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शिशु की त्वचा की देखभाल

मोनिका अग्रवाल

21st June 2019

जन्म के बाद पहले साल में बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि उनकी स्किन काफी डेलिकेट और नरम होती है। बच्चे की त्वचा की देखभाल करने का मतलब, केवल चेहरे की त्वचा से नहीं बल्कि पूरे शरीर की त्वचा से है। जरा सी भी असावधानी से बच्चे की त्वचा में कई प्रकार के इंफेक्शन हो सकते हैं।

शिशु की त्वचा की देखभाल

ऐसे में बच्चे के नहाने के साबुन से लेकर, उसे पहनाए जाने वाले कपड़ों, उसके लोशन व पाउडर और मालिश के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तेल तक का ध्यान रखना चाहिए। इन सब को चुनते और इस्तेमाल करते समय आपको खास सावधानी बरतनी चाहिए।

मॉइश्चराइजर का प्रयोग

बच्चों के लिए हमेशा बेबी सोप का ही प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि बेबी सोप हार्ड नहीं होता और बच्चों की स्किन को नमी भी प्रदान करता है। बच्चों के लिए ऐसी कॉस् मेटिक क्रीम का प्रयोग भी न करें, जिससे बच्चे की त्वचा में इंफेक्शन हो। मौसम के अनुसार नहलाने से पहले तेल मालिश करने से उनकी त्वचा नर्म और साफ रहती है। बेहतर रहेगा, यदि हम चिकित्सक की सलाह पर बच्चे की त्वचा की नमी बरकरार रखने के लिए हल् का मॉइश्चराइजर का प्रयोग करें। सबसे ज्यादा ध्यान बच्चे की त्वचा पर होने वाली रैशेज और इंफेक्शन का रखें।

साबुन का प्रयोग

बच्चे के जन्म के 10 दिन बाद, उसे हल्के गरम पानी से नहला सकते हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, वह फर्श पर घुटनों के बल चलने की कोशिश करने लगता है, जिस वजह से उसकी हथेलियों और घुटने से नीचे के पैर अक्सर गंदे हो जाते हैं। ऐसे में त्वचा संक्रमण का डर रहता है। त्वचा संक्रमण से बचाने के लिए बच्चे की नहलाने से पहले किसी तेल से हल्की मालिश दें और उसके बाद बेबी सोप व गुनगुने पानी में नहलाना बच्चे की त्वचा को फायदा पहुंचाता है। मॉश्चराइजर युक्त माइल्ड सोप का ही इस्‍तेमाल करें।

डायपर का प्रयोग

बदलते वक्त ने छोटे लंगोट या नैपी के प्रयोग, जो कि कपड़े को फाड़ कर बनाया जाता था (यह नवजातों के लिए बहुत ही असुरक्षित था) को भी नया रूप दे दिया है। आज बच्चों के लिए डायपर का प्रयोग सुरक्षित माना जाता है। आजकल बाजार में कई प्रकार के डायपर आने लगे हैं। चूंकि बच्चों की दिनचर्या का कोई समय नहीं होता है, इसलिए एक दिन में 8 से 10 बार डायपर बदलना होता है। अगर आप बच्चे का डायपर नहीं बदलेंगे तो बच्चे को डायपर रैशेज होने की संभावना होती है। डायपर रैशेज को रोकने के लिए सही डायपर का चुनाव करना भी बहुत जरूरी होता है।

डायपर के प्रकार

  • ऑल-इन-वन डायपर
  • प्रीफोल्ड डायपर
  • फ्लैट डायपर
  • फिटेड डायपर
  • डिस्पोजेबल डायपर

डायपर आप अपनी चॉइस और ज़रूरत के हिसाब से इस्तेमाल करें, लेकिन कोशिश यही रखनी चाहिए कि बच्चे की त्वचा सूखी रहे। गीली त्वचा पर जल्दी ही रैशेज और खुजली हो जाती है। जब त्वचा सूख जाए, तभी डायपर बदलें। बेबी पाउडर का इस्तेमाल करें। अत्यधिक नमी संक्रमण का कारण बनती हैं।

दस्ताने का प्रयोग

बच्चे की त्वचा बहुत नरम और कोमल होती है। यदि आपके नाखून बड़े हैं तो बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमेशा दास्ताने पहन कर ही बच्चे को नहलाएं या धुलाएं। यही नहीं, बच्चे के हाथों पर भी छोटे-छोटे दस्ताने बनाकर रखें, वरना बच्चे को अंगूठा चूसने की आदत पड़ जाती है।

उबटन का प्रयोग

कुछ बच्चों के शरीर पर जन्मजात घने बाल होते हैं। आमतौर पर तो समय के साथ बाल कम हो जाते हैं, लेकिन हल्के उबटन से बच्चों की मालिश करना लाभदायक है। इससे अनावश्यक बालों की ग्रोथ रुक जाती है और उबटन के प्रयोग से बच् चे की त् वचा में निखार भी आता है। फिर भी, किसी भी प्रकार का उबटन प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की राय जरूर लें। बच्चे की त्वचा पर प्रयोग ना करें, वरना त्वचा संक्रमित हो सकती है।

लिपबाम का प्रयोग

शिशु के होंठ अक्सर बार-बार थूक निकलने के कारण गीले रहते हैं, जिसके कारण होंठों की त्वचा गल जाती है और हट जाती है, जिस कारण उन पर सूखापन आ जाता है। ऐसे में सफेद पैट्रोलियम जैली या लिपबाम का प्रयोग करना चाहिए।

ऑयल का प्रयोग

बच्चों के शरीर के विकास के लिए किसी हल्के और अच्छे तेल से मालिश बहुत जरूरी है, लेकिन तेल का चयन करते वक्त ध्यान रखें कि यह बहुत ज्यादा सुगंधित या चिकना न हो। असल में अत्यधिक सुगंध या चिकनाई के कारण शिशु की त्वचा में एलर्जी या खुजली हो सकती है। 1 साल तक के बच् चों की सरसों के तेल से मालिश बिल्कुल न करें।

आंखों की केयर

शुरू-शुरू में शिशु की आंखों के कोने से सफेद या हलके पीले रंग का बहाव हो सकता है। घबराएं नहीं, इसे डॉक्टर के परामर्श से निमोए पानी में रुई भिगो कर हल्के हाथ से, अंदर से बाहर की ओर आंखों के कोनों को साफ करें। इसे न तो हाथ से रगड़ें और न ही खींच कर निकालने की कोशिश करें। अगर शिशु की आंखें लाल हों या उन से पानी निकल रहा हो तो तुरंत आंखों के विशेषज्ञ को दिखलाना चाहिए।

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