साइंस की नजर में प्यार की परिभाषा

शिखा जैन

5th February 2020

पुरानी कहावत है कि प्यार किया नहीं जाता, ये तो हो जाता है। दो दिल करीब आते हैं और प्यार खुद ब खुद जन्म लेने लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं प्यार का भी अपना एक अलग विज्ञान है।

साइंस की नजर में प्यार की परिभाषा
दिल तेरे बिन कहीं लगता नहीं, वक्त गुजरता नहीं, क्या यही प्यार है? इस तरह के गीत बॉलीवुड की फिल्मों में बनते रहे हैं। यह जान पाना बहुत मुश्किल है कि आखिर प्यार क्या है? क्या इसका कोई विज्ञान है? जवाब है जी हां, प्यार का अपना अलग विज्ञान है, अपनी बायोलॉजी है, अपनी कैमिस्ट्री है, अनेक रूप हैं, अपनी परिभाषा है और अपना दर्शन भी। वाकई मुहब्बत है क्या चीज? जिसे करना तो सभी चाहते हैं, लेकिन जानता कोई भी नहीं है। यदि मुहब्बत इतनी रहस्यमय न होती तो क्या मिर्जा गालिब 'इस इश्क के कायदे भी अजब है गालिब, करो तो बेहाल है, न करो तो बेहाल जैसा शेर लिखते? आपने कभी गौर किया है कि इस  प्रेम, प्यार जैसे शब्दों को लेकर कितने विवाद रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह तो एक भावना है, जिसका एहसास धीरे-धीरे ही होता है, लेकिन कुछ तो बिलकुल  प्रूफ के साथ कहते हैं, यह तो पहली नजर का प्यार है जो बस एक बार देखते ही हो जाता है। कोई कहता है कि प्यार दिल से होता है कोई कहता है दिमाग से। कोई कहता है प्यार में भूख प्यास, नींद सब उड़ जाती है। आइए जाने इसके पीछे की सच्चाई क्या है? 

दिमाग और दिल का है गहरा रिश्ता-

अभी हाल ही में मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की शोध के अनुसार मस्तिष्क में फार्म फेस ऐरिया यानी एफ.एफ.ए. भाग होता है जो खूबसूरत और आकर्षक चेहरा देख हरकत में आ जाता है। शोधकर्ता डॉ. गालिट यावेल और उनकी साथी नैंसी कैनविरार ने छिपे रूस्तम मस्तिष्क की इस कारगुजारी को उजागर करने के लिए ब्रेन स्केनिंग की तकनीक का सहारा लिया। प्रमुख मस्तिष्क को हरकत में लाने के लिए पहले फिल्म द्वारा इमारतें दिखाई गई जिसका प्रभाव सहज था, मगर ज्यों ही खूबसूरत लड़की का चेहरा दिखाया गया  प्रमुख के मस्तिष्क का एफ.एफ.ए. अंश एकदम हरकत में आया और सक्रिय हो गया। यही  प्रतिक्रिया लड़की के मस्तिष्क में भी हुई। 

भावना एक रूप अनेक-  

प्रेम भावना तो एक ही है किंतु यह हर व्‍यक्ति के प्रति भिन्‍न-भिन्‍न होती है अर्थात माता- पिता से अलग प्रेम, भाई-बहन से अलग, मित्रों से अलग तथा जीवन साथी से अलग एक ही भावना के इतने भिन्‍न रूप कैसे हो सकते हैं। इसको जानने के लिए वैज्ञानिकों ने अनेक शोध किये, जिसके  परिणामस्वरूप कई रोचक तथ्‍य उभरकर सामने आये, जिसमें विभिन्‍न रासायनिक अभिक्रियाएं तथा रसायनों की भूमिका देखी गई। वैज्ञानिकों द्वारा प्रेम को तीन भागों मे विभाजित किया गया है। 

आकर्षण वाला प्यार- 

आकर्षण इंसान की खूबसूरती, उसके लुक्स से होता है और ज्यादातर ये एक तरफा होता है। कभी-कभी दोनों ओर से भी आकर्षण होता है। कभी-कभी सिर्फ क्रश बनकर रह जाता है तो कभी-कभी आपसी समझ से एक रिश्ते का भी रूप ले लेता है। लेकिन आकर्षण ज्यादातर एक अस्थायी प्यार होता है, जो एक साथ कई लोगों से हो सकता है। 

इसका रासायनिक लोचा- 

कोई भी व्‍यक्ति जब किसी की ओर आकर्षित होता है तो उसके मस्तिष्क से डोपामीन, फिनाइल इथाइलअमीन और नोरेपिनेफ्रीन नामक हार्मोन स्रावित होते हैं। डोपामीन हार्मोन मुख्‍यत:  प्रसन्नता या आनंद के लिए उत्तरदायी होता है तथा यह हायपोथेल्लामस मे उत्‍पन्‍न होता है। नोरे पिनेफ्रीन हृदय गति और उत्तेजना को तीव्रता प्रदान करता है। फिनाइल इथाइलअमीन भावनाओ को तीव्रता प्रदान करता है। यह हार्मोन जब उच्‍च स्तर पर स्रावित होते हैं तो व्‍यक्ति मे तृष्णा, तीव्र उर्जा, अनिद्रा भूख ना लगना, हृदय की धड़कन तीव्र होना, हथेली से पसीना आना आदि जैसे  परिवर्तन होने लगते हैं, जिसे लोग प्यार का नाम दे देते हैं। इस आकर्षण के दौरान व्‍यक्ति के शरीर मे सेरोटोनिन नामक हार्मोन की मात्रा भी कम होने लगती है। यह हार्मोन व्‍यक्ति की भूख और मनोदशा के लिए उत्तरदायी होता है। उपरोक्त तीन हार्मोन (डोपामीन, नोरेपिनेफ्रीन और फिनाइल इथाइलअमीन) आकर्षण के  प्रारंभिक चरण को प्रस्तुत करते हैं, सेरोटोनिन और ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिश्तों को मजबूती प्रदान करते हैं। 

