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बांके बिहारी को करना है प्रसन्न, तो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूजन करते समय रखें इन बातों का ध्यान

प्रीती कुशवाहा

19th August 2019

श्री कृष्ण के भक्त देश ही नहीं विदेश में भी मौजूद हैं। दिन—रात उनकी भक्ति में रमें रहने वाले भक्तों के लिए कृष्ण जन्माष्टमी किसी उत्सव से कम नहीं है। पूरे साल जन्माष्टमी का इंतजार करने वाले इस दिन को बड़े ही हर्षो उल्लास के साथ मनाते हैं। पूजा कोई भी हो जबतक उसे सही और पूरी विधि पूर्वक न किया जाए उसका फल हमें पूरी तरह से नहीं मिलता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं ​कि जन्माष्टमी पर पूजन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए जानते हैं....

भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में धरती पर आठवां अवतार लिया था। इस दिन स्वंय भगवान ने धरती पर कृष्ण रूप में अवतार लिया था। उनके जन्म के साथ ही इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी और जन्माष्टमी के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झूलाने की परंपरा भी है।
 
कैसे करें कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजन :
 
  • फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें और इस मंत्र का जप करें, 'प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः। वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः। सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।'
  • मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अगर ऐसा चित्र मिल जाए तो बेहतर रहता है।
  • इसके बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें और इस मंत्र का जाप करें, 'ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥'
  • सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें।
  • इस दिन व्रत करने वालों का ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। 
  • व्रत के एक दिन पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करना चाहिए।
  • व्रत के दिन सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। 
  • इसके बाद शाम के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए 'सूतिकागृह' नियत करें। साथ ही इसे भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • इन सभी विधियों के बाद पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए।  
  • इन सबके बाद आखिर में भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में चढ़ा हुआ प्रसाद वितरण करें और हो सके तो उनका सुमिरन करते हुए भजन-कीर्तन करें।