GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

बोझिल पलकें, भाग-27

रानू

10th June 2019

चन्दानी की कैद में बंद दीवानचन्द अजय की वह दुखती हुई रग थे, जिसके चलते अजय चन्दानी के इशारों पर न सिर्फ आपराधिक कामों को करने पर मजबूर था, बल्कि उसे ये अपराध भी हंसते-मुस्कुराते करने थे। ऐसा ही मौका इस बार भी उसके सामने आ खड़ा हुआ था। अब आगे अंजाम क्या होने वाला था इन सब का?

बोझिल पलकें, भाग-27

अंशु को उससे सहानुभूति है या वह उसकी ओर आकृष्ट हो रही है? अंशु का विशाल के साथ विवाह होने वाला है। अंशु विशाल को प्यार करती है। प्यार नहीं करती होती तो उस दिन विशाल के नाम पर होटल क्यों जाती?

बहुत सोच-विचार के बाद भी अजय अंशु के दिल का हाल नहीं समझ सका तो उसने अपने ही दिल में बसे एकतरफा प्यार के सहारे सारा जीवन बिता देने का निश्चय कर लिया, वह प्यार जिसने उसका जीवन बदल दिया था।

सहसा एक घंटे बाद फिर फोन की घंटी बजी। उसे चन्दानी के सामने खड़े होने की आज्ञा मिली। आज्ञा अनुसार उसे फ्लोरा फाउंटेन के समीप ठीक एक घंटे बाद पहुंचना था।

यह बात उसने फोन द्वारा तुरंत डी.आई.जी. को बता दी उनसे कुछ बातें भी तय कीं। उसके बाद वह अपने निश्चित समय पर फ्लोरा फाउंटेन के समीप जा खड़ा हुआ।

तभी एक बार उसके समीप आकर रुकी। पीछे बैठे व्यक्ति ने उसे अपना नाम बताया अजय कार में बैठ गया। उस व्यक्ति ने अजय को चश्मा थमाया अजय ने चश्मा लेकर बाहर देखा।

एक पुलिस इंस्पेक्टर तथा एक कांस्टेबल उसी की ओर आ रहे थे। कार में बैठे अजय के अतिरिक्त उन तीनों व्यक्तियों के दिल धड़क उठे। कार आगे बढ़ी तो इंस्पेक्टर ने सामने से हाथ द्वारा इशारा करके कार रोक दी। तीनों व्यक्तियों के पसीने छूट ग

इंस्पेक्टर ड्राइवर के पास आया। झुकते हुए उसने कहा, ‘लाइसेंस।'

तीनों व्यक्तियों को कुछ संतोष मिला, फिर भी उनके दिल धड़कते रहे।

ड्राइवर ने अपना लाइसेंस निकालकर दे दिया। इंस्पेक्टर ने लाइसेंस देखा और फिर उसे वापस कर दिया और अपने रास्ते चला गया।

तीनों व्यक्तियों ने चैन की सांस ली, परंतु इतने समय में उन तीनों व्यक्तियों का जितना ध्यान बंटा, अजय को ससे भी कम समय की आवश्यकता थी। उसका एक काम पूरा हो चुका था। उसके मिशन का पहला पग सफल था।

कार आगे बढ़ी तो अजय ने अपनी आंखों पर चश्मा चढ़ा लिया।

अजय को उन्हीं रास्तों द्वारा तहखाने में चन्दानी के सामने जाकर खड़ा होना पड़ा, जिनसे होकर वह सदैव जाया करता था, बिल्कुल पिछले ढंग से ही, वहीं जूं-जूं का स्वर।

अंत में कुछेक सीढ़ियां उतरकर, कुछ पगों बाद उसने चश्मा उतारा तो वह चन्दानी के सामने खड़ा था।

इस समय चन्दानी एक सोफे पर बैठा था। उसके हाथ में बीयर का मग था। उसकी बगल में एक विदेशी भी था। उसके हाथ में भी बीयर का मग झाग फेंक रहा था।

