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जिंदगी की लगाम अपने हाथ में लें

शहनाज़ हुसैन

5th March 2020

तीन दशक पहले मैंने लिखा था कि हर महिला को अपने रंग में बढऩे और फलने का हक है। मुझे विश्वास है कि आने वाले कुछ सालों में महिलाओं को नज़रअंदाज़ करना मुमकिन नहीं होगा और मैं सभी महिलाओं की भावनाओं की आज़ादी को सलाम करती हूं।

जिंदगी की लगाम अपने हाथ में लें
जिस तरह बिना पानी वाला पौधा सूखकर मुरझा जाता है वैसे ही जो महिला समाज की बंदिशों से लड़कर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करती है वो भी मुरझा जाती है। हमारे समाज में बदलाव तभी आएगा जब पुरुष महिलाओं को मोती की तरह अपने सीप से बाहर निकलने का मौका देंगे। आज का समय बिलकुल बदल गया है।आज महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपना नाम बना लिया है। मुझे हमेशा से विश्वास रहा है कि हर महिला, हर क्षेत्र में पूरी तरह सफल हो सकती है और यह बहुत गर्व की बात है कि किस तरह हर महिला समाज की बेडिय़ों को तोड़कर इतना सफल हो रही है।

खड़े होने की काबिलियत है

व्यवसाय के क्षेत्र में भी ऐसा कोई नियम नहीं है कि महिलाएं पुरुषों से कम हैं। अगर महिलाओं को भी बराबर का मौका दिया जाये तो वे खुद को पुरुषों जितना ही काबिल साबित कर सकती हैं। हर महिला एक पत्नी, गृहणी, मां और अपना करियर बखूबी निभा लेती हैं। शुरुआत से महिलाएं समय प्रबंधन, धैर्य और बजट को संभालना सीख लेती हैं। उनमें ना केवल हिम्मत होती है, मनोबल और करियर को मैनेज करने की क्षमता होती है बल्कि वे समझदारी, प्रतिभा और रचनात्मकता में पुरुषों से कम नहीं होती। पढ़ाई में भी वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़े होने की काबिलियत रखती हैं।

प्रेरणा की स्रोत हैं

भारतीय महिला ना केवल अपने घर परिवार का ख्याल रखती है बल्कि वे दूर के रिश्तेदारों का भी बहुत ख्याल रखती है। इसी वजह से महिलाएं चीज़ों को एकीकृत और उनका पालन पोषण करना जानती हैं। भारतीय संस्कृति महिलाओं को सहन शक्ति, दूरदर्शिता, धैर्य और मेहनत करना सिखाती है और यह सभी गुण करियर के क्षेत्र में बेहद ज़रूरी हैं, खासकर व्यापार के क्षेत्र में। खुद ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को काम पर रखने के बाद मैं यह कह सकती हूं कि उनमें लोगों से बात करने की क्षमता ज़्यादा होती है और यह हमेशा ही एक बहुत बड़ा लाभ होता है। अगर सॉफ्ट स्किल्स की भी बात करें तो उनमें भी महिलाएं अपने नीचे काम करने वाले लोगों को भी बहुत अच्छे से प्रेरित कर पाती हैं।

सशक्त होना बहुत ज़रूरी है

मेरा मानना है कि वित्तीय रूप से भी महिलाओं का सशक्त होना बहुत ज़रूरी होता है। यह उन्हें ना केवल मज़बूत बनाता है बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। यही कारण है जिसकी वजह से महिलाओं के लिए पेशेवर शिक्षा बेहद ज़रूरी होती है। लेकिन हमारा देश कितना भी आगे क्यों ना बढ़ जाये, लोगों के लिए महिलाओं के सपनों और उनकी महत्वाकांक्षाओं को अपनाना इतना मुश्किल होता है। लेकिन आज की महिला इन सब समस्याओं का अच्छे से सामना करना जानती है।

अपनी सोच बदलें

हां, समय बहुत बदल गया है, लेकिन अब भी बदलाव के लिए बहुत समय है। सबसे ज़रूरी यह है कि लोग अपनी सोच बदलें। घर की बेटी को भी सभी सुविधाएं और सभी मौके बराबर मिलने चाहिए। ज़ोर-ज़बरदस्ती और बाहर के लोगों से कभी बदलाव नहीं आ सकता। इस बदलाव की शुरुआत अपने खुद के घर से और अपने आसपास के लोगों से होती है।

सपने देखना आवश्यक है

महिलाओ को मैं हमेशा यह सलाह देती हूं कि अगर उन्हें पूरी तरह सशक्त होना है तो उन्हें सभी तरह की प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेनी चाहिए। मैं उन्हें इस बात की सलाह ही दूंगी की अपनी जि़ंदगी की लगाम अपने हाथ में लें और अपने स्वास्थ का ख्याल रखें। अपने पोषण और स्वस्थ जीवन शैली की जानकारी लें। अपने ऊपर और अपनी काबिलियत पर पूरा विश्वास रखें और जीवन भर सीखते रहें। अगर आप खुद को सफल देखने का सपना देखते हैं तो कभी भी रुके ना। सपने देखना आवश्यक होता है और जब आप कोई सपना देखते हैं तो उसे पूरा करने की हिम्मत भी रखें।

प्रोफेशनल ट्रेनिंग है जरूरी

महिलाओं का यदि पूरी तरह से सफल होना है तो उन्हें सभी तरह की प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेने की आवश्यकता है।

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