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बच्चों के बेडटाइम को बनाएं लर्निंग टाइम

संविदा मिश्रा

14th August 2019

कहा जाता है कि यदि बुनियाद अच्छी हो तो इमारत  अपने आप अच्छी हो जाती है इसीलिए पेरेंट्स  बच्चों को शुरू के सालों में जो भी सिखाते हैं वही बातें उनके भविष्य का निर्धारण करने में काम आती हैं। 

 बच्चों के बेडटाइम को बनाएं लर्निंग टाइम
ऐसा माना जाता है कि बच्चे उस कोरी किताब की तरह होते हैं जिसका हर  एक पन्ना माता-पिता के द्वारा लिखा जाता है। घर में पेरेंट्स और स्कूल में टीचर्स से ही बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं। बच्चों के शुरूआती दौर की लर्निंग्स उनके लाइफ टाइम के लिए सबक बनती हैं। कई बार देखा गया है कि  माता-पिता अपने ऑफिस और घर के काम में इतना ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं कि बहुत सारी बातें पेरेंट्स बच्चों को नहीं सिखा पाते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चों के बेडटाइम को लर्निंग टाइम बनाएं। आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे ट्रिक्स जिनसे आप बच्चों को सोने से पहले कई अच्छी बातें सिखा सकते हैं। 
 
बच्चों को कहानियां सुनाएं 
 
सोने का टाइम ऐसा टाइम होता है जब माता-पिता और बच्चे साथ होते हैं। इसलिए बच्चों को सोते टाइम इंस्पिरेशन वाली कहानियां सुनाएं। बच्चों को किसी व्यक्ति विशेष का उदाहरण देकर अच्छी बातें सिखाने का प्रयास करें। ज़रूरी नहीं है कि बच्चों को सच्ची कहानियां ही सुनाएं बल्कि कभी-कभी मनगढंत कहानियों के द्वारा भी बच्चों को अच्छी बातें सिखाएं। 
 
बच्चों से उनके स्कूल की बातें करें 
अक्सर ऐसा देखा गया है कि टाइम की कमी की वजह से वर्किंग पेरेंट्स बच्चों से उनके स्कूल की बातें नहीं कर पाते और बच्चे धीरे-धीरे पढ़ाई में पिछड़ते जाते हैं। सोने से पहले बच्चों से उनके स्कूल में क्या हो रहा है और कैसे हो रहा है जैसी बातें करें। बच्चों को ये भी सिखाएं कि स्कूल में होने वाली हर छोटी बड़ी एक्टिविटी वो घर में अपने पेरेंट्स से शेयर ज़रूर करे। 
 
बच्चों को ओरल पढ़ाई करवाएं 
बच्चा यदि छोटी क्लास में हैं तो उसपर लिखने से ज्यादा सुनने का प्रभाव पड़ता है इसलिए बच्चे को उसके कोर्स के हिसाब से ओरल पढ़ाई करवाएं जैसे A से Z  तक बच्चे को बार-बार रिपीट करने के लिए बोलें और भी जैसे काउंटिंग या फिर थ्री लेटर वर्ड्स की स्पेलिंग सिखाएं। 
 
बच्चों से कोई स्टोरी सुनाने को बोलें 
आप बच्चे से बोलें कि वो कोई स्टोरी सुनाए।  इससे बच्चे की क्रिएटिविटी डेवलप  होने के साथ -साथ उसका दिमाग भी तेज़ होगा और कई बार बच्चे के स्टोरी सुनाने के ढंग से ये भी पता चलता है कि बच्चे के दिमाग में किस तरह की भावनाओं का विकास हो रहा है।