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बच्चों को करना है इम्प्रेस तो ऐसे जाएं पैरेंट्स टीचर मीटिंग में

संविदा मिश्रा

9th November 2019

माता-पिता और बच्चों का रिश्ता सबसे करीबी रिश्तों में से एक होता है। अगर हम पुराने समय और आज के समय की तुलना करें तो आज माता-पिता और बच्चों का रिश्ता काफी बदल गया है। पुराने समय में माता-पिता की बात बच्चे सुनते थे और मानते भी थे। जबकि, आज के समय में माता-पिता अपने बच्चे की बात सुनते और मानते हैं।

बच्चों को करना है इम्प्रेस तो ऐसे जाएं पैरेंट्स टीचर मीटिंग में
मम्मा शौर्य की मम्मा तुमसे ज्यादा स्मार्ट है , पैरेंट्स  टीचर्स मीटिंग में वो कपड़े  भी कितने अच्छे पहनकर आती  है और हमेशा इंग्लिश में ही  बात करती है। मैं अपनी मम्मी बदल लूंगा , अपने 5 साल के बेटे के मुंह  से ये बात सुनकर मेरा मन गहन सोच में पड़  गया ।  मुझे अपने बचपन का समय याद आ गया जब मेरी मां मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला लगती थी और अपने स्कूल की पैरेंट्स टीचर्स मीटिंग में उनको ले जाना मेरे लिए गर्व की बात होती थी। इसकी वजह उनकी खूबसूरती नहीं बल्कि हमारे संस्कार होते थे। लेकिन आजकल जैसे -जैसे देश प्रगति कर रहा है बड़ों के साथ बच्चों की सोच भी बदलने लगी है। बच्चों के अंदर अपने लिए ही नहीं बल्कि पैरेंट्स के लिए भी प्रतिस्पर्धा की भावना होती है। उन्हें लगता है कि उनके पैरेंट्स में हर वो गुण होने चाहिए जो दूसरे  बच्चों के पैरेंट्स में होते हैं।  
खासतौर पर जब बात आती है पैरेंट्स टीचर्स मीटिंग की तो हर बच्चा अपने पैरेंट्स की दूसरे पैरेंट्स से तुलना ज़रूर करता है। आजकल के बच्चों का देखने , सोचने और समझने का नजरिया बदल गया है जिसकी वजह से यदि पैरेंट्स अच्छी तरह से ड्रेस्ड अप न हों या फिर उनकी भाषा में अंग्रेजी शामिल न हो तो बच्चों को उन्हें मीटिंग में ले जाना अपनी तौहीन लगती है।
  • बच्चे भले ही दूसरे पैरेंट्स से बात न करते हों लेकिन उनके बात करने के ढंग को बहुत बारीकी से देखते हैं और अपने माता-पिता से यही उम्मीद करते हैं कि वो भी वैसे ही बात करें।
  • बच्चे पैरेंट्स  टीचर मीटिंग से पहले अक्सर अपनी मम्मी से बोलते हैं कि उनकी मम्मी कैसे  कपड़े  पहने।  जैसे कि आजकल के बच्चों को अपनी मम्मी पर वेस्टर्न ड्रेसेस ज्यादा पसंद आती हैं।
  • यहां तक कि मम्मी का हेयर स्टाइल भी बच्चे नोटिस करते हैं और कोई पसंदीदा स्टाइल बनाने को बोलते हैं।
  • इसके अलावा वो मम्मी -पापा से ये भी बोलते हैं कि वो टीचर से उनके बारे में ज्यादा बात करने की जगह उनकी बातें सुने और हो सके तो इंग्लिश में ही बात करें क्योंकि हिंदी में बात करने से उनका इम्प्रेशन  खराब पड़ता है।
  • तो आपको भी बनाना है बच्चे के सामने अच्छा इम्प्रेशन तो जब भी पैरेंट्स टीचर्स मीटिंग में जाएं बच्चों की पसंद के अनुसार ही जाएं ।

 

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