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किडनी प्रॉब्लम को न करें अनदेखा

अर्पणा यादव

13th March 2020

किडनी यानी गुर्दों की समस्या आजकल तेजी से बढ़ रही है। सेहत के प्रति लापरवाही इसके लिए काफी जिम्मेदार साबित होती है। शुरुआती दौर में जांच और प्रबंधन से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

किडनी प्रॉब्लम को न करें अनदेखा
आमतौर पर किडनी से संबंधित रोगों को मूत्र उत्र्सजन समस्या मान लिया जाता है, लेकिन वाकई यदि किडनी से संबंधित समस्याओं की बात करें तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किडनी के तमाम रोग दूसरे रोगों को जन्म देते हैं, साथ ही दूसरे कई रोगों का किडनी की संचालन प्रक्रिया पर असर पड़ता है, फेलियर में भी हो सकता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह भी है कि बहुत बड़ी संख्या में लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजरंदाज करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप डॉक्टर तक केस पहुंचते-पहुंचते देर हो चुकी होती है।  अधिकतर मामलों में किडनी फेल होने और इसके प्रत्यारोपण होने की नौबत कुछ रोगों की वजह से आती है इस बारे में श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के नियर कंसल्टेंट एंड चीफ ऑफ एक्शन किडनी ट्रांसप्लांट, एंड डायलिसिस डिपार्टमेंट, डायबिटीज डॉक्टर राजेश अग्रवाल कहते हैं कि दरअसल डायबिटीज ऐसा रोग है, जिसके तहत शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है और इंसुलिन वह हार्मोन है, जो रक्त में शुगर की मात्रा को निर्धारित करता है, और खून में बढ़ी शुगर की मात्रा किडनी समेत मुख्य अंगों को नुकसान पहुंचाती है। 

हाइपरटेंशन

हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन ब्लड वैसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके कारण किडनी का शरीर के तरल में से अशुद्ध पदार्थ निकालने की प्रक्रिया बाधित होती है, और संबंधित अंग प्रभावित या खराब होने लगते हैं। 

कैसे बचा जा सकता है

जीवनशैली में सुधार से कर इन गंभीर रोगों से बचा जा सकता है इस बारे में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट एंड डायरेक्टर, सेंटर ऑफ नेफ्रोलोजी, यूरोलोजी एंड रीनल ट्रांसप्लांटेशन डॉक्टर विकास जैन कहते हैं कि इस बार वल्र्ड किडनी डे की थीम प्रिवेंशन टू डिटेक्शन है यानि इस बात पर खासा जोर दिया गया है कि जीवनशैली में सुधार के माध्यम से रोग की रोकथाम की जाए और रोग समय पकड़ में आए और निश्चित इलाज शुरू हो।

यूरीन का असामान्य रंग व बदबू

यदि यूरिन का कोई असामान्य रंग दिखाई दे, या फिर गाढ़ा पेशाब आने लगे, यूरिन में से बदबू आने लगे तो तुरंत संबंधित डॉक्टर की सलाह लें और बताई गई जांच करवाएं।पेन किलर्स से करें परहेज: अक्सर दर्द की स्थिति में खासकर बिना डॉक्टर के परामर्श या दर्द से छुटकारे के लिए असामान्य मात्रा में इसका सेवन किया जाता है। दरअसल अक्सर पेन किलर्स किडनी तक रक्त का प्रवाह कम कर देते हैं जो जिससे किडनी को नुकसान होने के जोखिम होते हैं। 

नमक व चीनी की मात्रा करें सीमित

स्वस्थ किडनी के लिए नमक व चीनी की संतुलित मात्रा लें। क्योंकि नमक में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और यह किडनी के संचालन को बाधित करता है,और चीनी शरीर में शुगर की मात्रा को प्रभावित करती है। जरूरी है अपने डाइट प्लान अनुसार दोनों की मात्रा निर्धारित करें। 

धूम्रपान व नशे की लत से निजात 

हालांकि धूम्रपान सभी अंगों के लिए हानिकारक है, लेकिन किडनी के विषय में यह ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है, ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है जिससे किडनी का 
संचालन प्रभावित होता है। 

यूरिन व खून की जांच करवाएं

एहतियात के तौर डॉक्टर के निर्देशानुसार ब्लड व यूरिन की जांच करवाएं। 

तनाव व डायबिटीज नियंत्रित रखे

मानसिक स्वास्थ्य का शारीरिक स्वास्थ्य में बहुत बड़ा योगदान है। ऐसे में अपना स्ट्रेस मैनेजमेंट करें और डायबिटीज और ब्लड प्रेशर संबंधित बीमारियों से दूर रहें। 

नियमित व्यायाम करें

व्यायाम करना या फिजिकल एक्टिविटी करना ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाने में मदद करता है, जो कि किडनी के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है।

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