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क्या आपके दिल को सिर्फ कोलेस्ट्रॉल से डरना चाहिए?

गृहलक्ष्मी टीम

20th August 2019

अपनी पूरी जिंदगी हम यह मानते हैं कि कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग का एकमात्र कारण है। वास्तव में यह आम धारणा है कि शरीर में बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल हमारे हृदय की धमनियों को अवरुद्ध करने के लिए जिम्मेदार हैं, जिसके चलते अक्सर सीने में दर्द होता है और चरम मामले में दिल का दौरा पड़ता है। बहरहाल, सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है।

क्या है कोलेस्ट्रॉल

आइए, सबसे पहले एक नजर डालें कि कोलेस्ट्रॉल वास्तव में है क्या। यह यकृत (लिवर) द्वारा निॢमत एक वसीय पदार्थ है, जिसका उपयोग शरीर के हजारों कार्यों को करने में मदद के लिए होता है। करीब 75त्न कोलेस्ट्रॉल का उत्पादन लिवर करता है, बाकी हमारे द्वारा खाए गए भोजन से मिलता है। हमारा शरीर कोशिका झिल्लियों (सेल मेम्ब्रेन) के निर्माण में सहायता के लिए इसका इस्तेमाल करता है। इसके बिना हम पर्याह्रश्वत हॉर्मोनल संतुलन बनाए नहीं रख पाएंगे। कोलेस्ट्रॉल एक व्यापक पारिभाषिक शब्द है, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल और खराब कोलेस्ट्रॉल दोनों को दर्शाता है। लोग आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल शब्द का इस्तेमाल बैड कोलेस्ट्रॉल के लिए ही करते हैं, जिसे अक्सर दिल के रोगों के लिए जिम्मेदार एकमात्र कारक माना जाता है। वैसे, यह सच नहीं है। हृदय से जुड़ी दिक्कतों के कई कारण होते हैं। ब्लॉकेज, सूजन और जलन, खराब जीवनशैली, तनाव कुछ ऐसे ही कारण हैं, जबकि हृदय की समस्याओं में कोलेस्ट्रॉल का योगदान केवल 30त्न होता है। इसलिए केवल कोलेस्ट्रॉल पर काबू पाने पर फोकस करने के बजाय, आदर्श रूप में आप दिल की संपूर्ण देखभाल के लिए समाधानों की तलाश कर सकते हैं और वह भी कम उम्र से ही।

ऐसे रखें दिल का ख्याल

आप हृदय के लिहाज से एक सेहतमंद जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों की रोकथाम कर सकते हैं। आपके हृदय के बचाव में मदद करने वाली रणनीतियां ये रहीं-

खानपान ऐसा, जो हृदय के लिए हो अच्छा 

सेहतमंद खानपान से आपको हृदय रोग होने का खतरा कम हो सकता है। फलों, सब्जियों और साबुत अनाज से भरपूर आहार दिल की रक्षा में मदद कर सकता है। खानपान में बहुत ज्यादा नमक और चीनी से दूर ही रहें। संतृह्रश्वत वसा का सीमित सेवन महत्वपूर्ण है। इस दिशा में पहला कदम खाना पकाने का ऐसा तेल चुनना है, जिसमें दिल की सेहत की परवाह करने के लिए उचित तत्व सही अनुपात में हों। तेल ओमेगा-3 से समृद्ध होना चाहिए और उसमें ओमेगा-6 व ओमेगा-3 के बीच का अनुपात भी आदर्श होना चाहिए। उसमें विटामिन ए, डी, ई और ऑराइज़नॉल जैसे पोषक तत्व भी होने चाहिए। हृदय के लिहाज से सेहत से भरे खानपान का मतलब शराब और तंबाकू के सेवन पर सतर्क निगाह रखना भी है।

वजन सीमा में रखें और नियमित व्यायाम करें

जरूरत से ज्यादा वजन होने का मतलब है कमर के आसपास अतिरिक्त वसा जमाए रखना। यह हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है। दिनचर्या में नियमित व्यायाम शामिल करने से हृदय रोगों का खतरा कम हो सकता है। जब आप समय पर और सही मात्रा में भोजन जैसे जीवनशैली से संबंधित अन्य उपायों के साथ शारीरिक गतिविधियां भी जोड़ लेते हैं, तो इसका असर और भी बढिय़ा होता है। यहां तक कि नियमित रूप से लगभग 30-40 मिनट तक तेज गति से चलने जैसी बुनियादी गतिविधियों से भी हमारी सेहत और दिल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

तनाव को काबू में रखें

कुछ लोग तनाव से निपटने की कोशिश जरूरत से ज्यादा खाने, शराब पीन या धूम्रपान करने जैसे बुरे तरीकों से करते हैं। तनाव को प्रबंधित करने के लिए रिलैक्स करने वाले अभ्यास या ध्यान जैसे वैकल्पिक तरीकों की तलाश आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। 

रात को अच्छी नींद अवश्य लें 

जिन्हें पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती, उनमें मोटापा, उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा पडऩे, मधुमेह और अवसाद का खतरा अधिक होता है। हर वयस्क के लिए हर रात सात से आठ घंटे की नींद बहुत जरूरी है। द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार, भारत पर पडऩे वाले बीमारियों के कुल बोझ में दिल के रोगों का योगदान 1990 के बाद से लगभग दोगुना हो गया है। इस आंकड़े पर विचार करते हुए यह समझना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है कि अकेले उच्च कोलेस्ट्रॉल में कमी लाना ही हृदय की सेहत की गारंटी नहीं दे सकता, क्योंकि इसमें कई अन्य कारकों की भी भूमिका होती है। वक्त आ गया है कि आप अपने हृदय की जिम्मेदारी स्वयं लें और समग्र रूप से इसके लिए सेहतमंद जीवनशैली पर चलना शुरू करें।

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