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अजय हर मामले में परफेक्ट हैं- काजोल

संविदा मिश्रा

17th February 2020

लंबे अरसे बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल अपने पति अजय देवगन के साथ उनकी सौवीं फिल्म 'तानाजी द अंनसंग वारियर में एक साथ नजऱ आईं। इस फिल्म में काजोल महाराष्ट्रीयन महिला के किरदार में दिखीं, जिसको लोगों ने काफी पसंद किया। हाल ही में काजोल ने हमारे मुंबई ब्यूरो चीफ प्रवीन चंद्रा से कुछ बातें शेयर की, पेश है मुलाकात के कुछ अंश-

अजय हर मामले में परफेक्ट हैं- काजोल

बीस बरस के सुखमय वैवाहिक जीवन का 100 प्रतिशत क्रेडिट अजय देवगन आपको देते हैं, इस बारे में आपकी क्या राय है?

पहले तो मैं अजय को शुक्रिया कहना चाहती हूं कि वह ऐसा मानते हैं और मुझे इतना ऊंचा स्थान देते हैं, पर वह कहते हैं ना, ताली एक हाथ से नहीं बजती, तो कहीं ना कहीं उनका भी इसमें बहुत बड़ा कॉन्ट्रिब्यूशन है मुझे लगता है कि गृहस्थी उस पौधे के समान होती है, जिसे पानी के अलावा, खाद्य और देखभाल की भी जरूरत होती है। जिस तरह से अजय ने अगर आर्थिक रूप से गृहस्थी को ज्यादा सुदृढ़ किया तो मैंने सही रखरखाव और देखभाल से इसे स्वस्थ बनाए रखने का काम किया। फिर जब मामला घर का हो तो एक बिंदु पर आकर हम दोनों एक हो जाते हैं और वह है हमारे बच्चे और उनका आने वाला फ्यूचर।

इतने अरसे के बाद एक साथ फिल्मी सेट पर काम करना कैसा रहा? क्या बदलाव देखती हैं अब और तब के सिनेमा प्रोडक्शन में?

अजय के साथ काम करना हमेशा ही बहुत स्वीट रहता है। वह हर तरह से पैंपर करके रखता है अपने कलाकारों से लेकर टेक्नीशियन्स तक को। वैसे भी सेट के अलावा हम घर में एक साथ बहुत से काम कर चुके हैं, चूंकि यह होम प्रोडक्शन थी तो उसे जल्द से जल्द समेटने की जल्दी भी थी। हंसते-खेलते कब शूटिंग खत्म हो गई, पता ही नहीं चला। जहां तक सेट के बदलाव की बात है तो वह तो बदलता रहता है, हर फिल्म के साथ। हां, आज के दौर में, जो कहानी और कहानी कहने का तरीका बदल गया है वह बहुत खास बना देता है हमारी फिल्मों को। 

 

कहते हैं विरोधी ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते हैं, अजय की कौन सी ऐसी बातें हैं जो विरोधाभासी होने के चलते आप दोनों का तालमेल सही रखती हैं?

सबसे बड़ा कारण यह लगता है कि मैं बहुत ज्यादा बातूनी हूं, दिल में कुछ नहीं रखती और सबमें अपनी यह चुलबुलाहट भरने का दावा ठोकती हूं, जबकि अजय स्वभाव से बहुत ही शाय, कम बोलने वाले और रिजर्व किस्म के इंसान हैं। वह मेरी तरह जल्दी दोस्त नहीं बनाते, यही वजह है कि हम दोनों एक-दूसरे के पूरक होने के चलते, एक-दूसरे को बर्दाश्त कर लेते हैं। चूंकि मैं चैटरबॉक्स हूं इसलिए मुझे कोई सुनने वाला चाहिए और अजय के रूप में यह कमी पूरी हो जाती है। दूसरी बात मुझे हंसना और खिलखिलाना बहुत पसंद है, तो दूसरी तरफ अजय की वन लाइनर हंसा-हंसा के लोटपोट कर दे...!

फिल्मों के मामले में आप काफी 'चूजी मानी जाती हैं, फिर कौन सी वजह थी जो फिल्म 'तानाजी द अंनसंग वारियर का रोल आपने झटपट कर लिया।

दरअसल मैं तीन चीजें कोई भी फिल्म साइन करते वक्त देखती हूं, सबसे पहला मेरा किरदार, फिर कहानी और निर्देशक, इसके साथ ही सॉलिड प्रोडक्शन हाउस, तो जहां तक इस कहानी का सवाल है तो इसमें सावित्री का मेरा किरदार, भले ही बहुत बड़ा नहीं पर सॉलिड था। एक पत्नी और मां के रूप में, उसके घर एक पत्ता भी नहीं हिलता। वह पति के लिए कामिनी से दामिनी बनने की कूवत रखती है। यही नहीं उसकी सबसे अच्छी दोस्त और ताकत देने वाली शुभचिंतक भी है निर्देशक ओम राऊत पिछले 5 साल से 'इश्क फिल्म की कहानी पर वर्क कर रहे थे और इसे सपोर्ट हमारी अपनी कंपनी कर रही थी, तो भला इंकार कैसे करती...?

100वीं फिल्म की दृष्टि से, अजय को बतौर अभिनेता और उनकी अभिनय यात्रा को, आप किस तरह से डिस्क्राइब करना चाहेंगी?

टच वुड मैं हमेशा से चाहती थी कि मेरे पति हर मामले में भले ही परफेक्ट ना हों, पर टैलेंट के मामले में मुझसे बेहतर हों। इस लिहाज से अजय वाकई कमाल के हैं जब मैं इंस्टाग्राम में उनकी फिल्मों के बारे में भावुक होकर लिखने बैठी तो लगा समय और स्थान कम पड़ जाएगा। 1-1 फिल्म के बारे में लिखते-लिखते मुझे खुशी हुई कि इतनी 
ढेर सारी फिल्मों में अजय के हिस्से अमूमन बहुत ही बेहतरीन और उम्दा फिल्में है और जो एवरेज थी भी उसे भी अपने पारस स्पर्श से कुंदन बना गए...!

बच्चे और फैमिली के लोग खासतौर पर मां तनुजा फिल्म 'तानाजी द अंनसंग वारियर में आपको देखकर कितनी खुश हुई? 

बच्चे, दूसरे फैमिली मेंबर खुश थे कि मैं और अजय साथ-साथ इस फिल्म में है, पर मां के लिए यह खुशी दुगनी थी, क्योंकि इसमें मैंने महाराष्ट्रीयन हाउसवाइफ का किरदार निभाया। जहां तक मां-बाप का सवाल है तो वो कभी नहीं मानते कि वह कभी बूढ़े होते हैं, अपने बच्चों के लिए। मेरी मां हॉस्पिटल से ही मुझे ज्ञान बांटती फिरती हैं। मुझे नहीं लगता हम उनके लिए इतना कुछ कर पाते हैं, जितना उन्होंने बचपन में हमारे लिए किया। मेरे दोनों बच्चे अपने नानी-नाना, दादी से बहुत अटैच है। बेटी का जुड़ाव दादा से बहुत ज्यादा था। मेरी कोशिश रहती है मैं ज्यादा से ज्यादा वक्त, उनके साथ बिता पाऊं।

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