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बोझिल पलकें, भाग-37

रानू

3rd August 2019

अजय और अंशु के प्यार की तो अभी शुरुआत ही हुई थी। ये पिकनिक भी मानो उसी एहसास को परवान चढ़ा रही थी। फिर अचानक ये क्या हो गया? क्या अंशु के सारे अरमान इस झरने के पानी में बह जाएंगे?

बोझिल पलकें, भाग-37

अजय ने इस परी के स्वप्न को भंग करने का साहस नहीं किया 

सहसा कुछ देर बाद उसने महसूस किया कि कोई उसकी दृष्टि का अनुमान लगाकर उसे देख रहा है। उसने गर्दन घुमाकर देखा, पानी में बैठा जोड़ा उसी को देख रहा था। अजय ने अपने दिल पर काबू किया और वहां से हट गया।

यह लोग जाने क्या सोचेंगे! वह एक ओर गया। अपने कपड़े उतारे, चड्डी में वह भी पानी में कूद गया तैरता हुआ वह कुछ दूर पर अंशु के सामने से होकर निकला, जहां पानी गहरा था।

अंशु ने उसे देखा तो तुरंत उठकर बैठ गई। उसे अजय के तैरने का ढंग बहुत अच्छा लगा। वह थोड़ी-थोड़ी दूर पर डुबकी लगाते हुए झरने की ओर बढ़ रहा था।

अचानक अंशु का दिल धड़कने लगा। उधर पानी में कोई खतरा न हो। ऐसे स्थान पर, जहां पानी गहरा होता है, डुबकी लगाने वाला कभी-कभी चट्टान की आड़ी-तिरछी दरारों में फंस जाता है। अधिकांश अच्छे तैराकों की मृत्यु चट्टानी इलाके के पानी में इसी कारण होती है।

अंशु ने चाहा कि वह आवाज देकर अजय को ऐसा करने तथा झरने के बिल्कुल समीप जाने से मना कर दे।

उसने खड़े होकर अजय को आवाज भी दी, परंतु झरने का शोर अजय के कानों में अधिक था। वह अंशु का स्वर नहीं सुन सका।

अंशु ने उसे फिर आवाज दी, परंतु तब तक अजय डुबकी लगाकर झरने के गिरते पानी में प्रविष्ट हो चुका था।

अंशु के दिल की धड़कनें और तेज हो गईं। उसने सहायता के लिए इधर-उधर देखा। मीना उसकी पुकार सुन चुकी थी। वह तुरंत उसके पास चली आई।

वे उधर...उधर...' अंशु ने कांपते स्वर से अपने दिल का भेद प्रकट किया, ‘झरने के गिरते पानी में चले गए हैं।'

‘तो इसमें घबराने की क्या बात है, उन्हें तैरना तो आता ही है।' मीना भी चिंतित हुई, परंतु उसने प्रकट नहीं किया। अंशु की पहली पुकार पर वह भी अजय को झरने की ओर जाता देख चुकी थी।

अंशु को संतोष नहीं मिला। वह पानी के मध्य उभरी एक चट्टान से दूसरी चट्टान पर कूदती हुई झरने की ओर बढ़ गई, जहां तक वह पहुंच सकती थी।

मीना भी उसके साथ चली आई, परंतु अजय वापस नहीं आया। जब बहुत देर तक वापस नहीं आया तो अंशु तथा मीना की चिंता बढ़ने लगी। अंशु की आंखों के सामने तो अंधकार ही छाने लगा।

जब कुछ और समय बीत गया और अंशु सहन नहीं कर सकी तो उसका दिल फट गया। दिल के फटने की चीख निकली, ‘अजय,' परंतु उसकी चीख झरने के शोर में डूबकर रह गई।

अंशु ने फिर भी साहस नहीं छोड़ा। वह फिर चीखी, ‘अजय।'

झरने के शोर में अंशु की चीख डूब गई थी, परंतु उसके पीछे कुछ दूर खड़े लड़के-लड़कियों ने अंशु की तड़पती पुकार सुन ली। लपककर सब अंशु के पास चले आए 

अंशु से दिल की तड़प सहन नहीं हो सकी तो उसने पानी में कूदकर स्वयं अजय का पता चलाना चाहा, परंतु मीना पहले ही सतर्क थी। उसने अंशु का हाथ पकड़ लिया। कुछ अन्य लड़कियों ने भी अंशु को रोकने में मीना की सहायता की। कुछेक लड़के अजय का पता चलाने के लिए झरने के गिरते पानी के काफी समीप गए, परंतु इसके अंदर जाने का साहस किसी ने भी नहीं किया। झरने के पानी का बोझ उन्हें गहराई में दबाकर चट्टान की किसी भी दरार में फंसा सकता था।

कुछ लड़के तो इतना डर गए कि तैरना जानकर भी पानी में दोबारा नहीं उतरे।

अंशु मीना से लिपट गई। वह फूट-फूटकर रो पड़ी। दिल के अंदर प्यार का बंधा लावा फूटकर बाहर आ गया था। अभी-अभी उसने कितना सुंदर सपना देखा था और आंख खुलने से पहले ही यह टूट गया!

अजय कहां होगा? दरार में फंसकर उसके शरीर ने किस प्रकार तड़प-तड़पकर जान दी होगी? वह अनुमान लगा-लगाकर तड़प रही थी। अजय कहां हो तुम? कहां? उसका दिल पुकार-पुकार कर कह रहा था और वह रो रही थी, वह लगातार हिचकियों से रोती रही, सिसक-सिसककर, फूट-फूटकर और लड़के दिल में निराशा लिए हुए अजय की लाश को पानी में तलाश करने का प्रयत्न करते रहे।

‘यहां इतना रोना-पीटना क्यों हो रहा है?' सहसा एक स्वर अंशु ने ही नहीं, सभी के कानों ने सुना, ‘कोई दुर्घटना हो गई है क्या?'

जारी...

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