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कैंसर को दें मुहतोड़ जवाब- 'आई एम एंड आई विल' से

डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव

23rd May 2019

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी आज जिस तरह से समाज के हर वर्ग, हर आयु के व्यक्ति को प्रभावित करने लगी है, उससे समय है सचेत हो जाने का।

कैंसर को दें मुहतोड़ जवाब- 'आई एम एंड आई विल' से

कैंसर भारत में सबसे तेजी से बढऩे वाली बीमारी बन गया है। एक अनुमान के मुताबिक अगले साल, यानी सन 2020 तक कैंसर के 17 लाख से अधिक नए मामले इस देश में सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर दरअसल गलत लाइफस्टाइल के कारण बढऩे वाली बीमारी है, लेकिन शुरुआती डायग्नोसिस और प्रबंधन से इससे बचना और उबरना संभव है। शायद इसलिए इस बार 'वर्ल्ड कैंसर डे की थीम भी 'आई एम एंड आई विल' रखी गई है, यानी मरीज अपनी प्रबल इच्छाशक्ति से इस जानलेवा रोग को मात दे सकता है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुताबिक, अगले चार सालों के दौरान कैंसर से जुड़ी मौतों के मामले भी 7.36 लाख से बढ़कर 8.8 लाख तक पहुंचने की आशंका है। डॉक्टरों का कहना है कि जागरुकता के अभाव में अपर्याप्त डायग्नोसिस न होने के कारण कैंसर के 50 प्रतिशत मरीज तीसरे या चौथे चरण में पहुंच जाते हैं, जिस वजह से मरीज के बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। जहां पुरुषों में प्रोस्टेट, मुंह, फेफड़े, पेट, बड़ी आंत का कैंसर आम है तो वहीं महिलाओं में ज्यादातर मामले ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर के देखने को मिलते हैं। इनका सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल, प्रदूषण, खान-पान में मिलावट और तंबाकू या धूम्रपान के सेवन का बढ़ता चलन है।

कैंसर के लक्षणों को कैसे पहचानें

जैसाकि इस समय हम देख ही रहे हैं कि दुनिया भर में होने वाली मौतों के एक बड़े कारण के तौर पर कैंसर उभरकर आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि हर साल इस वजह से 80 लाख से भी अधिक लोगों की मौत हो जाती है। अक्सर कई बड़ी हस्तियों के कैंसर की चपेट में आने की खबर भी हम सुनते ही हैं। हाल के दिनों में फिल्मी सितारे इरफान खान, सोनाली बेंद्रे और राकेश रोशन के कैंसरग्रस्त होने की खबरें मिलीं और सही समय पर इलाज शुरू हो जाने से अब वह कैंसर से उबर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि नियमित जांच के अलावा शुरुआती चरण की पहचान कैसे की जाए। इस बारे में इस बात पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है कि शरीर के किसी हिस्से में अनावश्यक गांठ हो जाए या किसी अंग से अकारण रक्तस्राव होने लगे तो तत्काल परामर्श लेने और जांच कराने की जरूरत है। शरीर के किसी अंग में वृद्धि या त्वचा के रंग में बदलाव भी इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए

यूरीन और ब्लड टेस्ट कराने पर जब किसी तरह की असामान्य स्थिति सामने आती है तो यह कैंसर का कारण बन सकता है। ऐसी स्थिति में कॉमन ब्लड टेस्ट के दौरान श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) के प्रकार या संख्या में भी अंतर आ सकता है। इसके अलावा सीटी स्कैन, बोन स्कैन, एमआरआई, पीईटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड तथा एक्स-रे का विकल्प भी उपलब्ध हैं, परन्तु कैंसर की निर्णायक पुष्टि के लिए बायोप्सी टेस्ट ही एकमात्र तरीका है। इसमें कोशिकाओं का सैंपल लेकर जांच की जाती है। कैंसर की पुष्टि हो जाने के बाद कैंसर का स्टेज निर्धारित किया जाता हैं, ताकि इलाज के विकल्पों और इस बीमारी से उबरने की संभावनाओं पर विचार किया जा सके। कैंसर के लक्षणों की पहचान एक से चार चरण तक की जाती है और चौथे चरण को एडवांस्ड स्टेज भी कहा जाता है, जिसमें मरीज के बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। कैंसर के बढ़ते मामलों की वजह परिवार में कैंसर की पृष्ठभूमि, फल-सब्जियों के माध्यम से पेस्टीसाइड्स का अधिक मात्रा में शरीर में पहुंच जाना, तंबाकू एवं तंबाकू-उत्पादों का इस्तेमाल, अस्वस्थ खान-पान के साथ-साथ अस्वास्थ्यकर लाइफस्टाइल अपनाना और अनियमित स्वास्थ्य जांच आदि हैं।

