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क्या डॉ प्रियंका रेड्डी को इंसाफ मिल पायेगा?

यशोधरा वीरोदय

2nd December 2019

सामाजिक सरोकारों से जुड़े, चिंतक, स्तंभकार डॉ. सुनील जैन संचय हैदराबाद में डॉ प्रियंका रेड्डी के साथ मानवता को झकझोरने वाली घटना के संदर्भ में बता रहे हैं कि शर्मसार हो जाइए, क्योंकि अब आपके पास कोई चारा ही नहीं बचा है, सिवाए शर्मिंदगी के. हर आधे घंटे में एक 'बच्ची' का बलात्कार हो रहा है और हर घंटे इंसानियत शर्मसार.दिल्ली के निर्भया कांड के बाद लगा था कि अब देश जाग गया है लेकिन नहीं, यह एक भ्रम था। हैदराबाद में देश की बेटी डॉ प्रियंका रेड्डी के साथ जो दिल दहलाने वाली घटना घटी वह हमारे सभ्य समाज को कटघरे में खड़ा कर रही है। क्या हमारा समाज संवेदनहीन होता जा रहा है?

क्या डॉ प्रियंका रेड्डी को इंसाफ मिल पायेगा?
मर गई इंसानियत मगर इंसान जिंदा है।
जिस्म को नोच खाने वाला वो शैतान जिंदा है।।
रोज एक द्रोपदी की लुटती है आबरू।
आज भी कहीं न कहीं वो दुशासन जिंदा है।।

हमारे देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है लेकिन आज उसी देवी की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़, हत्या और बलात्कार जैसी आमानवीय घटनाएं होती रहती है। सिर्फ महिलाएं ही नहीं अब छोटी बच्चियां भी महफूज नही है उनके साथ भी हैवानियत का सिलसिला शुरू हो चुका है। सरकारें भी महिला और बच्चियों की सुरक्षा के लिए तमाम तरह के वादे करती आई है बावजूद इसके महिलाओें और बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों में कमी होने की जगह बढ़ोतरी ही हुई है। 

