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आखिर क्यों बढ़ते बच्चे रिश्तेदारों से मिलने में कतराते हैं ?

संविदा मिश्रा

26th August 2019

एक समय था जब घर में कोई रिश्तेदार आने वाला होता था तब हमारी ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं होता था। एक दिन के लिए ही सही पढ़ाई के प्रेशर से बच जाएंगे, मम्मी हमारी दिनभर की शैतानियों की शिकायत पापा से नहीं कर पाएंगी। कुछ अच्छा गिफ्ट या फिर मिठाइयां घर पर आएंगी और भी बहुत सी चुलबुली और मासूमियत भरी बातें हमारे मन में हिलोरें खाने लगती थीं।

किसी भी फेस्टिवल का मज़ा तब सबसे ज्यादा आता था जब कोई रिश्तेदार हमारे घर आ जाता था। जैसे रक्षाबंधन में मामा और बुआ का घर आना बहुत अच्छा लगता था, होली दिवाली में दादी और नानी के साथ मिलकर अच्छे पकवान खाते थे और नानू और दादू की कहानियां सुनकर फेस्टिवल का मज़ा चार गुना हो जाता था। वो भी क्या दिन था रिश्तों के मायने थे और उन्हें निभाने की एक कला थी। बच्चों को भी रिश्ते निभाने आते थे और उनका सम्मान करना भी बखूबी आता था। धीरे-धीरे समय बदला और बच्चे भी समय से पहले बड़े होने लगे। अब बच्चों में रिश्तेदारों से मिलने का उत्साह नहीं होता है,किसी फेस्टिवल को मानाने का क्रेज नहीं होता है और रिश्तेदार के घर आने की कोई ख़ुशी नहीं होती है। बच्चे, ख़ासतौर पर किशोरावस्था की तरफ बढ़ते हुए बच्चे जिनके लिए मायने रखता है सिर्फ दोस्तों के साथ मस्ती करना, गैजेट्स के साथ अकेले बैठकर गेम्स खेलना, सोशल साइट्स में डूबे रहना और अपनी ही दुनिया में मस्त रहना। बच्चे किसी रिश्तेदार के आने से खुश होना तो दूर उसके पास आने से भी कतराते हैं। आखिर क्या कारण हैं जिनकी वजह से बढ़ते बच्चे रिश्तेदारों से दूर भागने लगे हैं। आइए जानें -
 
पैरेंट्स की रिश्तेदारों से बढ़ती दूरियां 
आजकल के पैरेंट्स अपने ही जीवन की आपाधापी में इतने उलझे हुए हैं कि उनके पास किसी रिश्तेदार के लिए समय ही नहीं है। यही वजह है कि बच्चे भी रिश्तेदारों से दूरियां बनाने लगे हैं। बच्चे रिश्तों को निभाने की अहमियत ही नहीं समझ पाते हैं। उनके लिए रिश्तेदारों का घर आना उनकी प्राइवेसी में दखलंदाज़ी करना होता है। 
 
बच्चों का स्वभाव
कई बार बढ़ते बच्चों का स्वभाव भी ये बताता है कि वो रिश्तेदारों से मिलना क्यों नहीं पसंद करते हैं। जैस कुछ बच्चे संकोची और शर्मीले स्वाभाव के होते हैं और वो किसी रिश्तेदार से मिलना पसंद नहीं करते हैं।  इसके अलावा कुछ बच्चे मस्तमौला होते हैं जो अपने में ही मस्त रहते हैं वो किसी और रिश्तेदार को अहमियत ही नहीं देते हैं।  
 
मोबाइल और टीवी का नशा 
बच्चे आजकल मोबाइल और टीवी में इस कदर व्यस्त हो गए हैं कि वो रिश्तेदारों क्या अपने पैरेंट्स  तक को अहमियत नहीं देते हैं। उनकी पर्सनल लाइफ में उन्हें किसी की भी दखलंदाज़ी पसंद नहीं आती है।  यही कारण है कि वो रिश्तेदारों से मिलना तक पसंद नहीं करते हैं। 
 
पैरेंट्स का रिश्तेदारों के प्रति नकारात्मक रवैया 
कई बार पैरेंट्स बच्चों के सामने ही  अपने किसी रिश्तेदार की बुराई करते हैं जिससे कि बच्चों के मन में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है  और वो भी उस रिश्तेदार से मिलना पसंद नहीं करते हैं। 
 

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