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जानिए महीनों के अनुसार क्यों और कैसे बदल जाता है मूड

यशोधरा वीरोदय

5th December 2019

साल के 12 महीनों में सिर्फ कैलेंडर के पेज ही नहीं बदलते बल्कि हर महीने के अनुसार हमारा मूड भी बदलता रहता है। तो चलिए जानते हैं क्यों और कैसे बदल जाता है हर मौसम के हिसाब से मूड...

जानिए महीनों के अनुसार क्यों और कैसे बदल जाता है मूड
ये तो हम सब महूसस करते हैं कि मौसम बदलते ही हमारे मूड में बदलाव होता है, पर क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है? असल में इसके पीछे वैज्ञानिक कारण होता है। वैज्ञानिको की माने तो इंसानों के मूड का एक खास पैटर्न होता है जो हर महीने के अनुसार से बदलता रहता है। इस विष्य में शोधकर्ताओं ने पाया है कि स्तनधारियों (मैमल्स) के मस्तिष्क में ऐसे कैलेंडर सेल्स होते हैं, जो बॉडी क्लॉक को तय करते हैं हैं और हार्मोन के स्तर के आधार पर बताते हैं कि कब शीत निद्रा लेनी है या कब प्रजनन करना है। यानि कि आपका मन-मस्तिष्क भी एक निश्चित संकेत के अनुसार चलता है और ऐसे में जाहिर तौर पर हर महीने आपके मूड में बदलाव होता है। 

नई पहल के लिए जनवरी है बेस्ट 

जी हां, जनवरी का महीना सिर्फ कैलेंडर के लिहाज से ही नहीं, बल्कि विज्ञान की दृष्टि से भी नई पहल के लिए सबसे बेहतर होता है। दरअसल, वैज्ञानिकों की माने तो सर्दियों के मौसम में इंसान का दिमाग काफी एक्टिव और क्रीएटिव ढंग से काम करता है और साथ ही व्यक्ति का मनोबल भी बढ़ा होता है। मनोवैज्ञानिकों ने इसे टेम्पोरल लैंडमार्क टर्म दिया है। यही वजह है कि जनवरी के महीने में नए संकल्प लिए जाए हैं। इसलिए आप भी अपने जीवन में कुछ बेहतर बदलाव करना चाहते हैं तो इस जनवरी आप भी एक नई पहल की शुरूआत करें। 

फरवरी सुलझाती है मानसिक गुत्थी

वैसे तो फरवरी साल का सर्द महीना होता है और आमतौर पर माना जाता है कि सर्दी के मौसम का मन-मस्तिषक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पर वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो फरवरी दिमाग के लिए सबसे बेहतर मौसम माना जाता है। शोध में ये साबित हो चुका है कि इस मौसम में लोग सबसे सही और विवेकपूर्ण ढंग से सोच पाते हैं, जिसके चलते दुविधाओं से मुक्ति मिलती है।

मार्च में सताती है उदासी

वहीं मार्च का महीना भी मानसिक उलझने लेकर आता है। वैसे तो ये समय वसन्त के आगमन का होता है, जब प्रकृति में नया रूप-रंग देखने को मिलता है। पर वहीं वैज्ञानिकों की माने तो इस समय में शरीर में विटामिन डी और दूसरे फील गुड केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन का स्तर काफी कम हो जाता है, जिससे उदासी और थकान उच्चतम स्तर पर होती है।

अप्रैल बढ़ाता है व्याकुलता

अप्रैल के महीने में भीमन की व्याकुलता बढ़ जाती है, यही वजह है कि इस वक्त में लोग तनाव से निपटने के सबसे अधिक उपाय ढूढ़ते हैं। दरअसल, ये वो वक्त होता है, जब सूरज का प्रकाश तेजी से बढ़ रहा होता है जिससे इंसान के सर्कैडियन लय (बॉडी क्लॉक) को बाधा पहुंचती है और इस वजह से व्यक्ति की व्याकुलता बढ़ जाती है।

मई बनाता है मस्ती का मूड

मई का मौसम भले ही गर्म होता है, पर इन दिनों में सूर्य की रोशनी अधिक होने के चलते शरीर में विटामिन डी का उत्पादन बढ़ जाता है। जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप शरीर में सेरोटोनिन केमिकल पैदा होता है, जो व्यक्ति का मन  शांत और खुश रखता है। ऐसे में मई के मौसम में पार्टी और सेलिब्रेशन अधिक होते हैं।

जून में दिखता है जोश का जुनून 

जून के महीने में सेरोटोनिन केमिकल उच्च स्तर पर होता है, जिसके चलते लोग उत्साहित नजर आते हैं। ऐसे में आप इस महीने का उपयोग ट्रैवलिंग और नई जगहों को एक्सप्लोर करने में कर सकते हैं या फिर आप इस महीने स्वीमिंग, डांस या दूसरी कोई एक्टिविटी सीख  सकती हैं।

जुलाई लाता है खुशहाली

जुलाई में तनाव पैदा करने वाला कोर्टिसोल हार्मोन सबसे कम स्तर पर होता है, ऐसे में व्यक्ति शांत और खुशहाल महसूस करता है। यही वजह है कि इस मौसम स्कूल और कॉलेज के नए सेशन आरम्भ किए जाते हैं, ताकि इस बेहतर माहौल में बच्चे नई क्लास या स्कूल में तालमेल बिठा सकें। 

अगस्त में बढ़ती है मानसिक सक्रियता 

अगस्त के महीने में मस्तिष्क की सक्रियता उच्चतम स्तर पर होती है, पर वहीं मन शांत और स्थिर रहता है। ऐसे में अगस्त में आप कोई नई चीज सीखने की कोशिश करते हैं, तो वो जल्दी सीख पाते हैं। 

सितंबर में बेहतर होती है कार्यक्षमता

सिम्बर का महीना व्यक्ति की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और इस महीने में व्यक्ति की बढ़ती कार्य कुशलता की ही बानगी है कि दुनियाभर में इस महीने में सबसे अधिक उत्पादन होता है।

अक्टूबर लाता है असुरक्षा की भावना

वैज्ञानिको की माने तो इस महीने व्यकित की ऊर्जा का स्तर घट जाता है जिससे उन्हे अकेलेपन महसूस होता है और फिर सुरक्षित महसूस करने के लिए हम किसी के साथी की तलाश करते हैं। यही वजह है कि अक्टूबर में सबसे अधिक प्रेम संबंध बनते हैं।

नवंबर है फिटनेस के लिए

भले ही ये आम धारणा है कि सर्दियां आते ही लोग खाने पीने पर अधिक ध्यान देने लगते हैं और नतीजन वजन बढ़ जाता है। पर वैज्ञानिको की माने तो ये मौसम वजन कम करने के लिए और फिटनेस के लिए सबसे उपयुक्त होता है।

दिसंबर देता है डिप्रेशन

शोध की माने तो दिसम्बर के महीने में सबसे अधिक डिप्रेशन के मामले सामने आते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस वक्त कोहरा होने की वजह से शरीर को विटामिन डी कम मिलती है, वहीं सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे केमिकल्स भी निम्न स्तर पर होते है, जिससे मन में उदासी और नकारात्मक सोच उपजती है। इसलिए इस मौसम में जितना हो सके एक्टिव और सोशल बने रहने की कोशिश करें ताकि मौसम का नकारात्मक असर आपके मन-मस्तिष्क पर कम पड़ें और ड्रिप्रेशन की नौबत ना आने पाए।

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