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पूरे शरीर को विषैले पदार्थों से दिलाएं छुटकारा

कविता देवगन (न्यूट्रीशनिस्ट व डोंट डाइट)

16th August 2019

हमारे चारों तरफ जहर घुला हुआ है। हम सड़ा-गला भोजन करते हैं, जहरीली हवा में सांस लेते हैं, जहरीले तनाव से भरे माहौल में हम काम करते हैं। ऐसे में हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि हमारा शरीर जहरीले पदार्थों से पूरी तरह से भरा हुआ है। पहाड़ों पर कुछ दिनों की छुट्टियां मना लेना या फिर सनकपूर्ण ढंग से डाइटिंग को अपना लेना इस समस्या का समाधान नहीं है।

पूरे शरीर को विषैले पदार्थों से दिलाएं छुटकारा

इस मुश्किल का हल एक आसान डबल डिटॉक्स प्रक्रिया का पालन करने में निहित है, जो बेहद सहजता के साथ बगैर किसी दिक्कत के तकरीबन स्वचालित ढंग से अपना ली जाए। खुद को भीतर से स्वच्छ और बाहर से स्वस्थ और सुंदर रखने के लिए नीचे दी गई योजना का पालन करें। 

वृहदांत्र 

शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त कराने की शुरुआत यहीं से होती है। अगर कब्ज की वजह से आप नियमित तौर पर टॉयलेट नहीं जा पा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपका शरीर विषाक्त पदार्थों को उतनी नियमितता के साथ बाहर नहीं निकाल पा रहा, जितना कि इसे करना चाहिए। खुराक की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए हाइड्रेशन का खास ख्याल रखिये। रोजाना 8-10 ग्लास पानी पीजिए, पर्याप्त फाइबर लीजिए, दो बार फल और 3-4 बार सब्जियां ग्रहण करिये। बीज, अखरोट और बादाम जैसी अच्छे वसा पदार्थों के सेवन पर भी ध्यान दीजिए। सप्ताहांत के लिए एक टिप जरूर लिख लीजिए। इस दौरान केवल फल और सब्जियां खाईए। लेकिन अगर सिरदर्द की शिकायत होने लगे या फिर आप किसी तरह की असुविधा महसूस करें तो थोड़े से ब्राउन राइस और वॉर्म क्लियर सूप या फिर हल्की पकाई हुई मछली ली जा सकती है।

यकृत

यह शरीर का काफी व्यस्त अंग है और आपको इसकी यथासंभव मदद करनी चाहिए। यह रसायन और विषैले पदार्थों को अलग करता है। कम वसा वाली खुराक को अपनाइए। शानदार दिखने वाले तले-भुने व्यंजनों व विभिन्न तरह के रसायनों से भरपूर डिब्बाबंद खाद्य को 'ना बोलिए। आप जो भी वसा ग्रहण करते हैं, वह यकृत से होकर गुजरती है और इस प्रक्रिया में यकृत द्वारा खर्च होने वाली ऊर्जा की वजह से शरीर से विषैले पदार्थों को दूर करने का नियमित कार्य बाधित होने लगता है। फलों के रस इसको अविश्वसनीय राहत पहुंचाते हैं। ये यकृत की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाते हैं और शरीर से विषैले और व्यर्थ पदार्थों के उत्सर्जन की दर को बढ़ाते हैं। यकृत को शक्तिशाली बनाने के लिए रोजाना नींबू से इसकी सफाई होनी चाहिए। सुबह जब आप सोकर उठते हैं, तब आधा लीटर गुनगुने पानी में आधा नीबू निचोड़ कर डालकर पिएं। चाय-कॉफी से भी बचें क्योंकि इसमें मौजूद कैफीन से यकृत पर दबाव पड़ता है। इसके बजाय हर्बल या ग्रीन टी ग्रहण करें।

त्वचा

शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में त्वचा सबसे बड़ी उत्सर्जक होती है, इसलिए जिस सामग्री और रसायनों को आप जानते नहीं हैं, उनसे बने किसी भी उत्पाद को अपनी त्वचा पर न लगाएं। जितना संभव हो उतना प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग करें। घर से बाहर निकल कर त्वचा को सूर्य की रोशनी और ताजी हवा के सानिध्य में लाने का भी ख्याल रखें। 

फेफड़े

गहरी सांस लेने से ताजी ऑक्सीजन रक्त में मिलती है व श्वेत रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है और खतरनाक पदार्थों को शरीर से बाहर करने में मदद मिलती है। इसलिए इसका खास ख्याल रखें। अपनी खुराक में विटामिन सी की मात्रा बढ़ाएं। शोधों से पता चलता है कि यह विटामिन पर्यावरणीय विषैले पदार्थों से फेफड़ों की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान में कमी लाता है। अदरक इसके लिए रामबाण औषधि है (अपने दिन की शुरुआत एक कप अदरक वाली चाय के साथ करें और एक कप तब, जब आप काम के बाद घर वापस लौटें)। इससे विषैले पदार्थों के फेफड़ों तक पहुंचने के पहले ही वायु नलिकाओं से बाहर निकालने में मदद मिलती है। नाशपाती भी इस मामले में काफी कारगर होती है। इसमें मौजूद ब्रोमेलिन एंजाइम फेफड़ों में जमा गंदगी को साफ करने में मदद करता है और इस तरह से प्राकृतिक ढंग से विषैले तत्वों की निकासी में सहायक होता है।

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