भारतीय युवाओं  के नैतिकता को क्या हो गया  है। क्या इसी के बदौलत भारत प्राचीनकाल में विश्व गुरु रह चुका है। आखिर कारण क्या है इस तरह की घटनाओं का।  क्या भारतीय युवा सब तरह के मानसिकता को छोड़ कर सिर्फ कामुक और कुंठित मानसिकता का शिकार हो गया हैं।
 बलात्कार एक राष्ट्रीय कोढ़ जैसी समस्या है, और इस समस्या के कारण देश की महिलाओं, युवतियों, किशोरियों और यहां तक कि तीन-चार वर्ष की बच्चियों के साथ ही पूरे देश को पड़ोसी देशों के साथ ही संयुक्त राष्ट्र संघ में तक शर्मसार होना पड़ा है।
दिल्ली गैंग रेप कांड और इसके बाद जो कुछ भी हुआ है, वह कई मायनों में अभूतपूर्व था। इस नृशंशतम् घटना के बाद कहा जा रहा था कि देश ‘जाग' गया है, 125 करोड़ देशवासी जाग गए हैं, लेकिन सच्चाई इसके कहीं आसपास भी नहीं है। न देश अन्ना के आंदोलन के बाद जागा था, और न ही अब जागा है। हमारी आदत है, हम आधुनिक सुख-सुविधाओं के साथ आराम तलब होते चले जा रहे हैं। हम पहले जागते नहीं, और कभी देर से जाग भी गए, तो वापस जल्दी ही सो भी जाते हैं। यदि जाग गए होते हाल ही में हैदराबाद की डॉ प्रियंका के साथ दिल को दहलाने वाली घटना न घटती।
करोड़ों रुपए की मोमबत्तियां जलाने/गलाने के बाद ही सही, जाग गये होते तो अब देश में कोई बलात्कार न हो रहे होते, जबकि दिल्ली की घटना के बाद तो देश में जैसे बलात्कार के मामलों की (या मामलों  के प्रकाश में आने की) बाढ़ ही आ गई है।
बलात्कार की समस्या को समग्रता से समझें तो मानना होगा हमारी बहुत सी समस्याएं लगती तो शारीरिक हैं, लेकिन होती मानसिक हैं। बलात्कार भी एक तरह से तन से पहले मन की बीमारी है। और इसकी जड़ में समाज के अनेक-शिक्षा, लिंग, सामाजिक-आर्थिक स्तर  जैसे अनेक कारण भी हैं। कानून, पुलिस और न्यायिक व्यवस्था का प्रभाव तो बहुत देर में आता है।
एक आंकलन के अनुसार हमारे देश में केवल चार प्रतिशत बलात्कार के मामले ही अनजान लोगों द्वारा किए जाते हैं तथा 96 प्रतिशत बलात्कार जानने-पहचानने वालों द्वारा किए जाते हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि बलात्कार के साथ ही अवैध संबंध बनाने वालो का क्या मनोविज्ञान है।
ये आंकड़े डराते हैं : नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने पिछले पांच सालों के आकड़े पेश किए हैं जिसके मुताबिक बलात्कार के मामलों में साल 2012 के मुकाबले 2016 में बढ़ोतरी हुई है। साल 2012 में जहां ये बच्चियों के साथ बलात्कार के 8,541 मामले सामने आए थे। 2016 में 19,765 मामले आए ये आंकड़े पहले के मुकाबले दोगुने हो गए हैं। 2017 के आंकड़े हमें डराते हैं, जिसमें रेप के 33658 केस दर्ज हुए। हर घंटे 16 रेप के केस दर्ज हुए।
2012 में 23 साल की निर्भया के साथ मानवता की सारी हदे पार करते हुए बालात्कार की घटना सामने आने के बाद भी ये सिलसिला लगातार जारी है। इस घटने के बाद बालात्कार के दर्ज मामलों में 132 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। मई 2017 तक बलात्कार के 836 मामले दर्ज किए गए थे।
हर एक घंटे में 4 महिला हो रही बलात्कार का शिकार :
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2014 की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर एक घंटे में 4 रेप और हर 14 मिनट में एक रेप की घटना सामने आई है। साल 2014 में देशभर में कुल 36975 रेप के मामले सामने आए थे। 
सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि आखिर किस तरह से महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध पर अंकुश लगाया जाए। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर सिर्फ सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों से ही रोक नहीं लगेगी। इसके लिए समाज के हर एक वरिष्ठ नागरिक और बुद्धिजीवियों  को आगे आना होगा। सिर्फ कानून से महिलाओं पर बढ़ रहे अपराधों पर लगाम नहीं लगाई जा सकती है बल्कि लोगों की सोच और मानसिकता में बदलाव लाना ज्यादा जरुरी है।   
हैदराबाद की खौफनाक घटना :
हाल ही में तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक खौफनाक घटना सामने आई है। हैदराबाद-बेंगलुरु हाइवे पर एक महिला सरकारी डॉक्‍टर की अधजली लाश मिली है। माना जा रहा है कि 27 वर्षीय महिला डॉक्‍टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्‍या कर दी गई। हैवानियत की इंतहा यह थी कि आरोपियों ने डॉक्‍टर की लाश को जलाकर एक फ्लाईओवर के नीचे फेंक दिया था। दरअसल महिला डॉक्‍टर रात में अपने घर लौट रही थीं, इसी दौरान रास्‍ते में उनकी बाइक पंचर हो गई थी। 
