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टीनएजर्स की 10 प्रॉब्लम्स

दीपाली किरन

13th January 2020

बदलता लाइफस्टाइल कहें, प्रतिस्पर्धा का दौर या फिर दूसरों से तुलना। वजह कुछ भी हो लेकिन ऐसी कर्इ समस्याएं हैं, जिनसे आज का युवा वर्ग अछूता नहीं है। निरंतर आगे बढऩे की होड़ में युवा वर्ग हर पल समस्याओं के सागर में गोता लगाता नजर आता है।

टीनएजर्स की  10 प्रॉब्लम्स
युवा एक ऐसा शब्द है जो उत्साह, उमंग और जुनून से जुड़ा हुआ है। उम्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव जिसमें भरपूर जोश होता है और नई चीजों को जानने की उत्सुकता रहती है। ऊर्जा से भरपूर युवा जि़ंदगी में बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं और दुनिया में नई खोजों का पता लगाने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। वे नवीन ऊर्जा से परिपूर्ण हैं और अपने से पहले की पीढिय़ों के द्वारा बनाये रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार बिल्कुल भी ढलना नहीं चाहते। युवाओं में ताॢकक क्षमता बहुत होती है, इसलिए वे सभी चीजों पर तर्कों को लागू करने का प्रयास करते हैं और बड़ों की पुरानी एवं कट्टरपंथी सोच पर सवाल खड़े करते रहते हैं। युवा पीढ़ी एक राष्ट्र की रीढ़ होती है और खासकर भारत को तो युवाओं का निवास कहा गया है। उनका मनोबल, उनकी क्षमताएं, उनका साहस असीम है।किंतु आज के युग मे युवाओं की स्थिति थोड़ी अजीब हो गई है। उनमें एक डर सा पनपने लगा है। हार का डर, पिछड़ जाने का डर, इच्छाओं के दबने का डर आदि। गौर से देखा जाये तो आज का युवा असंतोष के साथ जी रहा है। उनकी मनोस्थिति कुछ इस तरह की बनती जा रही है कि वह हर कार्य को नकारात्मक रूप से देखने लगे हैं। यह असंतुष्टि उनको अंदर ही अंदर खोखला कर रही है और परिणामस्वरूप हमें युवाओं में जलन, अवसाद, आपराधिक लक्षणों जैसे नकारात्मक स्वभाव देखने को मिल रहे हैं। युवाओं में इन नकारात्मक भावनाओं का कसूरवार है आज की जीवनशैली और समाज की सोच। अगर गौर किया जाए तो भारतीय युवा किसी से कम नहीं है, किंतु उनके अंदर ये धारणा समाज द्वारा ही डाली गई है, जैसे 95 प्रतिशत अंक भी आज के अभिभावक को कम लगते हैं। उसका पैकेज तुझसे ज्यादा कैसे? तू उसके जैसी गोरी नहीं आदि। इससे पहले समाज का ये रोग चरम पर पहुंचे ऐसे युवाओं की समस्याओं को समझना होगा ताकि हम उनका समाधान ढूंढ सकें।

कैरियर

आज के भारतीय युवा की सबसे बड़ी समस्या है कैरियर। आज के युवा वर्ग को तुरंत ही ऊंचाईयों को छूना है, परंतु वह यह भूलता जा रहा है कि उन ऊंचाईयों को छूने के लिए उसे छोटे-छोटे कदम रखने होंगे। वो हमेशा ऐसे विकल्प तलाशते हैं, जिसमें उनको अचानक से ढेर सारा धन मिल जाये और वो जल्द से जल्द अपने और अपने परिवार के सपनों को पूरा कर सकें। अच्छी कंपनी, अच्छा पैकेज सभी का सपना बनता जा रहा है। सरकारी नौकरियों में जगह पाने के लिए रिश्वत जैसी चीजों का सामना भी कारण है, युवाओं की चिंता का।

असुरक्षा

हाल ही में हैदराबाद में हुए दिल दहला देने वाले हादसे ने सभी को अंदर से झकझोर के रख दिया। इस तरह की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं, जिसके चलते आज का युवा खुद को असुरक्षित महसूस करता है, खासकर लड़कियां जो शाम ढ़लते ही खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं, इसीलिये परिवार भी बेटियों को बाहर भेजने से झिझकता है। इसके अलावा दिन दहाड़े ड़कैती, लूटमार आदि भी कारण हैं युवा में असुरक्षा के।