वासना- 

यह प्यार होता ही नही है बस इसे प्यार का नाम दे दिया जाता है। यह आकर्षण का ही एक रूप होता है, जिसमें कभी-कभी आकर्षण सिर्फ हवस और वासना के कारण भी हो जाता है, जो दिखावे का प्यार होता है। आकर्षण ज्यादातर सिर्फ सेक्स पर आकर रुक जाता है या खत्‍म हो जाता है। 
इसका रासायनिक लोचा- 
इस भावना के लिए दो हार्मोन 'टेस्टोस्टेरोन' तथा 'एस्ट्रोजेन' उत्तरदायी होते हैं। यह भावना क्षणिक होती है। यह हार्मोन्‍स वास्तविक प्रेम के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं। इसे सच्‍चा प्रेम नहीं कहा जा सकता है। 

लगाव- 

लगाव मित्रों एवं पारिवारिक सदस्यों (माता,  पिता, संतान, भाई-बहन इत्‍यादि) के मध्‍य होता है। 

इसका रासायनिक लोचा-

लगाव के लिए ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन नामक हार्मोन उत्तरदायी होते हैं। यह हार्मोन हमारे रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है तथा उसे दीर्घकाल तक चलने की क्षमता भी प्रदान करता है। 

लव कैमेस्ट्री- 

क्यों प्यार मे भूख नहीं लगती, नींद उड़ जाती है, चैन खो जाता है। विज्ञान के नजरिए से देखें तो प्यार की तीन अवस्थाएं बताई गई हैं। इन तीन अवस्थाओं मे विभिन्न हार्मोनो का स्त्राव होता है। 

डोपामाइन-

क्या आप जानते हैं कि जब आप प्यार करते हैं तो उस दौरान डोपामाइन आपको कोकेन जैसा एहसास देता है। हरेक समय जब आप अपने प्यार को देखते हैं तो डोपामाइन हार्मोन क्रियाशील होता है। लंबे समय तक सबंध होने पर इस हार्मोन का स्त्रवण कम हो जाता है। 

फेनीलेथामाइन-

फेनीलेथामाइन का उत्‍पादन आपके दिमाग में होता है। आपकी हृदयगति तेजी से बढ़ने लगती है, आपकी सांस तेजी से चलने लगती है और आपकी हथेलियो में पसीना आने लगता है। आपके गालो और जननांगो मे रक्त का अतिरिक्त प्रवाह होने लगता है। जब आपकी आंखें किसी से मिलती हैं तो आपका दिमाग फेनीलेथामाइन का उत्‍पादन करता है। आपकी पुतलियां बड़ी होने लगती हैं। वही दूसरी तरफ जब आपको जिंदगी में डर लगता है तो भी इस हार्मोन का स्त्रवण होता है। 

एड्रेलिन-

कहते है कि प्यार मे भूख नहीं लगती। अगर विज्ञान की माने तो ये बात सच है। एड्रेलिन हार्मोन के ज्यादा स्त्रवण की वजह से पाचन तंत्र धीमे काम करता है जिससे आ को भूख कम लगती है। आपकी  हृदय गति तेज हो जाती है और आपकी सांस भी तेजी से चलने लगती है। 

इंडोर्फिन-

जब आपके शरीर में दर्द होता है तो आपका शरीर इंडोर्फिन का उत्‍सजर्न करता है। जब आप प्यार में होते हैं तो इसका प्रभाव हेरोइन और अफीम की तरह होता है जिसकी वजह से वह खुश और आनंदित होते हैं। 

वेसोप्रेसिन- 

पुरुषों में वेसोप्रेसिन उसी तरह काम करता है जैसा महिलाओं में ओसिटोसिन। ऐसा कहा जाता है कि इस हार्मोन की वजह से ही व्‍यक्ति एक पत्नीवादी हो जाते हैं। इस हार्मोन के ज्यादा स्रवण के लिए जरूरी है कि आप एल्कोहल का इस्तेमाल कम करें। 

ऑक्सीटोसिन-

ऑक्सीटोसिन को मदर हार्मोन कहा जाता है। जब मां अपने बच्‍चे को दूध पिलाती है तो इसका स्त्रवण ज्यादा होता है। जब आप  किसी को गले लगाते हैं तो ऑक्सीटोसिन का उत्पादन ज्यादा होता है। इस हार्मोन की वजह से आपको डर कम लगता है और विश्वास में ज्यादा रहते हैं। 
सेरोटोनिन- सेरोटोनिन हार्मोन ही इस बात की जानकारी देता है कि आपको प्यार क्यों और कब हुआ। 

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