इसी तरह हर महिला को लाइफ में आगे बढ़ने के लिए हमेशा कुछ नया सीखते रहना चाहिए। मतलब साफ है कि अगर आप हमेशा सीखती रहेंगी, तो आपको कोई पीछे नहीं छोड़ पाएगा। 
 
निडर रहना
 
जीवन में महिलाओं को मां दुर्गा की तरह निडर रहना चाहिए, जिसके लिए उन्हें मां दुर्गा से विश्वास और निडरता सीखनी चाहिए। अगर महिलाएं निडर होकर लाइफ को जियेंगी, तो उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी, बल्कि वे अपने परेशानियों का हल चुटकियों में निकाल लेंगी और अपना रास्ता आसान कर लेंगी। यह बात वर्किंग वीमेन और हाउसवाइफ दोनों पर लागू होती है।
 
 
मल्टी टैलेंटेड बनना
 
दुर्गा मां के आठ हाथ इसी तरफ इशारा करते हैं कि हर महिला को मल्टी टैलेंटेड होना चाहिए, ताकि जहां भी जैसे भी जीवन यापन करना हो, महिलाएं किसी से पीछे न हो। इसलिए अगर आप अपनी लाइफ में आगे बढ़ना चाहती हैं, तो पहले मल्टी टैलेंटेड बनिए, ताकि आपको जीवन में कोई हरा न पाए और अपना लक्ष्य आप आसानी से पा सकें।
 
लक्ष्य निर्धारित करना
 
मां दुर्गा कभी भी बिना लक्ष्य के कोई काम नहीं करती हैं और वे काम करने से पहले ही लक्ष्य निर्धारित कर लेती हैं, जिसके बाद काम कैसे किया जाए उस पर ध्यान देती हैं। ऐसे में हर महिला को हर दिन का और जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें, ताकि किसी भी मोड़ पर भटके नहीं और अपने लक्ष्य को लेकर फोकस्ड रहें। 
 
 
हर रूप में ढलना
 
मां दुर्गा के अनेक रूप होते हैं, लेकिन वे अपने हर रूप में ढल जाती हैं। ठीक इसी तरह एक औरत को भी कदम कदम पर हर रूप में ढलना चाहिए। जैसे बेटी, बहू, पत्नी, मां, बहन आदि रूप में खुद को ढालकर अपनी शक्तियों को और बढ़ाएं। साथ ही कभी भी अपने किसी भी रूप के साथ समझौता न करें, बल्कि सारे रूप विश्वास के साथ निभाएं।