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होली के सप्ततारा व्यंजन

रश्मि बड़थ्वाल

4th March 2020

होली क सप्तारा व्यंजन जो खाए वो पछताए और जो न खाए वो भी पछताए

होली के सप्ततारा व्यंजन
वसंत का मौसम, फागुनी बुखार, रंगों की बरखा, होली का त्यौहार। ऐसे में अपनी प्रियातिप्रिय पाठिकाओं के लिए प्रस्तुत हैं सप्ततारा व्यंजन विधियों का यह अमूल्य उपहार। भारत भूमि की सभी बहनों-भाभियों से मेरा अनुरोध है....अनुरोध नहीं बल्कि कसम है बहनों-भाभियों को। नारीवाद की कसम! आधुनिकता की कसम! कृपया जिस पर भी अधिक विश्वास हो उस की कसम मान लें। यदि आप इतनी भोली हैं कि इन दोनों से ही परिचित नहीं हैं (बलिहारी जाऊं इस भोलेपन के) तो कृपया टोटकापैथी की कसम है, इस होली पर पापड़ पति से बेलवाइए, नाकों चने बच्चों से चबवाइए, सास-ससुर यदि अभी तक निपटे न हों तो उनसे कहिए मुंह धोकर आइए। इस मंगलाचरण के बाद हमारे अनुष्ठान में शामिल हो जाइए। भरपेट खाइए, मेहमानों को खिलाइए। खाकर टन्न और पीकर टुन्न हो जाइए। उसके बाद भले ही दूसरों को पीटिए या दूसरों से खुद को पिटवाइए।
होली पर सबसे पहले गुझिया बना लेना ही बुद्धिमानी है। ऐसा कहीं लिखा है। कहां लिखा है...चार्ली चैपलिन की आत्मकथा में, असरानी की टेलीफोन डायरी में, राजू श्रीवास्तव के मोबाइल फोन में या के पी सक्सेना के गंभीर साहित्य में ...क्षमा करें याद नहीं आ रहा है। लिखा कहां है इससे आपको मतलब भी नहीं होना चाहिए। आम खाइए आम, पेड़ मत गिनिए। हां तो गुझिया हम बिल्कुल नये इस्टाइल से बनाएंगे। सबसे पहले दो-चार कटोरी मैदा लें (छानने की कोई जरूरत नहीं है) पानी, दूध, दही या मट्ठा से उसे गूंध लें। कडा़ गूंधें या ढीला, उसमें रंग नीला डालें या पीला, कड़ाही चढ़ाएं या पतीला, ये सब बातें मैं आपके ऊपर छोड़ रही हूं। एक तो प्रजातंत्र है उसका मैं आपको पूरा-पूरा लाभ देना चाहती हूं। दूसरे मुझे ज्यादा बोलने की आदत नहीं है, वैसे चुप मैं केवल सोते समय ही रहती हूं (शायद)।
अब घर में दो-तीन दिनों से जो कुछ भी बचा-खुचा पड़ा हो उसे इकट्ठा कर लें (चाहें तो जूठन को सम्मिलित कर लें बचत होगी)। सारे इकट्ठा पदार्थ को मिक्सी में पीस लें। मिक्सी न हो तो सास से कहें "ले बुढ़िया इसे सिल पर पीस"। बुढिया सिल पर पीस देगी। आप अपने कर कमलों को कतई कष्ट न दें। जब पिट्ठी पिस कर तैयार हो जाय तो उसमें चुटकी भर गुड़ या शक्कर मिला दें। यदि आप हृदय रोगी न हों तो दो-एक काजू किशमिश कतर कर डाल सकती हैं। हां तो मेवा, शक्कर पिट्ठी में मिलाने के बाद मैदे की लोई बेलें। पिट्ठी भरें, गुझिया गूंथें, और फिर बीरबल की खिचड़ी वाले लैंप पोस्ट पर इन्हें तलें। तलने के लिए सरसों, तिल, नारियल अथवा मिट्टी का तेल प्रयोग कर सकती हैं।