‘अजय...' चन्दानी ने उस विदेशी की भेंट उससे कराई। कहा, ‘यह मिस्टर जॉनसन हैं। इन्हें कल सुबह के प्लेन से अपने देश जाना है, इसलिए कल सुबह तुम्हें भी उसी प्लेन का एक अपरिचित यात्री बनकर हवाई अड्डे पहुंचना होगा। हवाई अड्डे पहुंचने से पहले तुम्हें एक सूटकेस मिलेगा। वैसा ही सूटकेस मिस्टर जॉनसन के पास पहले से ही हवाई अड्डे पर होगा। कस्टम में इनका सूटकेस पहले चैक होगा। उसके दो मिनट बाद वहां एक महिला बेहोश होकर गिर पडे़गी। इसी मध्य कस्टम की परेशानी तथा यात्रियों की भीड़ का सहारा लेकर तुम अपना सूटकेस मिस्टर जॉनसन के सूटकेस से बदल लोगे। उसके बाद तुम अपनी फ्लाइट कैंसिल करोगे। कह सकते हो कि यात्रा आरंभ होने से पहले एक महिला का बेहोश होना अच्छा शगुन नहीं है। सूटकेस बदल जाने के बाद तुम्हारा सूटकेस चैक हो या नहीं, कोई अंतर नहीं पड़ेगा, क्योंकि बदले हुए सूटकेस में कस्टम वालों को केवल यात्रा से संबंधित वस्तुएं ही मिलेंगी। कोई प्रश्न?'

अजय ने गंभीरतापूर्वक सिर हिला दिया, ‘नहीं।'

चन्दानी ने बीयर के कुछेक घूंट पीने के बाद कहा, ‘मिस्टर जॉनसन कई वर्ष बाद भारत आए हैं और हमारे एक बहुत पुराने ग्राहक हैं, इसलिए आज शाम छह बजे इनके ऑनर में हमने इस जगह पार्टी दी है। हमारे लगभग सभी कार्यकर्ता उपस्थित होंगे। तुम्हें भी निमंत्रण है।'

अजय गंभीरतापूर्वक सोचता रहा। आज यहां लगभग सभी अपराधी उपस्थित होंगे। यदि ऐसे सुनहरे अवसर पर पुलिस का धावा हो जाए तो निश्चय ही एक बहुत बड़ा काम पूरा हो जाएगा, परंतु उसके पिता?

क्या पुलिस के यहां पहुंचने से पहले चन्दानी उन्हें जान से नहीं मार देगा?

‘देखो अजय...' चन्दानी ने अजय की खामोशी से दूसरा अनुमान लगाया।

उसने कहा, ‘हमसे रुष्ट होकर तुम कभी खुश नहीं रह सकते। तुम्हें हमारे साथ काम करना है, हर अवस्था में, जब तक कि तुम्हारे पिता जीवित हैं। फिर क्यों नहीं तुम हमारे साथ खुशी-खुशी काम करते? तुम यदि पहले के समान हमारे साथ हंसी-खुशी काम करोगे तो हम तुम्हें भी खुश रखेंगे तथा तुम्हारे पिता को भी। संभवतः हम तुम्हारे काम से प्रसन्न होकर एक दिन उन्हें पहले के समान फिर स्वतंत्र कर दें। चन्दानी ने अजय का मन जीतने के लिए उसे भेद भरी दृष्टि से देखा।

रंतु अजय का मस्तिष्क एक योजना का रंग देख रहा था। उसने कहा, ‘पार्टी में मैं भी आऊंगा।'

‘गुड।' चन्दानी ने कहा, ‘तुम शाम को पौने छ बजे एंबेसडर होटल के सामने पहुंच जाना। बादल तुम्हें पिकअप कर लेगा।'

अजय अपने पिता से फिर मिला, दो व्यक्तियों की सुरक्षा में।

आज फिर दीवानचन्द उससे अपने दिल की बात कह देना चाहते थे, परंतु नहीं कह सके। अजय जब उनसे मिलकर वापस लौटने लगा तो उसने अपने हाथ में लिए चश्मे को आंखों पर फिर पहन लिया।

उसके बाद ही उसे दो व्यक्तियों ने बाहर ले जाकर शहर के एक अन्य स्थान पर कार से उतार दिया।

जारी...

ये भी पढ़िए-

कांटों का उपहार

नैना फिर से जी उठी

मां का श्राप

आप हमें  फेसबुक,  ट्विटर,  गूगल प्लस  और  यू ट्यूब  चैनल पर भी फॉलो कर सकते हैं।