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शिशु के विकास के लिए ज़रूरी है सही आहार

महिमा निगम

25th June 2019

पहले छह महीने मां के दूध और उसके बाद दूध के साथ ठोस आहार बच्चे के शरीर की नींव बनाते हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि शिशु को कैसा आहार दिया जाए।

शिशु के विकास के लिए ज़रूरी है सही आहार

मांओं को ध्यान रखना चाहिए कि शिशु के पेट का आकार वयस्क के पेट से पांच गुना छोटा होता है। ऐसे में जरूरी है कि शिशु को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलें। अगर आपको लगता है कि घर के खाने से आपके शिशु को आयरन, जिंक और विटामिन पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं तो आप फोर्टीफाइड या सह्रश्वलीमेंट जैसे वैकल्पिक आहार भी दे सकती हैं।

जरूरी पोषक तत्वों की जानकारी

मां होने के नाते आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि बच्चे का सिर्फ ऊपरी शरीर स्वस्थ होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका दिमाग सेहतमंद होना भी जरूरी है। दरअसल शिशु के जन्म के साथ ही फाउंडेशन तैयार होना शुरू हो जाता है। पहले छह महीने मां के दूध के साथ और छह महीने बाद मां के दूध के साथ-साथ ठोस आहार उसके शरीर की नींव बनाते हैं। यह जानना जरूरी है कि शिशु को कैसा आहार दिया जाए, ताकि वह शरीर के साथ दिमाग से भी दुरुस्त रहे। यह तो काफी जानी-पहचानी बात है कि आज का खाया, कल को आजमाया जाता है। इस बात में ये स्पष्ट संदेश छिपा है कि आयु की आरंभिक अवस्था में ही सही पोषण व संतुलित आहार की आदत डाल दी जाए तो भविष्य के लिए स्वस्थ व सेहतमंद आदत बन जाती है।

आहार और विकास

शिशु के स्वस्थ शरीर और दिमाग दोनों की सेहत के लिए माइक्रोन्यूट्रियंट और मैक्रोन्यूट्रियंट जैसे तत्वों का सही मात्रा में होना जरूरी है।

 

जरूरी है सही आहार

मैक्रोन्यूट्रियंट आहार में प्रोटीन, फैट और कार्बोहाईड्रेट जैसे तत्व शामिल हैं, जो शिशु के शरीर को मजबूती देते हैं। इसकी वजह से बच्चों को खेलने व अन्य क्रियाओं के लिए ऊर्जा मिलती है। माइक्रोन्यूट्रियंट जैसे मिनरल्स (आयरन, फोलिक एसिड और जिंक इत्यादि) व विटामिंस शिशु के दिमागी विकास और इम्युनिटी के लिए जरूरी हैं। शिशु को प्रोटीन, फैट और कार्बोहाईड्रेट तो रोजाना चपाती, चावल, दूध और घी आदि से मिल जाते हैं, लेकिन माइक्रोन्यूट्रियंट की कमी रह जाती है। अगर आपका शिशु बार-बार बीमार होता है तो उसमें इम्युनिटी की कमी है, जो जिंक से मिलती है। वहीं बच्चों के दिमागी विकास के लिए आयरन जरूरी है। यह जानना बहुत जरूरी है कि मां के दूध में अन्य सभी पोषक तत्व तो होते हैं, लेकिन आयरन नहीं होता। शुरुआती छह महीने जब शिशु मां के दूध पर निर्भर होता है तो वह अपने शरीर में जमा आयरन से उसे पूरा कर लेता है, लेकिन छह महीने बाद शिशु के लिए आवश्यक आयरन को आहार से पूरा किया जाना जरूरी होता है।