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शादी की 9 रस्में, जो इंडियन वेडिंग को बनाती हैं खास

यशोधरा वीरोदय

12th November 2019

भारतीय समाज में शादी सिर्फ एक जन्म का साथ भर नहीं बल्कि सात जन्मों का बंधन होता है और इस सात जन्मों के बंधन को मजबूत बनाते हैं हमारी रस्में और रीति रिवाज।

शादी की 9 रस्में, जो इंडियन वेडिंग को बनाती हैं खास
देश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शादी-विवाह का आयोजन अलग-अलग तरीके से किया जाता है, पर जो जश्न इंडियन वेडिंग में देखने को मिलता है, वो शायद ही कहीं और देखने को मिलता है। दरअसल, भारतीय संस्कृति में परम्पराओं और रीति रिवाजों का खास महत्व है, यहां जीवन के हर छो़टे-बड़े पल का उत्सव मनाने के लिए कुछ खास रिवाज बनाए गए हैं और चूंकि शादी तो हमारी संस्कृति में जीवन का सबसे बड़ा उत्सव माना गया है। ऐसे में इसे जुड़े रस्म भी बेहद खास और रोचक होते हैं। मेंहदी, हल्दी, सेहरा बांधी, द्वार पूजा और जूता चुराई जैसी तमाम रस्मों से भारतीय शादी का उत्साह और आकर्षण देखते ही बनता है। चलिए एक नजर डालते हैं शादी की ऐसी ही कुछ अहम रस्मों पर...

मेंहदी 

हमारे यहां मेहंदी सुहाग की निशानी मानी जाती है, ऐसे में शादी की रस्मों की शुरूआत दुल्हन को मेंहदी लगा कर की जाती है। माना जाता है कि मेंहदी का रंग जितना गाढ़ा चढ़ता है, दुल्हन को अपने भावी पति से उतना ही अधिक प्यार मिलता है। मेहंदी की ये रस्म भी उत्सव के तौर पर मनती है, जिसमें नाते रिश्तेदार और दुल्हन की सहेलियां शामिल होती हैं और दुल्हन के साथ ही सभी महिलाएं मेहंदी लगवाती हैं। इस तरह से ये कार्यक्रम गीत-संगीत के साथ हर्षोल्लास से सम्पन्न होता है।

हल्दी 

हिंदू धर्म में हल्दी बेहद शुभ मानी जाती है, जिसका इस्तेमाल सभी पूजा कार्यक्रमों में किया जाता है। ऐसे में शादी में भी दुल्हा-दुल्हन को हल्दी सगुन के तौर पर लगाई जाती है। शादी से एक दिन पहले या शादी के दिन सुबह में हल्दी की रस्म होती है, जिसमें महिलाओं समेत घर के सभी सदस्यों की मौजूदगी में हल्दी पूजन होता है और फिर उसके बाद हल्दी और तेल का मिश्रण दुल्हा-दुल्हन को लगाया जाता है। इसके साथ ही इस रस्म में नाच-गाना और ढ़ेर सारी मस्ती भी होती है। 

चूड़ा सेरेमनी

पंजाबी शादियों में चूड़ा सेरेमनी का जश्न भी देखने लायक होता है, जिसमें दुल्हन के हाथों में सुहाग के निशानी के तौर पर चूड़ा पहनाया जाता है। ये रस्म शादी की सुबह दुल्‍हन के घर पर ही होती है, जब दुल्‍हन के मामा उसके लिए चूड़ा ले कर आते हैं जिसमें लाल और सफेद रंग की 21 चूडियां शामिल होती हैं। इस चूड़े को एक रात पहले दूध में भिगोकर रखा जाता है और फिर उससे निकाल कर इन चूड़ों को घर के सभी बड़े अपना आर्शीवाद देते हैं, जिसके बाद ये चूड़ा दुल्हन के हांथो में में पहनाया जाता है। वहीं चूड़े में दुल्हन की सहेलियां कलीरें भी बांधती हैं, जिसे वो अपनी सहेलियों और बहने के सिर पर झिटकती है और जिसके सिर पर कलीरा गिरता है, माना जाता है घर में शादी का अगला नम्बर उसी का होता है।

