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प्रेगनेंसी में मिसकैरिज से जुड़े इन फैक्ट्स की जानकारी होनी चाहिए

गृहलक्ष्मी टीम

19th August 2019

प्रेगनेंसी में मिसकैरिज से जुड़े इन फैक्ट्स की जानकारी होनी चाहिए

आप जानना चाहेंगी

आम गर्भावस्था में व्यायाम, सैक्स, भारी सामान उठाना, भावनात्मक तनाव, गिरने के डर, या पेट पर दबाव पड़ने से मिसकैरिज नहीं होता। मॉर्निंस सिकनेस से भी नहीं होता यदि एक बार मिसकैरिज हो भी जाए तो आगे आने वाली गर्भावस्था सामान्य होती है।

आप सीखना चाहेंगी ?

कई बार स्वस्थ गर्भावस्था में भी अल्ट्रासाउंड से शिशु की हृदयगति पता चलने में समय होता है। यदि सर्विक्स बंद है, हल्का धब्बा लग रहा है तो मोनोग्राम से साफ तस्वीर सामने आ जाएगी। आपके एच जी सी स्तर का भी ध्यान रखा जाएगा।

यदि पहले आपका मिसकैरिज हो चुका है

हालांकि अर्ली मिसकैरिज में भ्रूण सामान्य जीवन बिताने लायक नहीं होता लेकिन मां-बाप के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं है। यह एक कुदरती प्रक्रिया है जिसमें जीवित न रहने योग्य भ्रूण स्वयं ही नष्ट हो जाता है। हालांकि इससे दुख तो होता पर इसमें आपकी कोई गलती नहीं होती। अपने दुःख व मन के भार को किसी की मदद से हल्का करें व हमारा अध्याय 23 मे लिखे उपायों पर अमल करें।

कई महिलाओं को दोबारा जल्दी से जल्दी गर्भवती होना ही बेहतर जान पड़ता है, पर पहले आपको डॉक्टर से हरी झंडी लेनी चाहिए। वैसे ऐसा अक्सर एक बार ही होता है।

मिसकैरिज का कारण कोई भी हो, डॉक्टर गर्भ धारण के लिए दो-तीन महीने रुकने की सलाह देते हैं। कई कहते हैं कि शरीर को अपनी जरूरत के हिसाब से चलने दें। यदि आपसे रुकने को कहा जाए तो विश्वसनीय गर्भनिरोधक इस्तेमाल करें। अपने शरीर की खोई ताकत लौटाएं। उम्मीद तो यही है कि आप अगली बार एक शिशु की मां बन पाएंगी। दरअसल मिसकैरिज इस बात का भी आश्वासन होता है कि आपमें गर्भ धारण करने की क्षमता है।

मिसकैरिज के बाद महिलाएं अपनी सामान्य गर्भावस्था जीती हैं व शिशु को जन्म देती हैं। यदि ऐंठन की वजह से काफी दर्द हो तो डॉक्टर कोई दर्द निवारक दवा दे सकते हैं।अपनी स्थिति बताने में संकोच न करें।

क्या इससे बचाव हो सकता है? यह भ्रूण की विकृति की वजह से होता है अतः इसका बचाव नहीं हो सकता हालांकि खतरा घटाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते है‒

  • दवा लेते समय ध्यान दें। केवल वही दवा लें, जिसे गर्भावस्था के लिए सुरक्षित माना जा सके।
  • गर्भधारण से पहले अपने वजन को आदर्श रूप में लाने की चेष्टा करें।जरूरत से ज्यादा या कम वजन से गर्भावस्था को खतरा हो सकता है।।
  • गर्भधारण से पहले क्रॉनिक अवस्था पर काबू पाएं।
  • फॉलिक एसिड व विटामिन बी की दवा लें। अध्ययनों से पता चला है कि कई महिलाओं को इसी वजह से गर्भावस्था में दिक्कतें आती हैं। सही दवा लेते ही उनकी गर्भावस्था सामान्य हो जाती है।
  • शराब व धूम्रपान त्याग दें।
  • संक्रमण से बचाव का उपाय करें।
  • यदि दो से ज्यादा मिसकैरिज हो चुके हों तो पहले उनका कारण पता लगाने की कोशिश करें ताकि आने वाले समय में बचाव हो सके।

