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बॉडी शेमिंग का शिकार न बनने दें खुद को

यशोधरा वीरोदय

13th March 2020

सोशल मीडिया के इस युग में बॉडी शेमिंग आम बात हो चुकी है, पर इससे पहले कि बॉडी शेमिंग का ज़हर आपके अपने दिलों-दिमाग में उतरे, इसके असर को खत्म करना जरूरी है और इसके लिए आपको बॉडी शेमिंग की अवधारणा को समझना होगा।

बॉडी शेमिंग का शिकार न बनने दें खुद को
कितनी मोटी है वो... सबकुछ तो ठीक है पर रंग थोड़ा दबा हुआ... कद छोटा है... अरे कितनी लंबी है भला इतनी लंबी लड़कियां भी अच्छी लगती हैं क्या... चाल देखी है, कैसे चलती है वो... ऐसी बहुत सी नकारात्मक बाते हैं, जिनसे महिलाओं को हर रोज दो-चार होना पड़ता है और कई बार ये बातें सिर्फ बातें नहीं रह जाती, बल्कि ये किसी के समूचे व्यक्तित्व पर सवाल खड़ा कर उसके आत्म सम्मान को धराशयी कर देती हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉडी शेमिंग की जो आज के समय में एक बड़ी समस्या के रूप में पनप रही है। वैसे तो महिला हो या पुरुष दोनो ही बॉडी शेमिंग का शिकार बनते हैं, पर महिलाओं को सबसे अधिक इसका निशाना बनाया जाता है। क्योंकि महिलाओं को हमेशा से बाहरी रंग रूप की कसौटी पर परखा जाता रहा है और आज के वक्त में जब बाजारवाद से लेकर सोशल मीडिया का बोलबाला है तब बॉडी शेमिंग भी अपने चरम पर पहुंच चुका है। 
बात चाहें कद-काठी की हो या बाहरी रंग-रूप की, देखा जाए तो हर व्यक्ति में कोई न कोई कमी होती है, लेकिन जब यही बात आपके लिए शर्मिंदगी का कारण बन जाए और दूसरे आपको उस बात का अहसास दिलाकर परेशान करने लगें तो फिर ये स्थिति बॉडी शेमिंग कहलाती है। ये मामूली हंसी-मजाक, टीका-टिप्पणी से शुरू होकर बुलिंग तक पहुंच सकती है और कई बार तो इसका असर इतना गहरा होता है कि इसके चलते मानसिक अवसाद की स्थिति भी पैदा हो जाती है। मनो विशेषज्ञों की माने तो बॉडी शेमिंग आपके मन-मस्तिष्क पर घातक प्रभाव डालती है, इसके चलते डिप्रेशन, दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। कई बार तो ये स्ट्रोक का कारण भी बन सकता है।

ऐसे करें बचाव 

 
चाहें वो आम महिला हो या कोई सेलिब्रिटी, शारीरिक बनावट के आधार पर महिलाओं का मूल्यांकन किया जाता रहा है, जोकि अब बॉडी शेमिंग की समस्या के रूप में सामने आ चुका है। अब सवाल ये उठता है कि इससे कैसे बचा जाए, क्योंकि इसका असर आपके असल व्यक्तित्व पर भी पड़ सकता है। दरअसल, इससे बचने के लिए आपको कुछ बातें अमल में लानी होंगी, जैसे... 

