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क्या आपका प्रेम है सच्चा ?

यशोधरा वीरोदय

30th January 2020

आधुनिकता के दौर में प्यार के मायने पूरी तरह बदल चुके हैं। ऐसे में सच्चे प्यार और छलावे के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है। इससे पहले कि देर हो जाए, अपने रिश्ते को सच्चे प्रेम की कसौटी पर जरूर परख लें।

क्या आपका प्रेम है सच्चा ?
वैसे तो प्यार की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती, देखा जाए तो हर किसी के लिए प्यार की अपनी परिभाषा या मायने हो सकते हैं। हां पर इंसान के लिए प्यार और छलावे में फर्क समझना जरूरी है, क्योंकि आजकल प्यार के नाम पर रिलेशनशिप बनाने और फिर उसे तोड़ने का चलन सा चल पड़ा है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि कोई कैसे जाने कि उसका प्यार सच्चा है भी या नहीं। चूंकि मामला यहां भावनाओं और संवेदनाओं का होता है, ऐसे में जरा सी भी गतलफहमी आपको गलत दिशा में ले जा सकती है, इसलिए बेहतर यही है कि दिल के साथ ही दिमाग से भी काम लिया जाए और भावनाओं के अतिरेक से निकल अपने रिश्ते को वास्तविकता की धरातल पर परखा जाए। सच्चे प्यार की परख के लिए रिश्ते के हर पहलू पर गौर करना होगा। जैसे कि...

परिस्थितियों से परे है सच्चा प्यार 

सच्चा प्यार कभी परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता है, वो हर हाल में बना रहता है। जैसे कि अगर आपके साथ कोई परिवारिक दिक्कत चल रही है या प्रोफेशनल लाइफ में आप किसी विपरित परिस्थिति का सामना कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में भी अगर आपका साथी आपके साथ खड़ा है तो समझ जाइए कि आपको आपका परफेक्ट मैच मिल चुका है। वहीं अगर कोई परिस्थिति के अनुसार आपसे कमिटमेंट कर रहा है, तो इसका मतलब है कि वो आपसे प्यार नहीं बल्कि मौका परस्ती कर रहा है।

सच्चे प्यार में होती है सहजता 

प्यार में उल्फत नहीं दिल का सुकून भी होना चाहिए। जी हां, रिलेशनशिप में सहजता काफी जरूरी है... अगर आपको अपने रिश्ते को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, तो ये कहीं ना कहीं खतरे की घंटी है। वहीं अगर आप अपने रिश्ते में बेहद सहज है और उसके अलावा बाहरी चीजों पर ध्यान दे पा रहे हैं तो समझिए कि आपका रिश्ता सही ढर्रे पर चल रहा है और आगे भी इसे ऐसे ही बनाए रखें।

सच्चे प्यार में स्वीकार्य है कमियां

जी हां, सच्चे प्यार में अच्छाईयों के साथ कमियों को भी सहृदय स्वीकार किया जाता है। अगर आप और आपका साथी एक दूसरो की कमियों को जानते हुए उसे स्वीकार करते हैं तो फिर ये तय है कि आपका रिश्ता जीवनभर निभ सकता है। वहीं अगर आप सिर्फ सामने वाली की अच्छाईयों की तरफ आकर्षित हैं और उसकी कमियां आपको खटकती हैं, तो फिर आपको इस बारे में सोचना चाहिए। वरना आगे चलकर आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सच्चा प्यार बनाता है बेहतर इंसान

सच्चा प्यार इंसान को बेहतर बनाता है, आप पहले से कहीं अधिक संवेदनशील और दुनियादारी के प्रति जिम्मेदार हो जाते हैं। जब तक व्यक्ति सिर्फ अपने बारे में सोचता है, तो वो दूसरों के लिए उतना संवदेनशील नहीं होता। पर प्यार का अहसास उसमें इंसानी जज्बातों को जगाता है, जिससे वो पहले से कहीं अधिक संवेदनशील और बेहतर बन पाता है। अगर आप भी रिश्ते में आने के बादे ऐसे सकारात्मक बदलाव महसूस कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आप सच्चे प्यार में हैं। 

