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जानें क्या है वसा का वैकल्पिक स्रोत

कविता देवगन (न्यूट्रीशनिस्ट व डोंट डाइट)

16th July 2019

चिकनाई से खाने में स्वाद आता है। हममें से तकरीबन हर कोई यही कहेगा। मगर फिर भी वर्षों से इसे गलत कहा जाता रहा है। अब हम चिकनाई या वसा शब्द सुनते हैं, तो हम खुद-ब-खुद इसे गलत मानने लगते हैं और लगातार चिकनाई रहित भोजन की तलाश करते रहते हैं। पर एक अनुसंधान के तहत यह सलाह दी गई है कि चिकनाई ठीक है, मगर आपको इसके सही प्रकार को ग्रहण करना होगा।

जानें क्या है वसा का वैकल्पिक स्रोत

 

मेरी सलाह अनिवार्य वसीय अम्लों के उपभोग पर फोकस करने की है, क्योंकि हमारा शरीर अपने स्तर पर इनका निर्माण नहीं कर सकता। विटामिन, खनिज और अन्य अनिवार्य पोषक तत्वों की भांति हमें इन्हें भी अपने भोजन से ही ग्रहण करना होता है। यह समझना जरूरी है कि जब बात कैलोरी की हो, तो वसा, वसा है। यह बेशक किसी भी स्रोत से मिले, पर इसके प्रति ग्राम में नौ कैलोरी होती हैं। जरूरी यह है कि इसे सही प्रकार से लिया जाए और वह भी उचित मात्रा में। इसलिए बुरी चिकनाई को अच्छी चिकनाई से बदल डालिए और इसे पूरे दिन में ग्रहण की जाने वाली कुल कैलोरी का 25 फीसदी रखिए और इसका केवल 10 फीसदी हिस्सा सैचुरेटेड वसा का होना चाहिए।

घी

अब जबकि साबित हो गया कि सैचुरेटेड वसा में कोई नुकसान नहीं है तो अपने आहार में फिर से थोड़ा घी शामिल किया जाए। अब यह साफ हो गया है कि हमारे आहार में सैचुरेटेड वसा के बजाय कॉर्बोहाईड्रेट और चीनी की अधिकता है, जो नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेवार है। इसलिए थोड़ा घी रोटी पर चुपोड़ लीजिए या फिर बगैर किसी डर के सब्जी या दाल में घी का तड़का लगाइए।

वसायुक्त मछली

इसमें कोई संदेह नहीं है कि ओमेगा 3 में शरीर को हृदय की बीमारियों और डायबिटीज के खतरों से दूर रहने की अद्भुत शक्ति है और यह अस्थमा, ऑर्थराइटिस, डिप्रेशन, गठिया और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी बढ़ती हुई सामान्य बीमारियों के खतरे को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आपको निश्चित ही इस कमाल के पोषक तत्व की मात्रा को अपनी प्लेट में बढ़ाना चाहिए। हफ्ते में दो बार इन्हें खाना सुनिश्चित कीजिए।

तिसी

अगर आपको मछली पसंद नहीं या फिर आप एक सख्त शाकाहारी हैं, तो सन के बीज से अल्फा- लिनोलेनिक अम्ल (जो शरीर में जाकर ओमेगा-3 वसीय अम्ल में बदल जाता है) लीजिए। एक चम्मच सन के बीज हफ्ते में (सूप, सब्जी, दाल में ऊपर से डालिए) तीन से चार बार लीजिए या फिर खाना पकाते वक्त सन के बीज के तेल का इस्तेमाल कीजिए।

बादाम, काजू और अखरोट

बादाम का ज्यादातर हिस्सा सैचुरेटेड होता है। इसे ज्यादा मात्रा में मोनो सैचुरेटेड वसीय अम्लों में पैक किया जाता है, जो हमारे हृदय के लिए काफी अच्छी होती है, क्योंकि यह बुरे कोलेस्ट्राल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्राल को बढ़ाने में सहायक होती है। अखरोट में मोनो सैचुरेटेड वसीय अम्लों के साथ ओमेगा-3 होता है, जो कोलेस्ट्राल के स्तर को कम करने, सूजन को घटाने, धमनियों में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसलिए थोड़े अखरोट-बादाम-काजू वगैरह रोज खाइए या फिर इससे बना मक्खन अच्छा विकल्प है, जो अच्छी वसा के साथ गुणवत्तायुक्त प्रोटीन देता है।

नारियल या गरी

नारियल सैचुरेटेड वसा से भरपूर होता है, मगर हृदय के लिए अच्छा होता है, क्योंकि इसका 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा लॉरिक अम्ल होता है, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और हृदय की बिमारियों के खतरे को कम करता है। इसलिए इसे थोड़ा अपनी सब्जी में डालिए।

अंडे

एक पूरे अंडे में पांच ग्राम वसा होती है, लेकिन इसमें केवल 1.5 ग्राम सैचुरेटेड होती है। पूरे अंडे कोलीन के भी अच्छे स्रोत होते हैं (एक अंडे की जर्दी में तकरीबन 300 माइक्रोग्राम कोलीन होती है)। यह महत्वपूर्ण विटामिन बी होता है, जो मस्तिष्क, स्नायु तंत्र और हृदय संबंधी तंत्र को विनियमित करता है और जब कि अंडे में कोलेस्ट्रॉल होने की तमाम बातें उठ रही हैं, इस बारे में किए गए शोध, अंडे के सामान्य उपभोग को हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने से जोड़ते हैं। शोध बताते हैं कि नाश्ते में अंडा खाने के बाद देर तक पेट भरा रहता है। तो जाइए, अंडे खाइए।

 

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