'सबके लिए हो बराबरी का अधिकार, इस बार महिला दिवस का है कुछ ऐसा आधार...!

गीतांजली शर्मा

4th March 2020

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, महिलाओं का वो सम्मान जो कहीं खो गया था उसे विश्व स्तर पर एक पहचान दिलाई वर्ष 1917 में सोवियत संघ ने। सोवियत संघ ने इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया और इस तरह यह आसपास के देशों में भी फैल गया।

'सबके लिए हो बराबरी का अधिकार, इस बार महिला दिवस का है कुछ ऐसा आधार...!
प्रत्येक 8 मार्च को दुनियाभर में यह दिन महिलाओं को सम्मानित करने की दृष्टि से मनाया जाता है। महिलाओं के लिए यह दिन किसी उत्सव से कम नहीं। विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए उनके राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियों के आधार पर इस दिन को उनका दिन घोषित कर दिया गया है। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरूषों से कम नहीं। यहां तक कि पुरूष प्रधान क्षेत्र में भी उन्होनें हालिया दिनों में बढ़चढ़ कर ना सिर्फ अपनी भागीदारी दी है बल्कि अपने आप को हर कदम पर प्रूफ भी किया है। हालांकि महिलाओं का अपने ही लोगों के बीच अपने आप को प्रमाणित करने का संघर्षों का ये फलसफा काफी पुराना है लेकिन बदलते वक्त के साथ महिलाओं का वक्त भी काफी हद तक बदला है और उन्होनें हर क्षेत्र में निसंदेह ही खुद को प्रमाणित किया है।

 कुछ ऐसे शुरूआत हुई इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की-

वैसे तो इस दिन का इतिहास काफी पुराना है अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वाहन पर यह दिन सबसे पहले 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था। साल 1910 में सोशलिस्ट कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया और इसका मुख्य लक्ष्य महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाने का था क्योंकि उस समय महिलाओं को वोट देने तक का अधिकार नहीं था। हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक खास थीम पर आयोजित की जाती है और इस थीम की शुरूआत भी साल 1996 से की गई है। सबसे पहली थीम 'अतीत का जश्न और भविष्य की योजना' रखी गई थी तब से लेकर आज तक हर साल एक नई थीम और नये लक्ष्य के साथ कई देश इसे एक साथ मिलकर मनाते हैं। इस साल की थीम जेनरेशन इक्वेलिटी है। जेनरेशन इक्वेलिटी महिलाओं के अधिकार की बात करता है। इन्हीं बातों के इर्द-गिर्द इस बार की थीम केंद्रित है। कहा जाता है कि महिलाएं समाज का वो पहलू हैं जिनके आसपास हमारा पूरा समाज केंद्रित है पर जमीनी स्तर पर ये बातें कितनी सार्थक है यह देखने, जानने और समझने की जरूरत है, उसका आंकलन करने की जरूरत है। चूंकि आज एक भी ऐसा क्षेत्र नहीं जहां महिलाओं ने अपनी सार्थकता सिद्ध  नहीं की है, वे हर तरीके हर स्तर पर सक्षम हैं बस जरूरत है तो उन्हें भी बराबरी का मौका देने की। चाहे वह घर हो, कार्यस्थल या फिर सामाजिक स्तर पर लिया गया कोई भी निर्णय, वह हर निर्णय में अपनी सहभागिता देने के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं। महिलाओं का कत्वर्य निसंदेह ही उनके अधिकारों के बढ़ने से बढ़ेगा। एक सशक्त समाज की नींव एक सशक्त महिला के हाथों ही बढ़ सकती है इसी परिकल्पना के आधार पर इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम 'सबको मिले समान अवसर' कुछ इस आधार को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 
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