सच्चे प्यार में नहीं होता दिखावा

सच्चे प्यार में कभी दिखावे की जरूरत नहीं पड़ती, आप बिना जताए भी एक दसरे की भावनाओं को बेहतर समझ पाते हैं। आप संदेश और तोहफों के बिना भी अपनी बात दूसरे तक पहुंचा सकते हैं, इसके लिए प्यार भरी एक नजर ही काफी होती है और ऐसा सिर्फ सच्चे प्यार में ही होता है। वरना आजकल ज्यादातर लोग को अपने साथी से इस बात की शिकायत रहती है कि वो काम में व्यस्तता के चलते पर्याप्त समय नहीं दे पा रहा है या प्यार नहीं जता पा रहा है। 

प्यार और पसन्द में है अन्तर 

सच्चे प्यार को समझने के लिए ये बात भी समझना बेहद जरूरी है कि प्यार और पसन्द में काफी बड़ा अन्तर होता है। दरअसल, प्यार जहां दूसरे व्यक्ति के प्रति स्थायी भावना है, वहीं पसन्द त्वरित और अतिरेक की स्थिति है, जोकि समय के साथ बदल सकती है। जबकि प्यार हमेशा स्थायी होता है। इसलिए अपने रिश्ते को परखने के लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि आप सामने वाले से प्यार करते हैं या सिर्फ पसन्द। 

सच्चा प्यार समय के साथ निखरता है 

कुछ लोग समय के साथ प्यार के खत्म होने के शिकायत करते हैं। जबकि सच्चा प्यार समय के साथ कम नहीं होता बल्कि ये और प्रगाढ होता जाता है। बीतते समय के साथ आप एक दूसरे को बेहतर तरीके से जानने लगते हैं और आप दोनो के बीच का सामंजस्य भी बेहतर होता चला जाता है । ऐसे में समय के साथ आपके बीच प्यार भी परिपक्व होता है या कह सकते हैं कि समय के साथ प्यार निखरता चला जाता है। 

विश्वास की नींव पर टिका है सच्चा प्यार

सच्चे प्यार की इमारत विश्वास और भरोसे के बुनियाद पर खड़ी होती है, अगर आप अपने साथी को प्यार करते हैं तो उस पर विश्वास करने का साहस भी रखिए। जिस रिश्ते में विश्वास नहीं होता, वहां असल में प्यार भी नहीं होता। इसलिए भूले से भी कभी शक और संकाओं के आधार पर अपने प्यार को परखने की कोशिश न करें, वरना इसके चलते आपके रिश्ते में कड़वाहट आ सकती है।

सच्चे प्यार में नहीं होती अहम की भावना

दो दिलों का मिलन ही प्यार है, ऐसे में सच्चे प्यार में अहम के लिए कोई स्थान नहीं होता। आपके लिए आपके साथी का सुख-दुख, भावनाएं-संवेदवनाएं और मान-सम्मान उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना आपके स्वयं का। अगर आप अपने साथी के लिए अपने अहम का त्याग कर सकते हैं, तो समझिए कि आप उससे सच्चा प्यार करते हैं। वरना बहुत से लोग इसी अहम के चलते अपना प्यार खो देते हैं।

सच्चा प्यार होता है निश्छल

सच्चा प्यार पानी सा निश्छल होता है, जिसमें एक दसरे के लिए नो तो कोई छल कपट होना चाहिए और न ही एक दूसरे से कोई बात छिपानी चाहिए। क्योंकि अगर आपको सामने वाले व्यक्ति से कोई बात छिपाकर रखनी पड़ रही है, तो इसका मतलब है कि या आप उस पर इतना विश्वास नहीं करते हैं कि आप उसके सामने अपनी बात रख सकें। इसलिए अपने रिश्ते में इतनी स्पष्टता और निश्छलता लाइए ताकि बातें स्पष्ट हो सकें। 

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