मिसकैरिज का प्रबंधन

कई बार पहली तिमाही में जब मिसकैरिज पूरी तरह नहीं होता तो प्रेगनेंसी के अंश बीच में ही रह जाते हैं। शिशु के दिल की धड़कन पता नहीं चलती और रक्तस्राव भी नहीं होता। ऐसे में आपको अपना गर्भाशय खाली कराना होगा। इसके कई तरीके हो सकते हैं।

एक्सपेक्टेंट मैनेजमेंट:- आप गर्भावस्था में कुदरती तरीके से खत्म होने की प्रतीक्षा कर सकती हैं। इसमें कुछ दिन से लेकर, तीन-चार सप्ताह का समय लग सकता है।

दवाएँ:- दवाओं के माध्यम से भ्रूण के उत्तर व प्लेसेंटा को निकालने की कोशिश की जाती है। रक्तस्राव शुरू होने में कुछ दिन लग सकते हैं। इस दवा की वजह से उल्टी, जी मिचलाना, ऐंठन या डायरिया हो सकता है।

सर्जरी:- डी एंड सी प्रक्रिया में डॉक्टर आराम से गर्भाशय का मुख खोलते हैं प्रेगनेंसी के अंश बाहर निकाल देते हैं। इसके बाद एक सप्ताह तक रक्तस्राव होता है। इसमें संक्रमण का थोड़ा भय रहता है।

आप कैसे तय करेंगी कि आपको क्या करवाना चाहिए। यह निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है- 

  • मिसकैरिज कितने समय बाद हुआ है। यदि अब भी रक्तस्राव व ऐंठन जारी है तो इसका मतलब है कि वह अभी चल रहा है। ऐसे में डी एंड सी करवा सकते हैं या दवाएँ ले सकते हैं। गर्भावस्था को कितना समय हुआ है। यदि भ्रूण के ऊतक ज्यादा हैं तो डी एंड सी करवाना जरूरी हो जाएगा ताकि अंदर की पूरी सफाई हो सके।
  • आपकी शारीरिक व भावनात्मक अवस्था कैसी है। उसी के अनुसार यह फैसला लिया जाएगा।

क्या हैं डी एंड सी के खतरे व लाभ-

  • डी एंड सी से संक्रमण हो सकता है। यदि कुदरती तरीके के लिए प्रतीक्षा की तो कई बार गर्भाशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। ऐसे में डी एंड सी करानी पड़ सकती है।
  • डी एंड सी के दौरान यह भी पता लग जाता है कि मिसकैरिज की वजह क्या थी। तरीका चाहे जो भी हो, भ्रूण के जाने के बाद दुःख तो अक्सर होता है।

मिसकैरिज के प्रकार

हालांकि आपके साथ ऐसा हो चुका है तो यकीनन आपको इन नामों से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आपने तो शिशु खो ही दिया है पर आपको इसकी जानकारी होनी चाहिए।

कैमिकल प्रेगनेंसी :- जब अंडा फर्टीलाइज्ड होने के बावजूद गर्भाशय में इम्पलांट नहीं हो पाता तो ऐसा होता है। महिला का मासिकधर्म न हो और उसकी जांच भी पॉजिटिव आजाएगी क्योंकि प्रेगनेंसी हार्मोन भी पाया जाएगा लेकिन अल्ट्रासाउंड से पता चलेगा कि कोई प्लेसेंटा मौजूद नहीं है।

ब्लाइटेडओवम:- इस अवस्था में फर्टीलाइज्डएग युटेरसवॉल से जुड़ जाता है पर भ्रूण नहीं बन पाता। ऐसे में खाली गैस्टेशनल सैक रह जाता है।

मिसमिसकैरिज:भ्रूण मरने के बाद भी गर्भाशय में बना रहता है। इसमें भूरा स्राव होने लगता है तथा अल्ट्रासाउंड से ही असली स्थिति पता चलती है।

इनकंपलीट मिसकैरिज:- जब प्लेसेंटा के कुछ ऊतक गर्भाशय में रहते हैं। और कुछ योनि के रक्तस्राव के साथ बाहर आ जाते हैं।इसमें ऐंठन के साथ रक्तस्राव होता रहता है।अल्ट्रासाउंड में प्रेगनेंसी के अंश देखे जा सकते हैं।

थ्रेटनडमिसकैरिज:जब योनि से रक्तस्राव के बावजूद सर्विक्स बंद रहता है व भ्रूण की हृदयगति पता चलती रहती है।ऐसे मामलों में प्रायः गर्भावस्था, बाद में सामान्य हो जाती है।

 

 

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