इस बारे में डॉ जे.बी. शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, एक्शन कैंसर हॉस्पिटल का भी यही कहना है कि कैंसर के खतरनाक मामलों से बचने और उबरने का एकमात्र उपाय नियमित जांच, स्वस्थ लाइफस्टाइल, धूम्रपान त्यागना, शुद्ध और पौष्टिक खान-पान, फलों-सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन, स्वच्छ आबोहवा, व्यायाम और नियमित दिनचर्या ही है।

कैंसर का डायग्नोस

बायोह्रश्वसी टेस्ट- शरीर के किसी हिस्से में लम्प हो जाता है तो उसमें कैंसर के पनपने की संभावना का पता लगाने के लिए लंप का एक टुकड़ा लिया जाता है और इस दौरान लंप में मौजूद सेल्स और टिश्यूज का लैब में टेस्ट किया जाता है, जिससे कैंसर की पुष्टि होती है।

इमेजिंग टेस्ट- इसके अलावा कैंसर की पुष्टि के लिए लंप का इमेंजिंग टेस्ट भी किया जाता है। इस प्रक्रिया में माइक्रोस्कोप के द्वारा कैंसर का पता लगाया जाता है। जरूरी नहीं है कि सभी लंप कैंसर हों। सच यह है कि सभी टयूमर कैंसर नहीं होते हैं।

कैंसर के इलाज से कम हो सकती है फर्टिलिटी

डॉ. श्वेता गुप्ता क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फर्टिलिटी सलूशन मेडिकवर फर्टिलिटी का कहना है कि कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं, लेकिन आधुनिक चिकित्सा की बदौलत इससे बचने की दर में भी इजाफा हुआ है। हालांकि कैंसर का इलाज कराने से संतान उत्पन्न करने की क्षमता, यानी प्रजनन क्षमता काफी बुरी तरह से प्रभावित होती है। सर्जरी कीमोथेरापी या रेडियोथेरापी जैसे उपचार से ओवेरियन रिजर्व या स्पर्म घट सकते हैं। ऐसे लोग यदि कैंसर का इलाज कराने के बाद समय पर काउंसिलिंग और इलाज शुरू करा लें तो उनमें फर्टिलिटी बचाए रखने की संभावना अधिक रहती है। पुरुषों के लिए जहां स्पर्म बैंक में सुरक्षित रखने का विकल्प है, वहीं महिलाओं के लिए अंडाणु को फ्रीज रखना उपयुक्त विकल्प है। ये सुविधाएं किसी फर्टिलिटी सेंटर में मिल जाती हैं। इसके अलावा यदि स्पर्म बहुत ही कम रहे तो डोनर समूहों जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। अनुकूल परिणाम पाने के लिए ऑन्कोलॉजिस्ट फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, फैमिली फिजीशियन, साइकोलॉजिस्टन, यूरोलॉजिस्ट, गायनकोलॉजिस्ट, काउंसलर जैसी बहुविभागीय टीम से संपर्क किया जा सकता है।

कैंसर ट्रीटमेंट

इसके ट्रीटमेंट के कई प्रकार हैं, लेकिन इलाज कैंसर के प्रकार और स्टेज के अनुसार ही किया जाता है।

  • स्टेम सेल ट्रांसप्लांट
  • टारगेटिड थेरेपी
  • रेडियोथेरेपी
  • सर्जरी
  • कीमोथेरेपी
  • इम्यूनोथेरेपी
  • हार्मोन थेरेपी
  • प्रिसिशन मेडिसिन

हेल्दी डाइट कैंसर का रिस्क फैक्टर कम करने में मददगार आहार

  • फलों में एंटीऑक्सीडेंट- जैसे बेटा केरोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और सेलेनियम होते हैं। ये विटामिन कैंसर से बचाव करते हैं और शरीर में सेल्स को बेहतर ढंग से फंक्शन करने में मदद करते हैं।
  • विभिन्न वेजीटेबल, फ्रूट, सोया, नटस, होल ग्रेन और बीन्स से भरपूर ह्रश्वलांट बेस्ड संतुलित डाइट कैंसर से लडने में काफी हद तक मददगार हो सकती है।
  • प्लांट बेस्ड फूड में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
  • लाइकोपीन से भरपूर फूड जैसे टमाटर, अमरूद, वॉटरमेलन प्रोस्टेट कैंसर के रिस्क फैक्टर को कम करते हैं। वहीं रेड मीट कैंसर के खतरे को पैदा करता है।

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