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सुहाने सपने

ब्रजेन्द्र सिंह

12th November 2019

'सर' उद्योगपति रमेश की पीए रीटा ने इंटरकॉम पर कहा, 'ताज़ी खबर न्यूज़ चैनल के मालिक सेठ रोशनलाल आप से बात करना चाहते हैं।' 'करवा दो बात' रमेश ने कहा। 'नमस्कार सर!' रोशन लाल की आवाज़ फोन पर आई। 'आपको बहुत-बहुत मुबारक।' रोशन लाल बात को आगे बढ़ाया 'सरकार ने आप को देश का सबसे बड़ा उद्योगपति घोषित किया है। फाइनेंस मिनिस्ट्री में मेरे एक जान-पहचान के व्यक्ति ने मुझे अभी-अभी बताया है।'

'धन्यवाद। यह आपने बहुत अच्छी खबर सुनाई है।' रमेश बोले। 'यह आप के लिए कोई नई बात तो नहीं है सर। सारी दुनिया जानती है कि आप हमारे देश
के सवश्रेष्ठ बिजनेसमैन हैं।' 
'शायद हूं।' रमेश ने माना। 'तो क्या आपने बस यही खबर देने के लिए फोन किया?'
'वैसे तो हां।' रोशनलाल जवाब में बोला। 'पर आपसे एक विनती है। यह खबर जल्दी ही फैल जाएगी। आप कृपा करके हमारे चैनल को सबसे पहला इंटरव्यू दीजिए।'
'माफ करना, पर मैं यह वायदा आपको नहीं कर सकता हूं, सेठजी। इतनी बड़ी खबर के बाद तो मुझे प्रेस कॉन्फ्रेंस ही बुलानी पड़ेगी। फोन करने के लिए एक बार फिर मैं आपको धन्यवाद देता हूं। गुड डे।'
फोन रखने के बाद रमेश ने कुछ देर सोचा, फिर इंटरकॉम का बटन दबाया।
'रीटा!' 'जी सर।' 'पिछले महीने जब मैं एक विशिष्ट प्राइवेट जेट श्वलेन खरीदने की सोच रहा था तो तुमने उसका दाम पता किया था। वह कितने करोड़ रुपये का था?'
'दो सौ करोड़ का, सर।'
'दो सौ?' रमेश ने पूछा। 'हां, दो सौ रुपये किलो।' उसकी पत्नी दुर्गा ने जवाब दिया। 'मैं सोच रही थी कि तुम फिर अपने सपनों की दुनिया में खो गए थे, पर अब
लगता है कि तुम मेरी बात सुन रहे थे। हां, जामुन का दाम दो सौ रुपये प्रति किलो हो गया है और वह भी इस अगस्त के महीने में। हे भगवान, इस कमर तोड़ महंगाई से कब छुटकारा मिलेगा।'
रमेश कुछ नहीं बोला। समझ में आ गया कि जो सोच रहा था, वह सपना ही था और जो सामने है, सच वही है, वह भी कड़वा कसैला! खैर, मरता क्या न करता, झेलो सच्चाई को। चुपचाप आटा, चावल, दाल और सब्जी से भरे थैलों को उठा कर अपनी पत्नी के पीछे-पीछे चलने लगा। घर पहुंच कर दुर्गा अपनी सहेलियों से गपशप करने लगी। हमेशा की तरह रमेश ने पहले खरीदा हुआ सामान समेट कर उचित स्थानों पर रखा। फिर दुर्गा के लिए चाय बनाई। दुर्गा के सामने उसका ह्रश्वयाला रख कर, रमेश ने
खुद की चाय पी। रात के खाने की उसे कोई चिंता नहीं थी, क्योंकि उनकी बाई रामकली दुर्गा से पूछ कर, उसकी मनमर्जी के मुताबिक खाना बनाती थी। अगला दिन सोमवार था। हमेशा की तरह रमेश जल्दी उठा और उसने चाय बनाई। चाय
