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रंगों की रंगोली से सजाएं आंगन

राधिका गुप्ता

19th October 2019

भारत में मनाये जाने वाले सभी त्यौहारों में से सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार होता है दिवाली। दिवाली का पर्व भगवान लक्ष्मी के स्वागत में मनाया जाता है और रंगोली उनके स्वागत के लिए मनाई जाती है। रंगोली शब्द संस्कृत के शब्द 'रंगवाली से लिया गया है, जो रंग और आवली (जिसका अर्थ होता है कतार) से मिलकर बना है।

रंगों की रंगोली से सजाएं आंगन

रंगोली क्या है?

अक्सर कहा जाता है कि रंगोली का महत्व धर्म और हमारी आत्मा से जुड़ा है। हिन्दू धर्म में खासकर रंगोली हर अच्छे पर्व और खुशी से जुड़ी होती है। रंगोली हर रंग, शेप और साइज़ में बनाई जाती है और इसके साथ सभी के अंदर एक अलग सा उत्साह आ जाता है। रंगोली किसी फ्लैट सरफेस जैसे लकड़ या ज़मीन पर अलग-अलग प्रकार की चीज़ों जैसे मिट्टी, चावल के पाउडर, फूलों इत्यादि से बनाई जाती है। रंगोली संस्कृत रंगावली से लिया गया है और अन्य आर्ट फॉम्र्स की तरह भी एक बहुत सुंदर आर्ट फॉर्म है। रंगोली की कला भारत की जड़ों में बसी है और यह हमारी संस्कृति का ऐसा हिस्सा है, जिसे सदियों से फॉलो किया जा रहा है। एक तरफ जहां ये घर की सुंदरता में चार-चांद लगती है, वहीं यह बहुत शुभ भी मानी जाती है।

रंगोली के प्रकार

  • कोलम: इसे तमिलनाडु और केरल में बनाया जाता है। कोलम में क्रिसक्रॉस, आड़ी और खड़ी लाइनों को जोड़कर डिज़ाइन बनाए जाते हैं। इसी तरह की रंगोली को चाउ पुराना भी कहा जाता है।
  • अल्पना: इसे मुख्यत: बंगाल में बनाया जाता है। महिलाएं चावल के आटे, सूखी पत्तियों से बनाए रंग आदि से रंगोली बनाती हैं। अरिपन: अरिपन बिहार की प्रसिद्ध रंगोली है, जिसे खासकर मिथिला और इसके आसपास के इलाकों में बनाया जाता है। 
  • अईपन: यह उत्तराखंड के इलाकों की प्रसिद्ध रंगोली आर्ट है। इसे दीवारों और आंगन में डेकोरेशन के लिए बनाया जाता है।
  • झोटी और चिटा: इन्हें ओडि़सा के गांवों में प्रमुखता से बनाया जाता है। इसमें पाउडर का इस्तेमाल नहीं होता। पाउडर के रंगों की जगह इसमें लाइन आर्ट की जाती है जो कि चावल के पेस्ट से होती है।

रंगोली का बदलता समय

रंगोली को बनाने का तरीका समय के साथ-साथ बदलता गया। आज रंगों की ओली, मांडना, फूलों की रंगोली, तैलीय रंगों की रंगोली, प्राकृतिक रंगोली, कृत्रिम सांचों से बनी रंगोली और दीपों की रंगोली है।

रंगोली का महत्व

अक्सर लोग सोचते हैं की रंगोली की महत्वता क्या होती है। तो हम आपको बता दें कि रंगोली हमारी संस्कृति का बहुत बड़ा हिस्सा है। 

रंगोली बहुत ही शुभ मानी जाती है 

हिन्दू धर्म का कोई भी त्यौहार हो, रंगोली उसकी प्लानिंग का हिस्सा होता है। चाहे वे दिवाली के दिन भगवान राम के वन से लौटने की खुशी हो या दुर्गा पूजा, हर त्यौहार को उतनी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। रंगोली को बनाने के बहुत से अवसर होते हैं और इसे बनाने का सबसे बड़ा कारण होता है लोगों में उत्साह बढ़ाना और भगवान की पूजा करना। रंगोली के बिना कोई भी त्यौहार, कोई भी उत्सव बहुत अधूरा सा लगता है।

शुद्धता और सकारात्मकता का प्रतीक

रंगोली का घर पर बहुत अच्छा असर होता है। हर त्यौहार को मनाने के पीछे कोई ना कोई कहानी और कारण होता है, रंगोली इस त्यौहार के उत्साह को बढ़ा देती है और घर में सभी बुराइयों को मिटा कर एक सकारात्मक वातावरण बना देती है।

लोगों को एकजुट करती है

हालांकि कोई भी रंगोली बना सकता है लेकिन घर के बच्चे अक्सर इसे बनाने के लिए एकजुट होते हैं। हर कोई इसे बनाने का बेसब्री से इंतज़ार करता है। यह कुछ ऐसे पल होते हैं, जहां लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं, जो हर त्यौहार को मनाने के पीछे का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है।

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