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आखिर वक्त से पहले क्यों बड़े हो रहे हैं बच्चें?

यशोधरा वीरोदय

26th August 2019

आप चाहें जितने भी समझदार हो जाएं पर बचपन की मासूमियत से कीमती कोई चीज इस दुनिया में नहीं हैं, पर अफसोस कि आजकल के बच्चों में वो पहले जैसी मासूमियत नहीं रही।

आखिर वक्त से पहले क्यों बड़े हो रहे हैं बच्चें?
झूठ बोलते थे फिर भी कितने सच्चे थे हम... ये उन दिनों की बात हैं, जब बच्चे थे हम… जी हां, किसी ने क्या खूब कहा है बच्चों की मासूमियत पर। आप चाहें जितने भी समझदार हो जाएं पर बचपन की मासूमियत से कीमती कोई चीज इस दुनिया में नहीं हैं, पर अफसोस कि आजकल के बच्चों में वो पहले जैसी मासूमियत नहीं रही। आज बच्चे समय से पहले ही बड़े हो रहे हैं, समय से पहले ही उनमें चीजों को लेकर अत्यधिक संवेदनशीलता देखने को मिल रही है, जो कि सही नहीं है और इसके लिए काफी हद तक पैरेंट्स और आजकल की जीवनशैली जिम्मेदार है। आज हम कुछ ऐसी ही वजहों पर बात कर रहे हैं जिसके कारण समय से पहले बच्चों के बचपना खत्म हो रहा है। जैसे कि...
पारिवारिक परिवेश

 

जी हां, बच्चों की मासूमियत खत्म होने की सबसे पहली वजह है आज का पारीवारिक माहौल। पहले जहां संयुक्त परिवार हुआ करते थें, घर में मां-बाप के अलाव दादा-दादी, बुआ, चाचा और दूसरे परिजन हुआ करते थें, आज के एकाकी परिवार में बच्चों को सिर्फ मां-बाप की छत्रछाया मिल पाती हैं। ऐसे में भी बहुत से परिवार ऐसे हैं जहां पति-पत्नी दोनो वर्किंग होते हैं और फिर बच्चों का अधिकांश समय अकेले ही बितता है। जिसके चलते उनमें एकाकीपन और उदासीनता घर कर जाती है।
इंटरनेट और मोबाइल का बढ़ता प्रभाव

जी हां, अगर बच्चों के बदलते व्यवहार की बात करें तो इसका सबसे प्रमुख कारण इंटरनेट और मोबाइल का बढ़ता प्रभाव है। आज छोटे-छोटे बच्चों के हांथों में स्मार्ट फोन पहुंच चुका है,जिसके जरिए वो इंटरनेट के जद़ में आ चुके हैं। इतनी छोटी सी उम्र में इंटरनेट का इस्तेमाल बच्चों के लिए सही नहीं है, क्योंकि इंटरनेट पर हर तरह की चीजें उपलब्ध हैं और बच्चों के पास इतना विवेक नहीं होता कि वो ये समझ सकें उनके लिए क्या सही है और क्या गलत? 

प्रतिस्पर्धा का दौर

दिन पर दिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी बच्चों के मन-मस्तिष्त पर गलत प्रभाव डाल रही है। आजकल बच्चों के करियर के लिए मां-बाप पर भी छोटी सी उम्र से उन पर अधिक दबाव बना रहे हैं। पढ़ाई में बेहतर करने का दबाव बच्चों पर काफी बढ़ चुका है। ऐसे में पढ़ाई का ये दबाव बच्चों से उनकी मासूमियत छिन रहा है।

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