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बोझिल पलकें, भाग-32

रानू

8th July 2019

अंशु के रूप में जिंदगी का खूबसूरत चेहरा सामने था, लेकिन अजय के पांव फिर भी आगे नहीं बढ रहे थे। क्या वजह हो सकती थी इसकी?

बोझिल पलकें, भाग-32

अंशु के मन में उसके प्रति सहानुभूति है। वह उसकी एहसानमंद होने के कारण उसका भविष्य उज्ज्वल देखना चाहती है। उसके दिल में तो केवल विशाल का प्यार है र किसी के प्रति प्यार उत्पन्न होने का प्रश्न ही नहीं उठता।

काश! अंशु के जीवन में विशाल नहीं आया होता तो वह निश्चय ही उसका दिल जीतने का पूरा प्रयत्न करता।

उसने कहा, ‘जी हां, इरादा तो यही है।'

‘वैरी गुड,' अंशु ने मानो संतोष की सांस ली। बोलो, ‘अब मैं फोन रख रही हूं। फिर कभी भेंट होगी। नमस्ते।'

‘नमस्ते।' अजय ने मानो न चाहते हुए कहा।

अंशु के दिल में उसका प्यार न सही, फिर भी अंशु उससे यदि इसी प्रकार बातें करती रहे तो उसके दिल को शांति तथा मिठास प्राप्त होती रहेगी।

उसने सोचा, क्या अब वास्तव में उसकी भेंट अंशु से एक बार फिर होगी? फोन द्वारा या व्यक्तिगत रूप में? अंशु ने कुछ बताया नहीं!

एक सप्ताह बीत गया। इस मध्य अंशु से उसकी भेंट एक बार भी नहीं हुई। उसका फोन भी नहीं आया।

उसने अंशु को किसी बहाने फोन करना चाहा, परंतु साहस नहीं हुआ। कहीं अंशु को उसके दिल का भेद न ज्ञात हो जाए। भेद खुल जाने के बाद कहीं उसके दिल की सहानुभूति घृणा में बदल गई तो वह जीवित नहीं रह सकेगा।

कभी-कभी किसी के दिल में अपने प्रति घृणा देखकर मानव का जीवन कठिन हो जाता है।

अंशु के प्रति उसका प्यार दिल की गहराई में उतर गया।

इस मध्य अजय को ज्ञात हो गया कि उस पर कोई मुकदमा नहीं चलेगा। उसका जीवन बेदाग छूटेगा, क्योंकि पुलिस ने उसे सरकारी गवाह बना लिया है।

यही नहीं डी.आई.जी. ने उसकी बहादुरी को सराहते हुए इतने बड़े गैंग के पकड़े जाने के परिणाम में उसे सरकार से एक उपहार भी देने की सिफारिश कर दी थी।

पुलिस ने चन्दानी का बंगला, तहखाना तथा सके अंदर की सारी वस्तुएं अपने कब्जे में कर ली थीं। कागजात तथा वस्तुओं की पूरी-पूरी जांच की जा रही थी।

इतना भयानक तथा बड़ा गैंग पकड़ने की प्रसन्नता में डी.आई.जी. ने अपने बंगले पर एक निजी पार्टी दी। पुलिस विभाग के ऊंचे-ऊंचे पदाधिकारी इसमें सम्मिलित हुए। डी.आई.जी. ने अजय को भी निमंत्रण दिया।

अजय जब शाम होने के बाद पार्टी में पहुंचा तो उसने देखा, वहां राय साहब, उनकी पत्नी तथा अंशु भी उपस्थित हैं।

अंशु को मानो अजय की ही प्रतीक्षा थी। अजय को देखते ही उसका दिल प्रसन्नता से उछल पड़ा। लंबी बोझिल पलकों के मध्य आंखें सितारों समान चमक उठीं, परंतु फिर उसने अपने दिल पर काबू कर लिया।

यदि उसे अजय के लिए इतना उत्सुक किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा? सभी जानते हैं कि उसके डैडी उसका विवाह विशाल के साथ करना चाहते हैं।

अजय ने अंशु को देखा। अंशु अपनी सहेलियों के मध्य हाथ में मिठाई की एक प्लेट लिए उसी को देख रही थी। अजय के होंठों पर एक गंभीर मुस्कान चली आई।

अंशु की यह सुंदरता- सुंदरता की प्रतिमा, जिसे वह अपने दिल की गहराई से प्यार करता है, शीघ्र ही किसी और की बन जाएगी। विशाल कितना भाग्यवान है, जिसे अंशु के दिल पर पूरा अधिकार मिलेगा।

अजय ने राय साहब तथा उनकी धर्मपत्नी को नमस्ते किया तो उन्होंने उसका नमस्ते स्वीकार करने के बाद हर्ष प्रकट करते हुए उसे बधाई भी दी।

उसके बाद अजय ने एक प्लेट ली और मेज पर सभी मिठाइयों में से कुछेक टुकड़े प्लेट में रखने के बाद एक किनारे खड़ा हो गया।

अंशु के दिल की कली बेचैन थी। उसने अजय को अकेले देखा तो तुरंत उसके पास चली आई।

अजय ने उसे नमस्ते किया तो उत्तर में नमस्ते कहते हुए वह इस प्रकार मुस्कराई, मानो सफेद बादलों में बिजली कौंध गई हो। उसके मोती जैसे दांत कुछ ऐसे ही चमकदार थे।

अंशु ने आज भी एक मैक्सी पहन रखी थी - गहरे नीले रंग की मैक्सी - कलाइयों से लेकर दोनों कंधों तक अत्यधिक झोलदार आस्तीन - फिर कंधों से कमर तक कुछ कम झोल - इसके बाद कमर से बेल्ट समान बंधकर नीचे तक झोल ही झोल था। आज अंशु की सुनहरी लटों को संवारने का ढंग भी बिल्कुल निराला था। नीली मैक्सी में उसका मुखड़ा नीले बादलों पर चंद्रमा समान निखर आया था।

अजय अंशु को देखता ही रह गया। अंशु अजय से मुस्कराकर बातें कर रही थी। अजय को ऐसा लगा, मानो उसकी सांसों की सुगंध सारे कमरे में फैल गई।

अंशु बातों ही बातों में अजय पर अपने दिल का भेद प्रकट कर देना चाहती थी, परंतु हर बार उसके साहस पर नारीत्व छा गया। अजय क्या सोचेगा? क्या अजय को मालूम नहीं कि उसके डैडी विशाल को उसके लिए पसंद कर चुके हैं?

फिर भी वह अजय से घुल-मिलकर उसका मन जीत लेना चाहती थी।

जारी...

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