बनाते समय वह सोच रहा था, 'अच्छा ही है कि हम दोनों पति-पत्नी अभी वेले से अकेले हैं। हमारे बच्चे नहीं हैं, वरना मुझे ही उनका नाश्ता और दोपहर का टिफिन भी बनाना पड़ता।'
दुर्गा को उसकी चाय दे कर, रमेश ने अपना नाश्ता बनाया और फिर उस सबसे फारिग होकर काम पर जाने के लिए निकल पड़ा। दुर्गा का नाश्ता रामकली नौ बजे आ कर बनाती थी। रमेश कई दफे सोचता था, 'काश! सोमवारका दिन ना होता।' उसका कारण था कि हर सोमवार को सुबह-सुबह दफ्तर में सारे अधिकारियों की मीटिंग होती थी। मीटिंग में गुज़रे हुए हफ्ते के बारे में बॉस अपनी राय देता था। आमतौर पर रमेश को डांट ही पड़ती थी, जिसे वह एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकालने में अब माहिर हो गया था।
बॉस ने मीटिंग शुरू की। 'सबसे पहले मैं आप सब को चेतावनी देना चाहता हूं। आप जानते हैं कि परसों हमारे शहर में श्रीलंका के खिलाफ वन डे क्रिकेट मैच खेला जाएगा। परसों ना तो किसी की मां बीमार होनी चाहिए, ना तो किसी के दादा का देहांत। मैं सौ फीसदी लोगों को दफ्तर में देखना चाहता हूं। कोई बहाना नहीं चलेगा। अपने नीचे काम करने वालों को...।'
स्टेडियम खचा खच भरा था। शोर इतना हो रहा था कि पास खड़े होकर भी, मैदान में खड़े खिलाड़ी, एक दूसरे को मुश्किल से सुन पा रहे थे। श्रीलंका न संगारक्का के शतक की मदद से 310 रन बनाए थे, जो वन डे क्रिकेट के लिए अच्छा स्कोर था। भारत की शुरुआत शानदार रही, पर उसके बाद मलिंगा की बिजली जैसे गेंदों के सामने भारतीय बल्लेबाजों ने एक-एक कर के हथियार डाल दिए। 
मैच का अंतिम ओवर था। 20 रन चाहिए थे, जीत के लिए। अब देश की इज्जत कह्रश्वतान रमेश के हाथों में थी। मलिंगा ने पहला बॉल फेंका, इतनी तेज़ थी कि सचिन को भी डरा देता। रमेश ने बल्ला घुमाया- छक्का। दूसरा बॉल पहले से भी ज्यादा डरावना था।
शायद ब्रेडमैन भी उसके सामने झिझकता। रमेश ने फिर बल्ला घुमाया- चौका। तीसरा बॉल बाउंसर था। रमेश को एक तरफ हटना पड़ा। बॉल उसके कंधे के पास से गुजर कर विकेट कीपर के हाथों में पहुंची। चौथे बॉल को रमेश ने मारा, पर सिली मिड ऑन के फील्डर ने डाइव मार कर उसे किसी तरह रोक लिया। कोई रन लेने का मौका ही नहीं मिला। अब बचे थे, दो बॉल, जिन में 10 रन बनाने की जरूरत थी। पूरे स्टेडियम में सन्नाटा छा गया। मलिंगा का पांचवां बॉल हवा में लट्टू की तरह घूमते हुए आया।
रमेश ने उसे पहले और दूसरे स्लिप के बीच में काटा- चार रन। मलिंगा खेल का आखिरी गेंद फेंकने दौड़ा। दर्शकों के दिल की धड़कनों की रफ्तार आसमान को छूने लगी।
रमेश ने उसे उठा कर बाउंड्री की ओर मारा 'सिक्स' उसके मुख से निकला।
'हां रमेश, छह बजे।' उसके बॉस ने कहा। 'आज शाम को तुम दफ्तर की कार ले कर एयरपोर्ट जाना। कंपनी के मालिक का बेटा मुंबई से छह बजे की फ्लाइट से आ रहा है। उसे कंपनी के गेस्ट हाउस में पहुंचा देना। याद रखना कि कुछ सालों बाद, उसके पिता कंपनी उसके हाथ सौंपने जा रहे हैं। कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए।'
