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कहीं आपके बच्चे के अंदर ईर्ष्या की भावना तो नहीं ...

संविदा मिश्रा

22nd August 2019

ईर्ष्‍या भावना किसी भी उम्र के व्यक्ति में उत्पन्न हो सकती लेकिन यदि बच्चों के मन में ये भाव उत्पन्न होने लगे तो ये बच्चों और उनके माता-पिता सबके लिए घातक साबित हो सकती है। 

 
ईर्ष्‍या एक ऐसी भावना है जो किसी दूसरे के पास ऐसी चीज़ या व्यक्ति विशेष के होने से उत्पन्न होती है जिसे आप पाने की इच्छा रखते हों या फिर किसी के पास कोई चीज़ आपसे ज्यादा अच्छी हो, ये एक ऐसा भाव है, जिसकी वजह से आप दूसरों के सामने अच्छा महसूस नहीं कर पाते हैं। आपके अंदर किसी तरह की कमी या अपूर्णता भी ईर्ष्या को जन्म देती है। यदि आपको ऐसा लगता है कि आपसे बेहतर कोई दूसरा व्यक्ति है तो ये भी उस व्यक्ति के प्रति ईर्ष्या भाव को जगाता है। 
6 साल के समर्थ ने अपने 2 साल के छोटे भाई का हाथ पकड़कर उसे मार्केट में कहीं दूर छोड़ दिया ताकि वो वापस घर न आ पाए। मम्मी ने जब समर्थ से उसकी इस प्रक्रिया का कारण पूछा तो उसने बहुत मासूमियत भरा जवाब दिया कि वो मेरे खिलौने ले लेता है,उसके लिए नए अच्छे खिलौने आते हैं और पापा भी उसी को ज्यादा प्यार करते हैं, मुझे वो अच्छा नहीं लगता है । समर्थ की इस बात ने मम्मी को झकझोर कर रख दिया। 
 
मनोचिकित्सक कहते हैं कि क्लास रूम में किसी दूसरे बच्चे के पास अच्छा स्कूल बैग और लंच बॉक्स देखकर, किसी सब्जेक्ट में अपने फ्रेंड के अच्छे नंबर आते हुए देखकर या फिर अपने छोटे भाई बहन के प्रति पेरेंट्स का प्यार देखकर बच्चों में अक्सर ईर्ष्या का भाव उत्पन्न हो जाता है जो कि बच्चों के लिए बहुत ज्यादा घातक है। ये बच्चों में अच्छी भावनाओं को पनपने नहीं देता है। अगर बचपन से ही बच्चों के मन में बढ़ती ईर्ष्या भावना को नियंत्रित न किया जाए तो आगे चलकर पैरेंट्स को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। 
 
 
बच्चों में ईर्ष्या के प्रकार 
 
मटेरियल जेलेसी
 
मटेरियल ईर्ष्या यानि मतलब भौतिक चीज़ों को लेकर होने वाली ईर्ष्या। किसी वस्तु के प्रति आकर्षण होने पर वो वस्तु जिसके पास है उससे ईर्ष्या करना। अक्सर ऐसा देखा गया है कि क्लास में किसी दूसरे बच्चे के पास अच्छा पेंसिल बॉक्स देखकर बच्चे दूसरे बच्चे से जलन की भावना रखने लगते हैं। 
 
 
शैक्षणिक या कौशल ईर्ष्या
अक्सर देखा गया है कि बच्चों में अपने किसी सहपाठी के अच्छे नंबर आने पर या फिर उसके किसी और एक्टिविटी में आगे निकलने पर ईर्ष्या उत्पन्न होती है। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चों को टाइम -टाइम पर मोटीवेट करते रहें, जिससे उनके अंदर हीनभावना से उत्पन्न होने वाली ईर्ष्या जन्म न ले सके। 
 
सोशल  जेलेसी
बच्चे जैसे -जैसे  बड़े होने लगते हैं उनके अंदर सामजिक ईर्ष्या उत्पन्न होने लगती है ये ईर्ष्या बच्चों में अपने बेस्ट फ्रेंड या फिर गर्लफ्रेंड , बॉयफ्रेंड को लेकर होती है। हो सकता है कि उसकी गर्लफ्रेंड किसी और को पसंद करती है तो बच्चा उस दूसरे बच्चे से नफरत करने लगता है, जिसे उसकी गर्लफ्रेंड पसंद करती है। 
 
सिबलिंग जेलेसी
यह ईर्ष्या बच्चे में उसके भाई या बहन के जन्म के साथ ही उत्पन्न हो जाती है। बच्चे को ऐसा लगने लगता है कि उसके पेरेंट्स का प्यार उसके प्रति कम हो गया है और उसकी चीज़ों पर उसका हक़ नहीं रह गया है। ऐसी स्थिति में बच्चा अपने ही छोटे भाई या बहन से ईर्ष्या करने लगता है और उसे आघात पहुंचाने में लग जाता है।  
 
 
 
ईर्ष्या भावना के परिणाम 
 
  • पेरेंट्स या अपने भाई-बहन से अलगाव
  • लाचारी या बेचारेपन की भावना
  • आत्मसम्मान कम होना 
  • अन्य बच्चों के प्रति आक्रामक व्यवहार 
  • दूसरे बच्चों को डराना 
 
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