पारिवारिक हस्तक्षेप

आज के युवा अपनी जि़ंदगी अपने ढंग से जीना चाहते हैं लेकिन परिवार के सदस्य उनकी जिंदगी में दखल देते रहते हैं, जैसे किसका फोन था, कहां गए थे, ये कैसा हेयर स्टाइल है आदि जोकि उनको बिलकुल पसंद नहीं आता है और वो परिवार से कटने लगते हैं। ज्यादा हस्तक्षेप से वे चिढ़ते हैं।

सामाजिक दबाव

हमारे देश में दिखावे की रीत शुरू से चली आ रही है, जिसका शिकार बनते हैं युवा। अगर वो रूचि के अनुसार कुछ करना भी चाहें तो उनको मन मार कर परिवार और समाज के हिसाब से ही चलना पड़ता है। जैसे तू भी ये कोर्स कर ले, क्योंकि मौसी का बेटा ये करके विदेश पहुंच गया। इस प्रकार सामाजिक दबाव के चलते युवा कुछ क्रिएटिव करना चाह के भी नहीं कर पाते।

दोस्ती से बढ़कर रिश्ते

कुछ रिश्ते दोस्ती से बढ़कर होते हैं, जैसे गर्लफ्रैंड और ब्वॉयफ्रैंड का रिश्ता। और आजकल तो जैसे चलन ही है, ऐसे रिश्ते बनाने का। ऐसे रिश्तों में भरोसे का टूटना, धोखा मिलना आम बात है। ऐसे में कई बार जब रिश्ते टूटते हैं तो फिर उन्हें हमेशा के लिए दर्द दे जाते हैं, जिसका असर उनके कैरियर और पढ़ाई और जि़ंदगी पर भी पड़ता है।

स्टेटस सिंबल

आजकल दूसरों को खुद से बेहतर दिखाने के चक्कर में और सोशल स्टेटस मेंटेन करने की होड़ में युवा पिसते जा रहे हैं। आकर्षक जीवनशैली जीने के लिए युवा दिन-रात एक कर देते हैं और तरह-तरह की चिंताओं का शिकार हो रहे हैं।

कुसंगति

बाहरी चमक धमक जीने के लिए युवा कुसंगति का शिकार बहुत तेजी से हो रहे हैं। कभी-कभी बुरी संगत के प्रभाव से उनका जीवन खराब हो जाता है। इन सारी समस्याओं के चलते आज के युवा कमजोर पड़ सकते हैं। बेहतर होगा समय पर युवाओं के मनोविज्ञान को अच्छी तरह से समझ कर उनको सही राह दिखाई जाए ताकि वो उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकें। 

भविष्य की चिंता

आज हमारा देश जिन हालातों से गुजर रहा है वो हम देख ही रहे हैं। ऐसे में देश की टेंशन होना लाजि़मी है। युवाओं को डर रहता है कि अभी ऐसे हालात पैदा हो चुके हैं तो आगे क्या होगा। पॉल्यूशन, क्राइम, महंगाई, वाटर प्रॉब्लम, ग्लोबल वाॄमग आदि अपने चरम पर हैं। ये भी युवाओं में एक चिंता का विषय है, कैसे उनका जीवन आगे और कठिन होने जा रहा है।

हैल्थ की समस्या

आजकल कुछ भी शुद्ध नहीं है, चीजों में मिलावट की बातें अक्सर खुलकर हमारे सामने आती हैं ऊपर से आजकल का लाइफ स्टाइल इतना खराब हो चुका है, जिससे कम उम्र में ही बीमारियां पकड़ लेती हैं। युवाओं की बहुत बड़ी समस्या तरह-तरह की बीमारियां भी हैं। शुगर, ब्लडप्रेशर, थायरॉइड जैसी बीमारियां आजकल कॉमन हो चुकी हैं।

सोच में अंतर

ध्यान से देखा जाये तो ज्यादातर युवा पाश्चात्य सभ्यता से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं, उन्हे पुरानी पीढ़ी के साथ सामंजस्य बैठाने में परेशानी होती है, जिसका प्रभाव रिश्तों पर पड़ता है, जिसका परिणाम आपसी मन मुटाव। फिर उनको लगता है हमारे बड़े बुजुर्ग हमारी बात समझते नहीं और नतीजतन अकेलेपन का सामना करते हैं। आज के युवा परंपरावादी सोच के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे और अपनी बात नहीं कह पा रहे।

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