अपने चेहरे पर उड़ती हवाइयों को कंट्रोल करते हुए रमेश ने होशो-हवास दुरुस्त किए। सपनो से पटखनी खाए दिमाग को सहलाते हुए बॉस को पटाने की कोशिश की।
'मुझ पर भरोसा रखिए, सर।' रमेश ने जवाब दिया। 'सब ठीक-ठाक होगा।' 
अगले इतवार सुबह नाश्ता करने के बाद रमेश और दुर्गा बैठे थे। रमेश अखबार पढ़ रहा था, दुर्गा टीवी देख रही थी। अखबार में लिखा था कि अगले महीने उनके शहर में म्यूनिसिपल इलेक्शन होने वाला है...
'भाइयो और बहनो' रमेश ने अपना भाषण शुरू किया, 'मैं आपके सामने नेता के रूप में नहीं आया हूं, यथार्थ में मैं आप का दोस्त हूं। आप लोगों ने पिछले 20 सालों में हर बार मुझे चुना है। बदले में मैंने आपको 24 घंटे बिजली और पानी की सह्रश्वलाई दिलवाई है। आज मैं फिर आपके सामने खड़ा हूं। मुझे अपना सच्चा दोस्त और काबिल साथी समझ कर फिर जीत का अमृत पिलाइए और जो मेरे खिलाफ खड़े हैं, उनकी नाक मिट्टी में मल दीजिए, ताकि उन सबको अपनेे सिक्योरिटी डिपोजिट तक से हाथ धोना पड़े।'
'हां' दुर्गा ने कहा, 'टीवी में डॉक्टर कह रहे हैं कि फ्लू इतना फैल गया है कि अब भी जब बाजार से घर आएं तो हाथ अच्छी तरह से धोएं।'
अब रमेश क्या बताए कि धूल तो उसके सपने गए हैं। रमेश चुप रहा और एक बार फिर अखबार पढऩे लगा। तीन पृष्ठ बाद उसने पढ़ा कि भारत के वैज्ञानिक एक नया कमाल करने वाले हैं और कुछ महीने बाद वह मंगल ग्रह की सैर को एक सैटेलाइट भेजने वाले हैं....
टेलीफोन की घंटी बजी। रमेश ने फोन उठाया। 'मिस्टर रमेश?'
'हां जी। बोल रहा हूं।'
'सर, मैं प्रधानमंत्री के ऑफिस से बोल रहा हूं। प्रधानमंत्री जी आप से बात करना चाहते हैं।'
'तो फोन मिला दीजिए।'
'मिस्टर रमेश, नमस्कार।'
'नमस्कार सर।'
'मैंने आपको इसलिए फोन किया, क्योंकि हम एक आदमी को मंगल ग्रह पर भेजना चाहते हैं। यह बहुत ही मुश्किल और भयानक सफर है, पर यदि यह सफल होगा तो हम दुनिया के पहले देश होंगे, जिसने मंगल पर एक आदमी को भेजा है। मैंने जितने भी लोगों से बात की है, सबने कहा कि यह काम सिर्फ आप जैसा बहादुर और साहसी इंसान कर सकता है। क्या आप राजी हैं?'
'मैं देश के लिए जान की बाजी दाव पर लगाने के लिए तैयार हूं, सर।'
'जान तो तुम्हारी मैं लेती हूं। जब देखो झक्की आदमी की तरह गह्रश्वपो और ख्याली पुलाव बनाने में डूबे रहते हो। उठो और जाकर एक कप चाय बना कर लाओ।' दुर्गा चिंघाड़ते हुए बोली। मंगल ग्रह का तो पता नहीं, पर फिलहाल किचेन से दुर्गा के लिए चाय बनाकर लाने में किचेन की तरफ बढ़ते रमेश ने सोचा।

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