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संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से रखें अहोई अष्टमी

यशोधरा वीरोदय

19th October 2019

महिलाएं इस दिन अहोई माता यानि कि देवी पार्वती की पूजा अर्चना कर उनसे संतान प्राप्ति और उसके दीर्घायु का वर मांगती हैं।

संतान प्राप्ति के लिए इस विधि से रखें अहोई अष्टमी
सनातन धर्म में मानव कल्याण के लिए कई सारे व्रत अनुष्ठान का प्रावधान रखा गया है, यहां हर त्यौहार किसी ना किसी विशेष प्रयोजन से मनाया जाता है। जैसा कि कार्तिक माह में संतान के कल्याण के लिए अहोई अष्टमी व्रत रख जाता है। इस दिन महिलाएं उत्तम संतान की प्राप्ति और संतान के कल्याण के लिए अहोई माता (पार्वती) की पूजा अर्चना कर व्रत रखती हैं।ये त्यौहार हर वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इस बार ये 21 अक्टूबर यानि कि इस सोमवार को पड़ा रहा है, ऐसे में अगर आप भी संतान प्राप्ति की कामना रखती हैं, तो आप ये व्रत रख सकती हैं। चलिए आपको इस व्रत की पूजा विधि बताते हैं।

पौराणिक मान्यता

जी हां, मान्यता है कि जिन लोगों की संतान नहीं हैं, उनके लिए ये व्रत विशेष कल्याणकारी होता है। अगर संतान गर्भ में ही नष्ट हो जाती हो या जन्म के बाद वो अधिक दिनों तक जीवित नहीं रह पाते हैं तो ऐसे में ये व्रत लाभकारी हो सकता है। महिलाएं इस दिन अहोई माता यानि कि देवी पार्वती की पूजा अर्चना कर उनसे संतान प्राप्ति और उसके दीर्घायु का वर मांगती हैं। 

पूजा विधि

इस दिन सुबह में सूर्योदय से पहले उठें और अहोई माता का ध्यान कर व्रत का संकल्प करें। फिर स्नान ध्यान करके पूरे दिन निर्जला व्रत रखें और शाम को तारें निकलते ही पूजा अर्चना प्रारम्भ करें। इसके लिए पूजा घर की दीवार पर अहोई माता की आकृति गेरू या लाल रंग से बनायें। वहीं पूजा की सामग्री की बात करें तो इसके लिए आप चांदी या सफ़ेद धातु की अहोई,चांदी की मोती की माला , जल से भरा हुआ कलश या करवा, पुष्प, दीप और चढ़ावे के लिए दूध-भात या हलवा रखें।अहोई माता को रोली लगाकर पूष्प और दूध भात अर्पित करें। इसके बाद अपने हाथ में गेंहू के सात दाने और दक्षिणा (बयाना) लेकर अहोई माता की कथा सुनें और फिर कथा के बाद वो चांदी की माला अपने माला अपने गले में पहन लें और उन गेंहू के दाने और दक्षिणा को अपनी सासु मां, जेठानी या किसी बुजुर्ग महिला को  देकर उनका आशीर्वाद लें। अब इसके बाद आप चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करें।

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