औरों की नजर से खुद को देखना बंद करें 

लोग आपके बारे में क्या कहते हैं, क्या सोचते हैं और आप दूसरों की नजरों में कैसे दिखती हैं... इन सब बातों को अपने ख्याल से निकाल दें। क्योंकि आपकी अपनी खुद की पर्सनालिटी है, जबकि लोग अपने सोच विचार के आधार पर उसका आंकलन कर रहे होते हैं, जोकि सटीक नहीं होता है। इसलिए बॉडी शेमिंग से खुद को बचाने के लिए जरूरी है कि दूसरों का नजरिया अपने व्यक्तित्व पर हावी न होने दें।  

बिना शर्त पहले खुद को करें स्वीकार 

दुनिया आपके व्यक्तित्व को स्वीकार करे, इसके लिए जरूरी है कि सबसे पहले आप जैसे हैं, वैसे ही खुद को स्वीकार कीजिए। इसके साथ ही खुद से पसन्द कीजिए और प्यार कीजिए। क्योंकि अगर आप खुद को पसन्द करते हैं तो इसस आपके व्यक्तित्व में अलग चमक दिखेगी, जिससे बाकी लोग भी प्रभावित हुए बिना नहीं रहेंगे।

आलोचना और निंदा के बीच का अंतर समझिए

अगर आप खुद के लिए दूसरों के किए गए टीका टिप्पणी से परेशान हैं तो आपको आलोचना और निंदा के बीच का अंतर समझना होगा। दरअसल, आलोचना से कई बार व्यक्ति को बेहतर करने के लिए प्रेरणा भी मिलती है। पर अगर कोई जानबुझकर आपको शर्मिंदा करने के लिए कोई बात कह रहा है तो फिर आपको उसे वहीं जवाब देना पड़ेगा। क्योंकि बार-बार की गईं ऐसी चीजें अक्सर गलत परिणाम देती हैं। जैसे कि स्कूल-कॉलेज और ऑफिस में भी कई बार कुछ लोग जाने अंजाने बुलिंग के शिकार बन जाते हैं। जबकि अगर पीड़ित व्यक्ति समय रहते ही लोगों को माकूल जवाब दे दे तो स्थिति खराब होने से बच सकती है। 

सोशल मीडिया के अनावश्यक दबाव से बचें

आज के समय में बॉडी शेमिंग को बढ़ावा देने में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा जरिया बना है। लोग आपकी तस्वीरें देखते हैं और आपके बारे में अपनी मनगढ़त राय बना लेते हैं फिर उसी आधार पर उस तस्वीर पर कमेंट कर देते हैं। जो कई बार आपको बुरी लगती है, इसलिए ट्रोलर्स को इतना हक ही न दें कि वो आपके व्यक्तित्व पर उंगली उठा सकें। इसके लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया के अनावश्यक दबाव से बचें, क्योंकि सोशल मीडिया पर आपको बहुत से ऐसे लोग मिलते हैं जिनसे आपका असल दुनिया में कभी सामना भी नहीं होता है, ऐसे में इस आभासी दुनिया के लोगों का आपसे कोई वास्तविक सरोकार नहीं होता है। फिर उनके किए गए कमेंट्स का भी आपके असल व्यक्तित्व पर असर नहीं पड़ना चाहिए। 
वैस आपको बता दें कि ये एहतिया की बातें तब तक लागू होती है, जब तक कि बॉडी शेमिंग का आपके मनोस्थिति पर असर बहुत घातक नहीं होता है। लेकिन अगर स्थिति बहुत अधिक संवेदनशील हो चुकी है तो ऐसी स्थिति में आपको किसी मनो चिकित्सक से जरूर मिलना चाहिए। ताकी वो बेहतर काउंसलिंग के जरिए आपको इस दलदल से बाहर निकाल सके। वहीं आप मनो चिकित्सक के पास जाने की इच्छा नहीं रखते तो कम से कम घर परिवार में इस बारे किसी से बात करें। क्योंकि बातचीत के जरिए इसका बेहतर हल निकल सकता है। इसके अलावा अगर अभिभावक हैं तो फिर इस बात का ख्याल रखना चाहिए आपका बच्चा स्कूल- कॉलेज या बाहर कहीं भी बॉडी शेमिंग या बुलिंग का शिकार तो नहीं हो रहा है और अगर ऐसा हो रहा है तो उससे बात कर स्थिति को नियंत्रित करें। 

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