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क्यों बदल गए प्यार के मायने

यशोधरा वीरोदय

1st February 2020

प्यार में स्वच्छंदता और सहजता जरूरी है, पर इसकी भी अपनी सीमा होनी चाहिए, क्योंकि जब इनकी सीमाएं टूटती हैं, तो प्यार के मायने ही पूरी तरह बदल जाते हैं।

क्यों बदल गए प्यार के मायने
हुकअप और ब्रेकअप सॉन्ग गुनगुनाने वाली आज की जेनरेशन के लिए प्यार, दो दिलों को बांधने वाला बंधन नहीं रहा, बल्कि अब तो स्टेटस के तौर पर रिलेशनशिप बदलने का चलन चल पड़ा है। जी हां, समय के साथ न सिर्फ प्यार के तराने ही नहीं बदले हैं, बल्कि आज तो प्यार के मायने पूरी ही तरह से बदल चुके हैं। आज प्यार के नाम पर लोग सब कुछ कर ले जाते हैं, बस प्यार ही नहीं करते हैं। देखा जाए तो मानवीय रिश्तों में आया ये बदलाव सामाजिक ढ़ांचे में आए बदलाव का ही परिणाम है। सोशल मीडिया के इस जमाने में रिश्ते बनाना जितना आसान हो चुका है, उतना ही मुश्किल है इन्हें मुकम्मल बनाना। आज प्यार किसी व्यक्ति विशेष के प्रति की स्नेहभाव नहीं, बल्कि दिखावे का जरिया बन चुका है और जब बात दिखावे की हो तो उचित-अनुचित का ख्याल कहां रह जाता है। ऐसे में आधुनिकता के नाम पर रिश्तों में आई ये स्वच्छंदता और संवेदहीनता बेहद चिंताजनक और विचारणीय हो चुकी है। सवाल ये है कि हम ऐसी परिस्थिति में क्यों पहुंचें हैं, जहां खत्म हो चली मानवीय संवदेनाएं के साथ प्यार के मायने भी बदल गए हैं।

ये कहां आ गए हम

वैसे तो प्यार सार्वभौमिक भावना है, जो किसी क्षेत्रीय सीमाओं में नहीं बंधा है, पर अगर बात करें अपने देश भारत की तो ये वो धरती है, जहां मोहब्बत की निशानी की तौर पर ताजमहल जैसी इमारते बुलंद है, जहां पर प्यार में मर मिटने वाले लैला-मजनू और हीर रांझा की दास्तां सुनाई जाती है। पर आज के समय में ये सबकुछ सिर्फ कहने सुनने तक सीमित रह गया है। आधुनिकता और व्यवहारिकता की दौड़ में प्यार के मायने लोगों ने अपनी सुविधानुसार बदल लिए हैं। आज रिश्ते स्वार्थ के लिए बनाए जाते हैं और जब ये स्वार्थ सिद्ध हो जाता है, तो ऐसे रिश्ते दम तोड़ देते हैं। 

आधुनिकता के नाम पर प्यार का छलावा

देखा जाए तो आज के परिवेश में प्यार सिर्फ छ्लावा बनकर रह चुका है। जहां प्यार के नाम पर लोग एक रिश्ता बनाते हैं और उसे मन चाहा रूप दे देते हैं। परिस्थितियों ने साथ दिया तो ऐसे कुछ रिश्ते शादी के मुकाम तक पहुंच भी जाते हैं, वरना आपसी सहमति के आधार पर ब्रेकअप कर लिया जाता है। जाहिर है कि ये दो लोगों के बीच का आपसी मामला है, ऐसे में किसी तरह की सामाजिक जवाबदेही नहीं रहती है। इसी संवेदनहीनता के चलते प्यार में समर्पण की भावना भी पूरी तरह खत्म हो चली है। 

आभासी दुनिया का दिखावटी प्यार 

गौरतलब है कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिश्ते बनने लगे हैं, जहां रिश्ते की हर एक अपडेट पोस्ट होती है ऐसे में इन रिश्तों में एक दूसरे के प्रति प्यार और स्नेह हो न हो, पर फेसबुक और इंस्टा पर डलने वाले कपल्स के पोस्ट पर लाइक्स पूरे आने चाहिए। इसलिए आभासी दुनिया के इस दिखावटी प्यार में समर्पण और विश्वस्नीयता की उम्मीद रखना भी बेवकूफी है। यहां सबकुछ दिखावा है, ऐसे रिश्ते साथी का चाहत में नहीं दुनिया को दिखाने के लिए बनाए जाते हैं। 

स्टेटस सिम्बल बना लव-रिलेशनशिप

सोशल मीडिया की इस आभासी दुनिया में लव-रिलेशनशिप स्टेटस सिम्बल जैसा बन चुका है, जोकि समय-समय पर बदलता रहता है। दरअसल, आज लोग सिंगल से मिंगल होने की चाहत में ही रिश्ते बना लेते हैं, नतीजन ऐसे रिश्तों की उम्र लंबी नहीं होती। वहीं आज के समय में लोगों के पास विकल्प अधिक हैं, इसलिए एक रिश्ते में बने रहने की बाध्यता जैसे खत्म हो चली है। एक रिलेशनशिप से निकलने के साथ ही लोग दूसरा विकल्प ढ़ूंढ़ लेते हैं।

प्यार में स्वच्छंदता कितनी है जायज़ 

ऐसे में सवाल उठता है कि प्यार में स्वच्छंदता कितनी जायज है, क्योंकि  वैसे तो प्यार स्वभाविक रूप से स्वच्छंद होता है और ये हर तरह की सीमाओं और बंधनों से मुक्त होता, लेकिन अगर ये स्वच्छंदता ही प्यार के अस्तित्व के लिए घातक बन जाए तो सोचना लाजमी हो जाता है। क्योंकि प्यार दो दिलों को एक बंधन में बांधता है और इस बंधन में इतनी तो मजबूती होनी ही चाहिए कि सिर्फ मनमर्जी के लिए इसे न तोड़ा जाए। आप जो भी रिश्ता स्वयं बनाते हैं, उसे निभाने की जिम्मेदारी भी आपकी ही होती है। 
खासकर प्रेम सम्बंधों में विश्वसनीयता और समर्पण की भावना जरूर होनी चाहिए, क्योंकि आदर्श प्रेम व्यक्ति को बेहतर और जिम्मेदार इंसान बनाता है। सुप्रसिद्ध लेखक शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने कहा है कि प्रेम की पवित्रता का इतिहास ही मनुष्य की सभ्यता का इतिहास है, उसका जीवन हैं। यानि कि किसी भी समाज की असल आधारशिला उसमें रहने वाले लोगों की विचारधारा और सामाजिक भावना पर निर्भर करती है। दरअसल, व्यक्ति का व्यक्तिगत स्वभाव और चरित्र उसके सामाजिक जीवन को आयाम देता है और इसलिए समाज में प्यार की आदर्श भावना बचानी जरूरी है। 

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