इस घटना में दरिंदों ने पहले  मूक  पशुओं का इलाज करने वाली डॉक्टर प्रियंका रेडी को प्री प्लान कर उसकी स्कूटी पंचर की और फिर मदद के नाम पर उनकी स्कूटी को सुधरबाने के बहाने डॉ प्रियंका रेड्डी के साथ दरिंदगी कर  उसको जलाकर मारने की वीभत्स घटना को अंजाम दिया। हैदराबाद की घटना से पूरा देश सदमे में हैं।  लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब दरिंदों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में फांसी की सजा सुनाई जाए।  पूरा देश उबल रहा है ।
 एक बेटी सुनसान रात में खुद को कमजोर व डरी महसूस कर रही थी तो इसका सीधा तात्पर्य यही है कि जितनी वो डरी थी उतना ही डरा हमारा समाज भी है । समय आ चुका है जब हमें इन जैसों को मुँहतोड़ जवाब ही नहीं देना है अपितु इनका सर कुचल देना है , ज़रूरी है कि घर की बेटियों बहनों को इन जैसे नरभक्षियो पहचान कराये , उन्हें आत्मरक्षा के प्रति शिक्षित करें , ऐसे लोगों का आर्थिक व समाजिक रूप से बहिष्कार हो ।
क्या हम डॉ प्रियंका रेड्डी को इंसाफ दिला पाएंगे?:  आज बेचारी प्रियंका रेड्डी हैवानियत की बली चढ़ी  , तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि कल कोई मासूम हम लोगों में से एक नही हो सकता , यह घटना सिर्फ़ विरोध में नहीं जानी चाहिये इसमें आत्ममंथन होना ज़रूरी है , आज ज़रूरी है उस माँ बाप से उनके दिल का हाल जानना जिन्होंने २7 साल तक उस मासूम बेटी को सीने से लगा कर बड़ा किया , आज जब उसकी जली हुई लाश उनके आँखों के आगे आयी होगी तो उनकी आँखों में खून जम जायेगा , कोई उसके भाई बहन से पूछो कि वो क्या महसूस कर रहे होंगे ।
आज कोई भी सरकार न अपराधियों के मन में भय पैदा कर सकी और न महिलाओं के मन से अब तक भय निकाल सकी है. हमारा समाज तो इन्हीं भेड़ियों से भरा पड़ा है इसलिए पढ़ लिखकर बेटियां बची रहेंगी इसकी गारंटी भी अब नहीं रही. 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे नारे अब कोई बकवास की तरह हैं, प्रेरित करने के लिए नहीं. क्योंकि आज के माता-पिता जब भी बेटियों को पढ़ाने की बारे में सोचते हैं, ऐसी कोई न कोई खौफनाक घटना उनके हौसले तोड़ने का इंतजार करती रहती है. कैसे आज की बेटियां अपने माता-पिता को यकीन दिलाएं कि बाहर वो सुरक्षित हैं. कैसे उनसे कहें कि उन्हें पढ़ने के लिए बाहर जाने दो।
हैदराबाद के प्रियंका रेड्डी मर्डर केस ने एक बार फिर सरकार और सुरक्षा का वादा करने वाली पुलिस को निकम्मा साबित कर दिया है। हैदराबाद की पुलिस और सरकार तो पहले ही 100 नंबर का राग अलाप कर प्रियंका रेड्डी पर ही दोष मढ़ चुकी है।
लेकिन भारत सरकार के लिए क्या कहा जाए जिसकी आंखें अपराध के आंकड़े देखकर भी नहीं खुलतीं. जिस देश में हर साल औसतन 40 हजार रेप होते हों, हर दिन में 106 रेप और हर 10 रेप में से 4 वारदात की शिकार छोटी बच्चियां होती हों, जहां conviction rate सिर्फ 25 फीसदी हो यानी 40 हजार रेप करने वालों में से सिर्फ 10 हजार को ही सजा मिले और 30 हजार खुला घूमें वहां कोई क्यों डरे। अपराधियों का इन आंकड़ों से हौसला बढ़ता है और वे अगले अपराध की प्लानिंग करते हैं । 
 डॉक्टर प्रियंका रेड्डी  27 साल की एक पढ़ी-लिखी डॉक्टर का वो हाल किया गया जिसे देखकर हर लड़की का मन अंदर तक सिहर उठे। सड़क के किनारे पड़े और कोयला बन चुके शरीर की तस्वीर शायद ही आंखों से जल्दी ओझल हो सकेगी। इस तस्वीर ने लड़कियों के हौसलों को पस्त कर दिया है ।  बेटियों को अकेले शहरों में छोड़ने वाले माता-पिता के माथे पर चिंता की लकीरें और गहरा गई हैं।
क्या हम मात्र पुलिस की गलती मानकर उन्हें कोसकर ऐसे मामलों पर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री नहीं कर रहे हैं। ऐसी  घटनाओं  को देख सुन बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ जैसे अभियान बैमानी नहीं लगते। आखिर कब तक निर्भया कांड होते रहेंगे?  आखिर हमारा देश लड़कियों के लिए इतना असुरक्षित क्यों है? अभी दिल्ली की निर्भया को इंसाफ भी नहीं मिल पाया था कि हैदराबाद की घटना ने एकबार फिर देश को शर्मसार कर दिया। हमें बिना समय गवाएं इन ज्वलंत यक्ष प्रश्नों के उत्तर गंभीरता से तलाशने होंगे। अन्यथा फिर किसी बेटी के साथ अनहोनी देखने के लिए तैयार रहें।
 ये विषय गंभीर है और इसे हमें गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि भारत की पहचान इसके बदौलत नही है। इस तरह की घटनाएँ प्रत्येक भारतीय के लिए शर्मनाक हैं।

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