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बच्चों को स्ट्रांग बनाना है तो न कहें ये बातें

Samvida Mishra

2nd November 2019

कई बार देखा गया है कि हम अपने बच्चों को ओवर प्रोटेक्ट करते हैं जिसकी वजह से बच्चा बहुत जल्दी निराश होने वाला , किसी काम को ठीक से न करने वाला और सबसे डरकर बैठ जाने वाला बन जाता है। लेकिन यदि बच्चों को स्ट्रांग बनाना है तो उन्हें ओवर प्रोटेक्शन देने की जगह कठिनाइयों का सामना करना सिखाना चाहिए।

बच्चों को स्ट्रांग बनाना है तो न कहें ये बातें
जब तक बच्चे छोटे हैं उनकी हर जरूरत पूरी करना आपकी जिम्मेदारी है, इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें  ही जीवन की सारी चुनौतियां फेस करनी हैं । अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा हर परिस्थिति में खुद को ढाल पाए और स्ट्रांग बनकर कठिनाइयों का सामना करना सीख जाए तो आपको उनसे कुछ बातें कभी नहीं कहनी चाहिए -

यह तो बहुत आसान काम है 

अक्सर हम अपने बच्चे से किसी भी काम के लिए बोलते हैं कि ये तो बहुत आसान काम है और आसानी से किया जा सकता है। ऐसा कहने भर से कठिन काम आसान नहीं होता बल्कि बच्चा उस काम को ज्यादा तबज्जो नहीं देता और सोचता है ये तो आसानी से हो जाएगा। बच्चे से कहें कि ये काम थोड़ा कठिन ज़रूर है लेकिन इसे किसी तरह से किया जा सकता है। बच्चे की उस काम में मदद ज़रूर करें। 

 कुछ नहीं हुआ थोड़ी सी चोट है 

कई बार जब बच्चा गिर जाता है तो हम उससे बोलते हैं कि कुछ नहीं हुआ बस थोड़ी सी चोट लगी है। हमें ऐसा लगता है कि इससे बच्चा स्ट्रांग बन जाएगा लेकिन इसके विपरीत बच्चे को ऐसा सुनकर खराब लगता है और उसके मन में डर बैठने लगता है। बच्चे को जब कभी चोट लगे तो ऐसा कहने की बजाय उससे पूछें कि वो कैसा फील कर रहा है। 

ऐसा करने से चोट लग जाएगी

शैतानी करना बच्चों की आदत होती है। जब बच्चे कोई शैतानी करते हैं तब पैरेंट्स उनसे बोलने लगते हैं कि ऐसा करने से चोट लग जाएगी। ऐसा सुनकर बच्चा कोई रिस्क नहीं लेना चाहता और असुरक्षित महसूस करने लगता है। बच्चा यदि कभी कुछ करना चाहता है जैसे पार्क में स्लाइड करना चाहता है तो उसे   करने दें इसके साथ ही उसके प्रोटेक्शन के लिए वहीं खड़े रहें।

ये काम मैं कर देती हूं

बच्चों  को किसी कठिन काम में उलझा हुआ  देखकर पैरेंट्स उस काम को खुद ही करने लगते हैं जिससे बच्चा कभी भी कठिन काम नहीं करना चाहता है और उसे लगने लगता है कि ये काम उसके पैरेंट्स ही करेंगे। जब बच्चा किसी कठिन काम में उलझा हो तब उसे सपोर्ट करें लेकिन उस काम को स्वयं न करें जिससे बच्चे में काम करने की भावना जन्म ले सके। 

बच्चों के सामने हार न मानें 

कोई काम नहीं हो पाएगा, यदि ऐसा  सोचकर क्या आप बहुत जल्दी हार मानकर बैठ जाते हैं तो अपनी ये आदत बदल लें।  क्योंकि बच्चा जो पैरेंट्स को करते हुए देखता है वही वो भी करता है। पैरेंट्स का ये रवैया देखकर बच्चा भी बहुत जल्दी किसी काम में हार मान लेगा और स्ट्रांग नहीं बन पाएगा।  

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