सेहरा बांधी

भारतीय शादी में सेहरा बांधी भी एक महत्वपूर्ण रस्म होती है, जिसमें बारात निकलने से पहले दूल्हे की बहनें और जीजा जी दूल्हे के सिर पर सेहरा बांधती हैं और उसे भावी वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हैं। 

द्वार पूजा

विवाह कार्यक्रम में द्वार पूजा का भी विशेष मह्तव होता है, जब बारात के साथ पहुंचे दूल्हा का स्वागत सत्कार किया जाता है। दुल्हन की मां दूल्हें का तिलक लगाकर आरती करती हैं और फिर दूल्हे पर फूल-अक्षत न्यौछावर कर उसे शादी के मंडप तक लाया जाता है। 

जूता चुराई

चूंकि हमारे समाज में शादी सिर्फ दो लोगों के बीच का बंधन नहीं बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है, ऐसे में शादी में ऐसी कई सारी रस्में होती हैं, जो कि दूल्हा-दुल्हन को उनके ससुराल के परिजनों से जोड़ती हैं। दूल्हे और उसकी सालियों के बीच का रिश्ता भी जूता चुराई की नोकझोक भरी रस्म से शुरू होता है। जब दूल्हा विवाह कार्यक्रम के लिए अपने जूते उतार कर मंडप में बैठता है, तभी सालियां उसके जूते को छिपा देती हैं और फिर उसे वापस करने के लिए मन-मांगी नेग पाती हैं। ऐसे में ये रस्म बेहद ही रोचक और मजेदार बन जाती है। 

विदाई

विदाई शादी की सबसे भावुक रस्म होती है, जब दुल्हन को अपना वो घर छोड़ना होता है, जिसमें वो जन्मी और पली-बढ़ी है। ऐसे में ये पल दुल्हन के साथ ही उसके परिजनों के लिए बेहद कठिन और भावुक होता है। दुल्हन एक-एक कर अपने सभी परिजनों से विदा लेती है और जाते वक्त अक्षत के रूप में अपने मायके को सुख-समृद्धी का आशीष दे विदा लेती है।

गृहप्रवेश

विदाई के बाद सुसराल में गृहप्रवेश के साथ ही दुल्हन एक नए जीवन में प्रवेश करती है। ऐसे में गृहप्रवेश की रस्म भी बेहद महत्पूर्ण होती है, जिसमें घर की सभी महिलाएं नई दुल्हन गृहलक्ष्मी का स्वागत करती हैं। घर के द्वार पर चावल वाले कलश को ठोकर मार दुल्हन घर में प्रवेश करती है और फिर आलता लगे पैरों से वो घर में अपने पहले कदम रखती है। इस तरह से गृहप्रवेश की ये रस्म घर में लक्ष्मी और धन-धान्य के आगमन का सूचक माना जाता है। 

अंगूठी ढूंढने की रस्म

शादी की अतिव्यस्तता के बाद आखिर में दुल्हा-दुल्हन के बीच अंगूठी ढूंढने की रोचक रस्म होती है, जिसमें एक बड़े से थाल में दूध और गुलाब की पुंखुड़ियों के बीच दोनो को एक अंगूठी ढ़ूढ़नी होती है। माना जाता है कि वो अंगूठी जो पहले ढ़ूंढ़ लेता है, दाम्पत्य जीवन में उसकी ही चलती है। ऐसे में इस रस्म में काफी हंसी ठिठोली होती है और इसी हंसी-खुशी के साथ दुल्हा-दुल्हन अपने नए जीवन की शुरूआत करते हैं। 

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