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जहां दर्शन के लिए पुरुषों को करने होते हैं सोलह श्रृंगार

Samvida Mishra

27th November 2019

भारत में मंदिरों का अपना एक अलग ही इतिहास है। विभिन्न मान्यताओं को अपने आप में समेटे हुए कुछ मंदिर ऐसे हैं जिसमें पति- पत्नी जोड़े में ही दर्शन के लिए जा सकते हैं, तो कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जहां महिलाएं मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकती हैं। वहीं अगर बात की जाए ऐसे मंदिर की जिसमें पुरुष सोलह श्रृंगार करके दर्शन के लिए जाते हैं तो आप क्या कहेंगे।

 जहां दर्शन के लिए पुरुषों को करने होते हैं सोलह श्रृंगार
आपने अक्सर महिलाओं को देखा होगा कि वो पूर्ण श्रृंगार करके यानि कि सोलह श्रृंगार करके ही मंदिर जाती हैं।  खासतौर पर सुहागिनों को हमेशा मंदिर परिसर में पूर्ण श्रृंगार करके ही प्रवेश करने की सलाह दी जाती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पुरुष भी सोलह श्रृंगार करके ही प्रवेश करते हैं।  

क्या है मान्यता 

केरल के कोट्टनकुलंगरा में एक ऐसा मंदिर है जहां पुरुष पूजा करने के लिए महिलाओं की तरह सजते-संवरते हैं। कोट्टनकुलंगारा देवी मंदिर में यह पंरपरा कई सालों से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में देवी की मूर्ति अपने आप ही  प्रकट हुई थी। यह केरल का इकलौता मंदिर है, जिसके गर्भगृह के ऊपर छत या कलश नहीं है। इस मंदिर में  सोलह श्रृंगार करने के बाद पुरुष अच्छी नौकरी, हेल्थ, लाइफ पार्टनर और अपनी फैमिली की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। 

मंदिर में मेकअप रूम है

कोल्लम जिले के कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में हर साल 23 और 24 मार्च को मंदिर में हर साल ‘चाम्‍याविलक्‍कू पर्व' का विशेष आयोजन किया जाता है। इस अनूठे फेस्टिवल में पुरुष  महिलाओं की तरह साड़ी पहनते हैं और पूरा श्रृंगार करने के बाद मां भाग्यवती की पूजा करते हैं।  वैसे तो पुरुष बाहर से ही 16 श्रृंगार करके आते हैं। लेकिन यदि कोई दूसरे शहर से आया है। या बाहर से मेकअप करके नहीं आया है तो उसके लिए मंदिर में ही व्‍यवस्‍था की गई है।
मंदिर परिसर में ही मेकअप रूम है। जहां पुरुष 16 श्रृंगार कर सकते हैं। इसमें लड़के की मां, पत्नी, बहन भी मदद करती हैं। माना जाता है कि यहां आराधना करने से मन की सभी मुरादें पूरी होती हैं खासतौर पर अच्छी नौकरी की मुराद। इसलिए काफी संख्या में पुरुष यहां महिलाओं के वेश में पहुंचते हैं। साथ ही मां की आराधना करके उनसे मनवांछित नौकरी और जीवनसाथी  का आर्शीवाद प्राप्‍त करते हैं।

प्रचलित कथा

इस मंदिर की प्रचलित कथा के अनुसार वर्षों पहले कुछ चरवाहों ने मंदिर के स्‍थान पर ही महिलाओं की तरह कपड़े पहनकर पत्‍थर पर फूल चढ़ाए थे। इसके बाद पत्‍थर से शक्ति का उद्गम हुआ। धीरे-धीरे आस्‍था बढ़ती ही चली गई और इस जगह को मंदिर में परिवर्तित कर दिया गया। 

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