दूसरा व्यंजन हम हलुवा बनाएंगे। एक किलो करेला लें उन्हें बिना धोये कद्दूकस कर लें और रात भर इस कसे हुए को नीम के रस में भिगोये रखें। सुबह मंदी आंच में पकाएं। ठोस हो जाय तो दो-चार करछुल या कटोरी भर कर नमक डालें। चाहें तो मिर्च भी डाल सकती हैं अथवा नमक न डाल कर सिर्फ मिर्च भी डाल सकती है। इसकी मात्रा और अधिक भी बढ़ा सकती हैं स्वाद द्विगुणित हो जाएगा। बस आपका हलुवा तैयार है। इसे खा-खिला कर आपका हुलिया क्या हुआ, इस बारे में अवश्य सूचित करियेगा।
ये तो थे हमारे मिष्ठान्न पर केवल मीठे से कहीं काम चलता है। वैराइटीज के बिना स्टैंडर्ड नीचा हो जाता है। बच्चों की चड्ढियां फट रही हैं तो फटने दीजिए, पति की साइकिल टूट गयी तो टूटने दीजिए। सास का चश्मा या ससुर का दांत निकल गया हो तो भी कोई चिंता की बात नहीं है। तो नमकीन बनाने की तैयारी करते हैं। कुछ बेर की जूठी गुठलियां लेकर तलें। अखरोट और बादाम के छिलके ससुर से इमामदस्ते में कुटवा लें। इसे भून कर तली बेर की गुठलियों के साथ मिला लें। आम की गुठलियां तोड़ें। उसके भीतर का नर्म कसैला भाग पीस कर तैयार नमकीन पर छिड़कें। उतना ही छिड़कें जितना कि जले पर नमक छिड़का जाता है। जले पर नमक छिड़कने का अभ्यास होना बहुत जरूरी होता है अन्यथा जीवन की सार्थकता ही क्या रह जाएगी!
अब इस तैयार नमकीन के साथ के लिए बनाइए विशिष्ट चटनी, जिसके लिए चाहिए दो नींबू , आधा कटोरी लकड़ी का बुरादा और इच्छानुसार कुनैन। सबसे पहले लकड़ी के बुरादे को थाली पर फैलाएं। कंकड़ आदि इसमें से चुन कर कहीं फेंक दें या फिर कहीं से कंकड़ चुन कर इसमें मिला दें। एक ही बात है। हां, बुरादा सब समान गठन का होना चाहिए वरना लगेगा कि आप सुघड़ गृहिणी नहीं हैंै। नींबू खूब अच्छी तरह से धोकर कुल्हाड़े से काटें और उसका बूंद-बूंद रस बुरादे पर टपकाएं ताकि बुरादा उसे वैसे ही ग्रहण करे जैसे सूखी धरती सावन की पहली बरखा को ग्रहण करती है। जब नींबुओं से रस निकलना बंद हो जाय तो समझ लीजिए बरखा का मौसम समाप्त हो गया है। अब स्वप्न दोलन को सेवानिवृत्त करके जमीन पर आ जाइए। जमीन पर आते ही चटनी को फेंटना शुरू करिए और तब तक फेंटती रहें जब तक कि शरीर में थोड़ी सी भी सामथ्र्य बाकी रहे। जब देह शक्तिहीन होने लगे या चक्कर आने लगे तो सास या ससुर को चाय का आॅर्डर देकर लेट जायं। नींद आ जाय तो घबराएं नहीं (आखिर कभी न कभी उठेंगी तो!)। उठ कर सास-ससुर को ताजी चाय का आॅर्डर दें और अपनी चटनी में कुनैन मिला कर होली की तैयारी पूरी कर लें। होली की दावत में मुझे बुलाना मत भूलिएगा। मैंने एक अंतरिक्ष यात्री से पोशाक उधार मांगी हुई है आपकी दावत में आने के लिए। धन्यवाद।

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